कक्षा 12वीं — भौतिक विज्ञान (Physics) अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026–27 | आदर्श-प्रश्नपत्र एवं मॉडल उत्तर
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कक्षा 12वीं — भौतिक विज्ञान (Physics)

अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026–27 | आदर्श-प्रश्नपत्र एवं मॉडल उत्तर
समय: 3 घंटे
पूर्णांक: 70
प्रश्न: 20 मुख्य प्रश्न
संक्षिप्त विवरण: यह MP Board के नवीनतम ब्लूप्रिंट (70 अंक) और निर्धारित अर्द्धवार्षिक पाठ्यक्रम (अध्याय 1 से 10 तक: स्थिर वैद्युतिकी, धारा, चुंबकत्व, EMI, AC, EM तरंगे और प्रकाशिकी) पर आधारित कक्षा 12 भौतिक विज्ञान का अभ्यास मॉडल पेपर है।
विद्यार्थियों के लिए निर्देश: सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। पहले स्वयं प्रश्न हल करें, फिर “उत्तर देखें” बटन दबाकर अपने उत्तर का मिलान करें। एक समय में केवल एक ही उत्तर खुलेगा जिससे अभ्यास करने में आसानी हो।

वस्तुनिष्ठ प्रश्न (प्रश्न 1 से 5)

कुल 28 वस्तुनिष्ठ प्रश्न हैं। प्रत्येक 1 अंक। (कुल 28 अंक)।
प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए— 6 × 1 = 6
(1) निर्वात की विद्युतशीलता (ε₀) का SI मात्रक है?
क) C² N⁻¹ m⁻²
ख) N m² C⁻²
ग) C N m²
घ) N C⁻² m²
मॉडल उत्तर:
(क) C² N⁻¹ m⁻²
(2) ओमीय प्रतिरोध (Ohmic resistance) का उदाहरण है?
क) संधि डायोड
ख) तांबे का तार
ग) ट्रांजिस्टर
घ) निर्वात नलिका
मॉडल उत्तर:
(ख) तांबे का तार
(3) चुम्बकीय फ्लक्स (Magnetic Flux) का SI मात्रक है?
क) टेस्ला
ख) वेबर
ग) गॉस
घ) ओर्स्टेड
मॉडल उत्तर:
(ख) वेबर
(4) लेंज का नियम (Lenz's law) किस संरक्षण सिद्धांत पर आधारित है?
क) आवेश संरक्षण
ख) संवेग संरक्षण
ग) ऊर्जा संरक्षण
घ) द्रव्यमान संरक्षण
मॉडल उत्तर:
(ग) ऊर्जा संरक्षण
(5) निर्वात में विद्युत चुम्बकीय तरंगों के वेग (c) का सूत्र है?
क) c = √(μ₀ε₀)
ख) c = 1/√(μ₀ε₀)
ग) c = μ₀/ε₀
घ) c = ε₀/μ₀
मॉडल उत्तर:
(ख) c = 1/√(μ₀ε₀)
(6) स्वस्थ नेत्र के लिए स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी कितनी होती है?
क) अनंत
ख) 50 सेमी
ग) 25 सेमी
घ) 10 सेमी
मॉडल उत्तर:
(ग) 25 सेमी
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए— 6 × 1 = 6
(1) एक आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध _______ होता है।
मॉडल उत्तर:
अनंत (Infinite)
(2) विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण (Electric Dipole Moment) एक _______ राशि है।
मॉडल उत्तर:
सदिश (Vector)
(3) ट्रांसफार्मर _______ के सिद्धांत पर कार्य करता है।
मॉडल उत्तर:
अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction)
(4) जल के अंदर वायु का बुलबुला _______ लेंस की भांति व्यवहार करता है।
मॉडल उत्तर:
अवतल (Concave)
(5) प्रकाश के व्यतिकरण (Interference) के लिए दोनों प्रकाश स्रोतों का _______ होना आवश्यक है।
मॉडल उत्तर:
कला संबद्ध (Coherent)
(6) किरचॉफ का प्रथम नियम (संधि का नियम) _______ संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
मॉडल उत्तर:
आवेश (Charge)
प्रश्न 3. सत्य / असत्य लिखिए— 6 × 1 = 6
(1) दो विद्युत क्षेत्र रेखाएं एक दूसरे को कभी नहीं काटतीं।
मॉडल उत्तर:
सत्य
(2) संधारित्र दिष्ट धारा (DC) को अपने में से प्रवाहित होने देता है।
मॉडल उत्तर:
असत्य (संधारित्र DC को रोकता है और AC को गुज़रने देता है)
(3) स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) का SI मात्रक फैरड है।
मॉडल उत्तर:
असत्य (इसका मात्रक हेनरी होता है)
(4) दृश्य प्रकाश (Visible light) की तरंगदैर्ध्य पराबैंगनी (UV) किरणों से अधिक होती है।
मॉडल उत्तर:
सत्य
(5) हीरे का चमकना पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) का उदाहरण है।
मॉडल उत्तर:
सत्य
(6) प्राथमिक इंद्रधनुष में लाल रंग बाहर की ओर तथा बैंगनी रंग अंदर की ओर होता है।
मॉडल उत्तर:
सत्य
प्रश्न 4. सही जोड़ी बनाइए— 5 × 1 = 5
(1) लॉरेंज बल (Lorentz Force) (सही जोड़ी का मिलान नीचे उत्तर में देखें)
मॉडल उत्तर:
q(v × B)
(2) विद्युत धारिता (Capacitance) (सही जोड़ी का मिलान नीचे उत्तर में देखें)
मॉडल उत्तर:
फैरड (Farad)
(3) भंवर धाराएं (Eddy currents) (सही जोड़ी का मिलान नीचे उत्तर में देखें)
मॉडल उत्तर:
फोको धाराएं (Foucault currents)
(4) स्नेल का नियम (Snell's Law) (सही जोड़ी का मिलान नीचे उत्तर में देखें)
मॉडल उत्तर:
प्रकाश का अपवर्तन (Refraction)
(5) ब्रूस्टर का नियम (Brewster's Law) (सही जोड़ी का मिलान नीचे उत्तर में देखें)
मॉडल उत्तर:
प्रकाश का ध्रुवण (Polarization)
प्रश्न 5. एक वाक्य/शब्द में उत्तर दीजिए— 5 × 1 = 5
(1) कूलॉम के नियम का सदिश (Vector) रूप लिखिए。
मॉडल उत्तर:
F⃗ = (1 / 4πε₀) · (q₁q₂ / r²) r̂
(2) धारा घनत्व (J), विद्युत क्षेत्र (E) और चालकता (σ) में क्या संबंध है?
मॉडल उत्तर:
J = σE (ओम के नियम का सूक्ष्म रूप)
(3) स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) का SI मात्रक क्या है?
मॉडल उत्तर:
हेनरी (Henry)
(4) किस रंग के प्रकाश के लिए कांच का अपवर्तनांक अधिकतम होता है?
मॉडल उत्तर:
बैंगनी रंग (Violet color) के लिए।
(5) तरंगाग्र (Wavefront) के लंबवत खींची गई रेखा क्या कहलाती है?
मॉडल उत्तर:
किरण (Ray)

अति लघु-उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 6 से 12) (MPBSE विज्ञप्ति दिनांक 15-10-2026 अनुसार 2 अंक – अतिलघुउत्तरीय प्रश्नों में आतंरिक विकल्प / अथवा प्रश्न नहीं रहेंगे)

प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का है। कुल 14 अंक। 
नोट : 2 अंकों के प्रश्नों में अथवा प्रश्न नहीं आयेंगे, अभ्यास के लिए दो-दो प्रश्न रखे हैं.
प्रश्न 6. समविभव पृष्ठ किसे कहते हैं? 2 अंक
मॉडल उत्तर:
विद्युत क्षेत्र में स्थित वह पृष्ठ जिसके प्रत्येक बिंदु पर विद्युत विभव का मान एक समान (बराबर) होता है, समविभव पृष्ठ (Equipotential surface) कहलाता है। समविभव पृष्ठ पर किसी आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में किया गया कार्य शून्य होता है।
विद्युत द्विध्रुव (Electric Dipole) किसे कहते हैं?
मॉडल उत्तर:
जब दो समान परिमाण किंतु विपरीत प्रकृति के बिंदु आवेश ( +q और -q ) एक-दूसरे से अल्प दूरी (2l) पर स्थित होते हैं, तो आवेशों के इस निकाय को विद्युत द्विध्रुव कहते हैं। (जैसे- HCl, H₂O अणु)।
प्रश्न 7. ओम का नियम लिखिए। 2 अंक
मॉडल उत्तर:
ओम के नियमानुसार: "यदि किसी चालक की भौतिक अवस्थाएं (जैसे ताप, दाब, लंबाई आदि) अपरिवर्तित रहें, तो उसके सिरों पर लगाया गया विभवांतर (V), उसमें प्रवाहित होने वाली धारा (I) के अनुक्रमानुपाती होता है।"
V ∝ I ⇒ V = IR (जहाँ R चालक का प्रतिरोध है)।
अनुगमन वेग (Drift velocity) से क्या तात्पर्य है?
मॉडल उत्तर:
विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में किसी चालक के अंदर मुक्त इलेक्ट्रॉनों द्वारा प्राप्त वह सूक्ष्म नियत औसत वेग, जिससे वे धनात्मक सिरे की ओर खिसकते हैं, अनुगमन वेग कहलाता है। इसका मान लगभग 10⁻⁴ m/s होता है।
प्रश्न 8. एम्पियर का परिपथीय नियम (Ampere's Circuital Law) लिखिए। 2 अंक
मॉडल उत्तर:
इस नियम के अनुसार: "निर्वात में किसी बंद वक्र के चारों ओर चुम्बकीय क्षेत्र (B) का रेखीय समाकलन, उस बंद वक्र द्वारा घेरे गए क्षेत्रफल से गुजरने वाली कुल नेट धारा (I) का μ₀ गुना होता है।"
∮ B·dl = μ₀I
बायो-सेवर्ट का नियम लिखिए।
मॉडल उत्तर:
बायो-सेवर्ट के नियमानुसार: किसी धारावाही चालक के छोटे अल्पांश (dl) के कारण किसी बिंदु P पर उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र (dB) चालक में बहने वाली धारा (I), अल्पांश की लंबाई (dl) और ज्या (sin θ) के अनुक्रमानुपाती तथा उनके बीच की दूरी (r) के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
dB = (μ₀ / 4π) · (I dl sinθ / r²)
प्रश्न 9. फैराडे के विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के नियम लिखिए। 2 अंक
मॉडल उत्तर:
प्रथम नियम: जब किसी बंद परिपथ से बद्ध चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन होता है, तो परिपथ में एक प्रेरित विद्युत वाहक बल (emf) उत्पन्न हो जाता है।
द्वितीय नियम: प्रेरित विद्युत वाहक बल का परिमाण, चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के अनुक्रमानुपाती होता है। (e = - dΦ/dt)
लेंज का नियम क्या है?
मॉडल उत्तर:
लेंज के नियमानुसार: "विद्युत चुम्बकीय प्रेरण के कारण परिपथ में उत्पन्न प्रेरित धारा की दिशा हमेशा ऐसी होती है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न हुई है।" यह नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का ही एक रूप है।
प्रश्न 10. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की शर्तें लिखिए। 2 अंक
मॉडल उत्तर:
पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए दो शर्तें आवश्यक हैं:
1. प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करनी चाहिए।
2. सघन माध्यम में आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक होना चाहिए।
प्रकाश का व्यतिकरण (Interference) क्या है?
मॉडल उत्तर:
जब समान आवृत्ति और लगभग समान आयाम वाली दो कला संबद्ध प्रकाश तरंगें एक ही दिशा में गमन करती हुई अध्यारोपित होती हैं, तो माध्यम के कुछ बिंदुओं पर प्रकाश की तीव्रता अधिकतम (संपोषी) और कुछ बिंदुओं पर न्यूनतम (विनाशी) हो जाती है। इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं।
प्रश्न 11. प्रत्यावर्ती धारा (AC) और दिष्ट धारा (DC) में दो अंतर लिखिए। 2 अंक
मॉडल उत्तर:
1. दिशा: प्रत्यावर्ती धारा की दिशा और परिमाण समय के साथ आवर्ती रूप से बदलते हैं, जबकि दिष्ट धारा की दिशा समय के साथ नियत रहती है।
2. ट्रांसफार्मर का उपयोग: AC के वोल्टेज को ट्रांसफार्मर द्वारा आसानी से कम या ज्यादा किया जा सकता है, जबकि DC में ट्रांसफार्मर का उपयोग नहीं किया जा सकता।
वाटहीन धारा (Wattless current) किसे कहते हैं?
मॉडल उत्तर:
यदि किसी प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में केवल शुद्ध प्रेरकत्व (L) या शुद्ध धारिता (C) हो, तो परिपथ में धारा और वोल्टेज के बीच 90° (π/2) का कलान्तर होता है। इस स्थिति में परिपथ में औसत शक्ति क्षय शून्य (P = VI cos90° = 0) होता है। ऐसी धारा को वाटहीन धारा कहते हैं।
प्रश्न 12. विद्युत चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में सबसे कम और सबसे अधिक तरंगदैर्ध्य वाली तरंगों के नाम लिखिए। 2 अंक
मॉडल उत्तर:
• सबसे कम तरंगदैर्ध्य (और सबसे अधिक आवृत्ति) वाली तरंगें: गामा (γ) किरणें।
• सबसे अधिक तरंगदैर्ध्य (और सबसे कम आवृत्ति) वाली तरंगें: रेडियो तरंगें (Radio waves)।
सूक्ष्म तरंगों (Microwaves) के दो उपयोग लिखिए।
मॉडल उत्तर:
1. रडार (Radar) प्रणाली में विमानों के नेविगेशन और दिशा ज्ञान के लिए।
2. माइक्रोवेव ओवन में भोजन को पकाने तथा गर्म करने के लिए।

लघु-उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 13 से 16)

प्रत्येक प्रश्न 3 अंक का है। कुल 12 अंक।
प्रश्न 13. गॉस का प्रमेय लिखिए एवं सिद्ध कीजिए। 3 अंक
मॉडल उत्तर:
गॉस का प्रमेय: निर्वात में किसी बंद पृष्ठ से गुजरने वाला संपूर्ण विद्युत फ्लक्स (Φe), उस बंद पृष्ठ के अंदर उपस्थित कुल आवेश (q) का 1/ε₀ गुना होता है।
सूत्र: Φe = ∮ E·dS = q/ε₀
सिद्धांत (प्रमाण): माना एक बिंदु आवेश +q, r त्रिज्या के एक गोले के केंद्र O पर स्थित है। गोले के पृष्ठ पर किसी बिंदु P पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता: E = (1/4πε₀) · (q/r²)।
गोले के पृष्ठ क्षेत्रफल dS से गुजरने वाला फ्लक्स dΦ = E·dS (चूँकि E और dS एक ही दिशा में हैं, θ = 0°)।
संपूर्ण पृष्ठ से फ्लक्स Φe = ∮ E dS = E (4πr²) = [(1/4πε₀)(q/r²)] × 4πr²।
4πr² कटने के बाद Φe = q/ε₀ (यही गॉस का प्रमेय है)।
अथवा: समांतर पट्ट संधारित्र (Parallel Plate Capacitor) की धारिता का व्यंजक ज्ञात कीजिए।
मॉडल उत्तर:
माना समांतर पट्ट संधारित्र की दो प्लेटें A और B हैं, जिनका क्षेत्रफल A और बीच की दूरी d है। प्लेटों के बीच निर्वात या वायु है।
प्लेट A पर +q और B पर -q आवेश है। प्लेटों का पृष्ठ आवेश घनत्व σ = q/A होगा।
प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र की तीव्रता E = σ/ε₀ = q / (Aε₀)।
प्लेटों के बीच विभवांतर V = E × d = (qd) / (Aε₀)।
संधारित्र की धारिता C = q / V = q / [(qd) / (Aε₀)]।
अतः C = ε₀A / d।
प्रश्न 14. व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत (P/Q = R/S) किरचॉफ के नियमों की सहायता से सिद्ध कीजिए। 3 अंक
मॉडल उत्तर:
व्हीटस्टोन सेतु संतुलन की स्थिति में होता है जब गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती (Ig = 0)।
बंद पाश ABDA में किरचॉफ के द्वितीय नियम से:
I₁P + IgG - I₂R = 0
चूंकि संतुलन में Ig = 0, अतः I₁P = I₂R ... (समीकरण 1)
बंद पाश BCDB में किरचॉफ के द्वितीय नियम से:
I₁Q - I₂S - IgG = 0
संतुलन में Ig = 0, अतः I₁Q = I₂S ... (समीकरण 2)
समीकरण 1 में समीकरण 2 का भाग देने पर:
(I₁P) / (I₁Q) = (I₂R) / (I₂S)
P / Q = R / S (यही व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत है)।
अथवा: सेल के आंतरिक प्रतिरोध (r), विद्युत वाहक बल (E) और विभवांतर (V) में संबंध स्थापित कीजिए।
मॉडल उत्तर:
माना किसी सेल का विद्युत वाहक बल E और आंतरिक प्रतिरोध r है। इसे एक बाह्य प्रतिरोध R के साथ परिपथ में जोड़ा गया है।
परिपथ की कुल धारा I = E / (R + r)
अतः E = I(R + r) = IR + Ir
ओम के नियम से बाह्य विभवांतर V = IR होता है।
मान रखने पर: E = V + Ir
अतः V = E - Ir या r = (E - V) / I या r = R(E/V - 1)।
प्रश्न 15. स्वप्रेरण (Self-induction) और अन्योन्य प्रेरण (Mutual induction) में कोई तीन अंतर लिखिए। 3 अंक
मॉडल उत्तर:
1. कुंडली की संख्या: स्वप्रेरण में केवल एक कुंडली होती है, जबकि अन्योन्य प्रेरण में दो कुंडलियाँ (प्राथमिक और द्वितीयक) पास-पास रखी होती हैं।
2. प्रेरित धारा का स्थान: स्वप्रेरण में मुख्य धारा के मान में परिवर्तन करने पर उसी कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है। अन्योन्य प्रेरण में प्राथमिक कुंडली में धारा बदलने पर द्वितीयक कुंडली में प्रेरित धारा उत्पन्न होती है।
3. गुणांक का नाम: इसके गुणांक को स्वप्रेरकत्व (L) कहते हैं। इसके गुणांक को अन्योन्य प्रेरकत्व (M) कहते हैं।
अथवा: ट्रांसफार्मर के सिद्धांत और इसके प्रकारों का वर्णन कीजिए तथा ऊर्जा क्षय के कारण लिखिए।
मॉडल उत्तर:
सिद्धांत: ट्रांसफार्मर अन्योन्य प्रेरण (Mutual Induction) के सिद्धांत पर कार्य करता है। यह प्रत्यावर्ती वोल्टेज को कम या अधिक करने के काम आता है।
प्रकार:
1. ऊंचाई ट्रांसफार्मर (Step-up): जो कम वोल्टेज को उच्च वोल्टेज में बदलता है।
2. अपचायी ट्रांसफार्मर (Step-down): जो उच्च वोल्टेज को कम वोल्टेज में बदलता है।
ऊर्जा क्षय के कारण:
1. ताम्र क्षय (तांबे के तार के प्रतिरोध के कारण ऊष्मा)।
2. भंवर धारा क्षय (लौह क्रोड में)।
3. चुम्बकीय फ्लक्स का क्षरण (हवा में फ्लक्स का लीक होना)।
4. शैथिल्य क्षय (Hysteresis loss)।
प्रश्न 16. हाइगन का द्वितीयक तरंगिकाओं (Secondary wavelets) का सिद्धांत लिखिए। 3 अंक
मॉडल उत्तर:
हाइगन के सिद्धांत के तीन मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
1. किसी प्रकाश स्रोत से तरंगे निकलकर सभी दिशाओं में फैलती हैं। माध्यम के वे सभी बिंदु जो समान कला (Phase) में कंपन करते हैं, उनका बिंदु-पथ 'तरंगाग्र' (Wavefront) कहलाता है।
2. तरंगाग्र पर स्थित प्रत्येक बिंदु एक नए प्रकाश स्रोत की तरह कार्य करता है, जिससे नई तरंगे निकलती हैं, जिन्हें 'द्वितीयक तरंगिकाएं' (Secondary wavelets) कहते हैं। ये तरंगें प्राथमिक तरंग के वेग से ही आगे बढ़ती हैं।
3. किसी भी क्षण इन द्वितीयक तरंगिकाओं पर खींचा गया उभयनिष्ठ स्पर्शरेखीय पृष्ठ (Envelope) उस क्षण तरंगाग्र की नई स्थिति को दर्शाता है।
अथवा: प्रिज्म के पदार्थ के अपवर्तनांक (Refractive Index) का सूत्र निगमित कीजिए।
मॉडल उत्तर:
न्यूनतम विचलन (Minimum deviation) की स्थिति में:
विचलन कोण δ = δ_m
आपतन कोण i = निर्गत कोण e
अपवर्तन कोण r₁ = r₂ = r
चूंकि A = r₁ + r₂, अतः A = 2r ⇒ r = A/2
हम जानते हैं δ = i + e - A
δ_m = i + i - A ⇒ 2i = A + δ_m ⇒ i = (A + δ_m)/2
स्नेल के नियम से प्रिज्म के पदार्थ का अपवर्तनांक μ = sin i / sin r
मान रखने पर: μ = [sin((A + δ_m)/2)] / [sin(A/2)]

दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न (प्रश्न 17 से 20)

प्रत्येक प्रश्न 4 अंक का है। कुल 16 अंक।
प्रश्न 17. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron) की कार्यविधि एवं सिद्धांत सचित्र समझाइए। 4 अंक
मॉडल उत्तर:
सिद्धांत: साइक्लोट्रॉन इस सिद्धांत पर कार्य करता है कि जब कोई धनावेशित कण उच्च आवृत्ति वाले विद्युत क्षेत्र और शक्तिशाली चुम्बकीय क्षेत्र (जो एक-दूसरे के लंबवत होते हैं) में गति करता है, तो चुम्बकीय क्षेत्र उसे वृत्ताकार मार्ग में घुमाता है और विद्युत क्षेत्र उसकी गतिज ऊर्जा को लगातार बढ़ाता है।
संरचना एवं कार्यविधि: इसमें धातु के दो खोखले D-आकार के कक्ष होते हैं जिन्हें डीज़ (D₁ और D₂) कहते हैं। इन्हें एक उच्च आवृत्ति वाले ऑसिलेटर (HF Oscillator) से जोड़ा जाता है। पूरे सेटअप को एक शक्तिशाली चुंबक के ध्रुवों (N और S) के बीच निर्वात में रखा जाता है。
जब डीज़ के बीच आयन उत्पन्न होता है, तो वह ऋणात्मक डीज़ की ओर आकर्षित होता है। चुम्बकीय क्षेत्र के कारण वह वृत्ताकार मार्ग में घूमता है। जब वह वापस गैप में आता है, तो ऑसिलेटर की ध्रुवता (Polarity) बदल जाती है, जिससे उसे फिर से धक्का मिलता है और उसका वेग व पथ की त्रिज्या बढ़ जाती है। अंत में अत्यधिक उच्च ऊर्जा प्राप्त करने के बाद कण को एक विक्षेपक प्लेट द्वारा बाहर निकालकर लक्ष्य (Target) पर टकराया जाता है。
(विद्यार्थी अपनी उत्तरपुस्तिका में साइक्लोट्रॉन का डीज़ और चुम्बकीय क्षेत्र दर्शाता हुआ चित्र बनाएँगे।)
अथवा: चल कुण्डली धारामापी (Moving Coil Galvanometer) की संरचना एवं कार्यविधि का वर्णन कीजिए।
मॉडल उत्तर:
सिद्धांत: जब किसी धारावाही कुण्डली को एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो उस पर एक बल आघूर्ण (Torque) कार्य करता है, जो उसे घुमाने का प्रयास करता है। यह बल आघूर्ण कुण्डली में बहने वाली धारा के अनुक्रमानुपाती होता है (τ = NIAB sinθ)।
संरचना: इसमें तांबे के पतले तार की एक आयताकार कुण्डली होती है जो एल्युमिनियम के फ्रेम पर लिपटी होती है। इस कुण्डली को एक शक्तिशाली स्थायी नाल चुंबक (N-S) के अवतल ध्रुवों के बीच फॉस्फर ब्रॉन्ज की पत्ती से लटकाया जाता है। कुण्डली के बीच में नर्म लोहे का क्रोड (Core) होता है जो चुम्बकीय क्षेत्र को त्रिज्यीय (Radial) बनाता है, ताकि θ हमेशा 90° रहे।
कार्यविधि: जब कुण्डली में धारा I प्रवाहित की जाती है, तो विक्षेपक बल आघूर्ण τ = NIAB उत्पन्न होता है। इसके कारण कुण्डली घूमती है। कुण्डली के घूमने से निलंबन तार में ऐंठन (Restoring torque) उत्पन्न होती है। संतुलन की स्थिति में: NIAB = Cθ (जहाँ C ऐंठन नियतांक है और θ विक्षेप कोण है)।
I = (C / NAB) θ ⇒ I ∝ θ। अतः धारामापी का विक्षेप उसमें बहने वाली धारा के सीधे समानुपाती होता है।
प्रश्न 18. L-C-R परिपथ के लिए परिणामी वोल्टेज, प्रतिबाधा (Impedance) और कलान्तर (Phase difference) का व्यंजक निगमित कीजिए। 4 अंक
मॉडल उत्तर:
माना एक श्रेणी L-C-R परिपथ में प्रेरकत्व L, धारिता C और प्रतिरोध R प्रत्यावर्ती वोल्टेज V = V₀ sin(ωt) के साथ जुड़े हैं। परिपथ में धारा I प्रवाहित हो रही है。
1. R के सिरों पर विभवांतर VR धारा I की कला में होता है।
2. L के सिरों पर विभवांतर VL धारा I से 90° अग्रगामी होता है।
3. C के सिरों पर विभवांतर VC धारा I से 90° पश्चगामी होता है।
VL और VC विपरीत दिशा में हैं, अतः उनका परिणामी (VL - VC) होगा।
परिणामी वोल्टेज (V): फेज़र आरेख से, V = √[VR² + (VL - VC)²]
ओम के नियम से: VR = IR, VL = IXL, VC = IXC रखने पर:
V = √[(IR)² + (IXL - IXC)²] = I √[R² + (XL - XC)²]
प्रतिबाधा (Z): Z = V / I = √[R² + (XL - XC)²] या √[R² + (ωL - 1/ωC)²]
कलान्तर (tan φ): tan φ = (VL - VC) / VR = (IXL - IXC) / IR = (XL - XC) / R।
अथवा: एक प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में सिद्ध कीजिए कि औसत शक्ति P_avg = V_rms × I_rms × cosφ.
मॉडल उत्तर:
माना किसी प्रत्यावर्ती परिपथ में वोल्टेज V = V₀ sin(ωt) और धारा I = I₀ sin(ωt - φ) है, जहाँ φ वोल्टेज और धारा के बीच कलान्तर है。
तात्कालिक शक्ति P = VI = V₀ sin(ωt) × I₀ sin(ωt - φ)
P = V₀I₀ [sin(ωt) {sin(ωt)cosφ - cos(ωt)sinφ}]
P = V₀I₀ [sin²(ωt)cosφ - sin(ωt)cos(ωt)sinφ]
एक पूर्ण चक्र के लिए औसत शक्ति P_avg निकालने पर:
sin²(ωt) का औसत मान = 1/2
sin(ωt)cos(ωt) का औसत मान = 0 होता है。
अतः P_avg = V₀I₀ [(1/2)cosφ - 0] = (V₀I₀ / 2) cosφ
इसे लिख सकते हैं: P_avg = (V₀/√2) × (I₀/√2) × cosφ
चूंकि V_rms = V₀/√2 और I_rms = I₀/√2
अतः P_avg = V_rms × I_rms × cosφ (जहाँ cosφ शक्ति गुणांक है)।
प्रश्न 19. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत कीजिए: (a) किरण आरेख (b) आवर्धन क्षमता का सूत्र जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने। 4 अंक
मॉडल उत्तर:
(a) किरण आरेख:
(विद्यार्थी अपनी उत्तरपुस्तिका में संयुक्त सूक्ष्मदर्शी का किरण आरेख बनाएँगे, जिसमें अभिदृश्यक (Objective lens - छोटे द्वारक का) और नेत्रिका (Eyepiece - बड़े द्वारक का) दर्शाएंगे। वस्तु AB को अभिदृश्यक के फोकस के ठीक बाहर रखा जाता है, जिससे वास्तविक, उल्टा व बड़ा प्रतिबिंब A'B' बनता है। यह A'B' नेत्रिका के लिए वस्तु का कार्य करता है और नेत्रिका इसका आभासी, सीधा व अत्यधिक आवर्धित अंतिम प्रतिबिंब A''B'' स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी 'D' पर बनाती है।)

(b) आवर्धन क्षमता (M):
सामान्य सूत्र: M = m_o × m_e = (v_o / u_o) × (D / u_e)
जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (D) पर बनता है, तो नेत्रिका एक सरल सूक्ष्मदर्शी की तरह कार्य करती है, जिसका आवर्धन m_e = (1 + D/f_e) होता है।
अतः संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की कुल आवर्धन क्षमता:
M = - (v_o / u_o) × (1 + D/f_e)
(यदि वस्तु अभिदृश्यक के फोकस के बहुत निकट हो u_o ≈ f_o और प्रतिबिंब नेत्रिका के पास बने v_o ≈ L (नली की लंबाई), तो M ≈ - (L/f_o) × (1 + D/f_e) होता है)।
अथवा: खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical Telescope) की आवर्धन क्षमता के लिए व्यंजक निगमित कीजिए तथा किरण आरेख बनाइए। (जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बने)
मॉडल उत्तर:
किरण आरेख: (विद्यार्थी किरण आरेख बनाएँगे जिसमें अभिदृश्यक लेंस का द्वारक बड़ा और नेत्रिका का छोटा होगा। अनंत से आने वाली समांतर किरणें अभिदृश्यक के फोकस पर वास्तविक व उल्टा प्रतिबिंब A'B' बनाती हैं। यह नेत्रिका के लिए वस्तु का कार्य करता है, जो अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी पर बनाता है।)

आवर्धन क्षमता (M):
M = (अंतिम प्रतिबिंब द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण β) / (वस्तु द्वारा आँख पर बना दर्शन कोण α)
M = β / α ≈ tan β / tan α
चित्र की ज्यामिति से, tan β = A'B' / u_e और tan α = A'B' / f_o
M = (A'B' / u_e) / (A'B' / f_o) = f_o / u_e
जब अंतिम प्रतिबिंब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी (v_e = -D) पर बने, तो नेत्रिका के लिए लेंस सूत्र (1/v - 1/u = 1/f) से:
1/-D - 1/-u_e = 1/f_e ⇒ 1/u_e = 1/f_e + 1/D = (1/f_e)(1 + f_e/D)
इसे M के सूत्र में रखने पर:
M = - (f_o / f_e) × (1 + f_e/D) (यहाँ ऋणात्मक चिह्न बताता है कि अंतिम प्रतिबिंब उल्टा बनता है)।
प्रश्न 20. यंग के द्विक-स्लिट प्रयोग (Young's Double Slit Experiment) में फ्रिंज चौड़ाई (Fringe width) का व्यंजक निगमित कीजिए। 4 अंक
मॉडल उत्तर:
माना दो स्लिटों S₁ और S₂ के बीच की दूरी d है और उनसे पर्दे की दूरी D है। प्रकाश की तरंगदैर्ध्य λ है।
पर्दे के केंद्र O से x दूरी पर स्थित बिंदु P पर पथांतर (Path difference) Δx = S₂P - S₁P होता है।
ज्यामिति (समकोण त्रिभुजों) के उपयोग से पथांतर Δx = (x·d) / D प्राप्त होता है।

दीप्त (Bright) फ्रिंज के लिए: पथांतर = nλ (जहाँ n = 0, 1, 2...)
अतः (x_n·d) / D = nλ ⇒ x_n = (nλD) / d (यह n वीं दीप्त फ्रिंज की केंद्र से दूरी है)।
फ्रिंज चौड़ाई (β): किन्हीं दो क्रमागत दीप्त या अदीप्त फ्रिंजों के बीच की दूरी को फ्रिंज चौड़ाई कहते हैं।
β = x_(n+1) - x_n = [((n+1)λD) / d] - [(nλD) / d]
β = λD / d
यह व्यंजक स्पष्ट करता है कि फ्रिंज चौड़ाई तरंगदैर्ध्य (λ) और पर्दे की दूरी (D) के समानुपाती, तथा स्लिटों के बीच की दूरी (d) के व्युत्क्रमानुपाती होती है।
अथवा: पोलेरॉइड (Polaroid) क्या है? इसकी कार्यविधि तथा कोई तीन उपयोग लिखिए।
मॉडल उत्तर:
पोलेरॉइड: यह एक ऐसी युक्ति (device) है जो अध्रुवित (Unpolarized) प्रकाश को समतल ध्रुवित (Plane polarized) प्रकाश में बदल देती है। यह कृत्रिम रूप से बनाई गई एक बड़ी फिल्म होती है जिसमें कार्बनिक यौगिक (हर्पेथाइट) के सूक्ष्म क्रिस्टल एक निश्चित दिशा में संरेखित होते हैं।
कार्यविधि: यह द्विवर्णता (Dichroism) के सिद्धांत पर कार्य करता है। जब अध्रुवित प्रकाश पोलेरॉइड पर पड़ता है, तो यह प्रकाश के उन कंपनों को अवशोषित कर लेता है जो इसके क्रिस्टलीय अक्ष के लंबवत होते हैं, और केवल उन कंपनों को पार होने देता है जो अक्ष के समांतर होते हैं। इस प्रकार निर्गत प्रकाश समतल ध्रुवित होता है।
उपयोग:
1. धूप के चश्मों (Sun glasses) में चकाचौंध (Glare) को कम करने के लिए।
2. 3D (त्रिविमीय) चलचित्र (फिल्में) देखने के लिए।
3. रात में वाहनों की हेडलाइट की चकाचौंध से बचने के लिए विंडस्क्रीन में।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह प्रश्नपत्र केवल विद्यार्थियों के अभ्यास और शैक्षणिक मार्गदर्शन हेतु तैयार किया गया एक संभावित मॉडल पेपर है। यह कोई असली या लीक हुआ पेपर नहीं है। कृपया परीक्षा के सटीक पाठ्यक्रम के लिए MP Board के निर्देशों का ही पालन करें।