दिव्यांग शासकीय सेवकों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों के पुनः सत्यापन एवं UDID कार्ड जारी करने के संबंध में महत्वपूर्ण आदेश जारी
📋 आदेश की मुख्य जानकारी
🔖 आदेश की पृष्ठभूमि (Background)
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली द्वारा दिव्यांगजन शासकीय सेवकों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों के पुनः सत्यापन एवं पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए थे। आयोग ने स्पष्ट किया कि दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों के व्यापक (Blanket) पुनः सत्यापन की प्रक्रिया से वास्तविक एवं पात्र दिव्यांग शासकीय सेवकों को अनावश्यक असुविधा, मानसिक कष्ट एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, जो उनके मानवाधिकार एवं गरिमा के प्रतिकूल है।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का पुनः सत्यापन केवल संदिग्ध अथवा विशिष्ट प्रकरणों में ही किया जाना उचित है। सभी दिव्यांग शासकीय सेवकों का सामान्य अथवा Blanket आधार पर पुनः परीक्षण/पुनर्मूल्यांकन किया जाना न्यायसंगत नहीं माना गया है।
✅ आदेश में दिए गए मुख्य निर्देश
संदिग्ध प्रकरणों में ही पुनः सत्यापन
विभागों में कार्यरत दिव्यांगजन शासकीय सेवकों के दिव्यांगता प्रमाण-पत्रों का पुनः सत्यापन केवल संदिग्ध अथवा आवश्यक प्रकरणों में ही किया जाए, सामान्य रूप से नहीं।
फर्जी प्रमाण-पत्रों पर विधिक कार्यवाही
फर्जी प्रमाण-पत्रों के प्रकरणों में कार्यवाही केवल विधिक प्रावधानों के अंतर्गत RPwD Act, 2016 की धाराओं के अनुसार पुनः परीक्षण किया जाए।
Blanket पुनर्मूल्यांकन पर पूर्ण रोक
किसी भी स्थिति में Blanket अथवा सामान्य रूप से सभी दिव्यांग शासकीय सेवकों के पुनः परीक्षण/पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही नहीं की जाए।
सम्मानजनक एवं गरिमापूर्ण व्यवहार
यह सुनिश्चित किया जाए कि दिव्यांग शासकीय सेवकों के साथ संवेदनशील, सम्मानजनक एवं गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाए तथा उन्हें किसी प्रकार की अनावश्यक असुविधा न हो।
UDID कार्ड जारी करने में तेजी
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को दिव्यांगजनों के UDID Card जनरेट करने की प्रक्रिया में गति प्रदान करने हेतु अधीनस्थ कार्यालयों को निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है।
📨 आदेश किसे-किसे भेजा गया (वितरण सूची)
यह आदेश मध्यप्रदेश शासन के शासन के समस्त विभागों, अध्यक्ष राजस्व मंडल ग्वालियर, समस्त संभागीय आयुक्त, समस्त विभागाध्यक्ष, समस्त जिला कलेक्टर तथा समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत) को भेजा गया है। इसके अतिरिक्त इसकी प्रतिलिपि महामहिम राज्यपाल के प्रमुख सचिव, माननीय मुख्यमंत्री जी के प्रमुख सचिव, मुख्य सचिव कार्यालय, सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, व्यावसायिक परीक्षा मण्डल, माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय, उच्च न्यायालय जबलपुर, लोकायुक्त, लोक सेवा आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग, महालेखाकार, दिव्यांगजन संचालनालय सहित कुल 24 कार्यालयों/अधिकारियों को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गई है।
🏛️ राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) की Core Group बैठक
इस आदेश के पीछे का आधार 27 जनवरी 2026 को मानव अधिकार भवन, नई दिल्ली में आयोजित NHRC की Core Group on Disabilities की बैठक रही, जिसकी अध्यक्षता माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यिन ने की। बैठक में सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी, श्रीमती विजया भारती सायनी सहित सचिव जनरल श्री भारत लाल, विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि, दिव्यांगजन अधिकार संगठनों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञ शामिल हुए।
🎯 बैठक में उठाए गए तीन महत्वपूर्ण बिंदु
- क्या शासन को उन दिव्यांग व्यक्तियों के प्रमाण-पत्रों का पुनः सत्यापन/पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए, जो पहले से ही लाभ प्राप्त कर चुके हैं?
- क्या ऐसे SOP भूतलक्षी (Retrospective) प्रभाव से लागू होंगे या भविष्यलक्षी (Prospective) प्रभाव से?
- क्या व्यापक (Mass) पुनः सत्यापन उचित है, या यह केवल संदिग्ध प्रमाण-पत्रों तक ही सीमित होना चाहिए?
बैठक में विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि कुछ राज्यों में Blanket अनिवार्य मेडिकल पुनः परीक्षण शुरू किए गए थे, जिससे दिव्यांग शासकीय सेवकों को उत्पीड़न, मानसिक तनाव एवं संस्थागत अपमान का सामना करना पड़ा, जो मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 तथा संविधान के अनुच्छेद 14, 15 एवं 21 के विरुद्ध माना गया। साथ ही जनगणना 2011 के अनुसार देश में दिव्यांगजनों की जनसंख्या लगभग 2.68 करोड़ है, जबकि स्वावलंबन पोर्टल पर 9 फरवरी 2026 तक केवल 1.3 करोड़ UDID कार्ड ही जारी हो सके थे।
⚖️ संबंधित विधिक प्रावधान
यह आदेश RPwD Act, 2016 (Rights of Persons with Disabilities Act) के प्रावधानों के अनुरूप जारी किया गया है। अधिनियम की धारा 91 में फर्जी दावों के लिए दंड का प्रावधान है, जिसमें कारावास एवं जुर्माना शामिल है। साथ ही मान्य रूप से जारी प्रमाण-पत्रों के लिए बार-बार पुनः परीक्षण कराना अधिकारियों की मनमानी कार्यवाही न होकर, केवल वैधानिक आधार पर ही संभव होगी।
📌 शासकीय सेवकों के लिए इसका क्या मतलब है?
- जिन दिव्यांग शासकीय सेवकों के पास वैध एवं प्रामाणिक दिव्यांगता प्रमाण-पत्र हैं, उन्हें अब सामान्य/Blanket पुनः परीक्षण के लिए बुलाया नहीं जाएगा।
- केवल विशेष संदेह के आधार पर ही किसी विशिष्ट प्रकरण में पुनः सत्यापन की कार्यवाही की जाएगी।
- UDID कार्ड जल्द जारी हो सकें, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग को गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
- सभी विभागों को दिव्यांग कर्मचारियों के साथ संवेदनशील एवं गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना होगा।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
नहीं, आदेश के अनुसार किसी भी स्थिति में Blanket अथवा सामान्य रूप से सभी दिव्यांग शासकीय सेवकों के पुनः परीक्षण/पुनर्मूल्यांकन की कार्यवाही नहीं की जाएगी। केवल संदिग्ध अथवा आवश्यक प्रकरणों में ही पुनः सत्यापन होगा।
यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल द्वारा 18 जून 2026 को क्रमांक F/1/1/1/0040/2026-GAD-RC-01(GAD) से जारी किया गया है, अवर सचिव सचिन्द्र राव के हस्ताक्षर सहित।
यह राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, नई दिल्ली के पत्र क्रमांक R-49/1/2021-PRPP दिनांक 20.02.2026 के अनुपालन में जारी किया गया है, जो दिव्यांगजन शासकीय सेवकों के मानवाधिकार उल्लंघन की रोकथाम से संबंधित है।
फर्जी प्रमाण-पत्रों के प्रकरणों में कार्यवाही केवल विधिक प्रावधानों के अंतर्गत RPwD Act, 2016 की धाराओं के अनुसार पुनः परीक्षण किया जाएगा।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को UDID Card जनरेट करने की प्रक्रिया में गति प्रदान करने हेतु अधीनस्थ कार्यालयों को निर्देशित करने का अनुरोध किया गया है।
शासन के समस्त विभाग, संभागीय आयुक्त, विभागाध्यक्ष, जिला कलेक्टर, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सहित 24 से अधिक प्राप्तकर्ताओं को।
📨 संदर्भ: राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग पत्र क्रमांक R-49/1/2021-PRPP, दिनांक 20.02.2026

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