प्री-बोर्ड परीक्षा 2025-26 | कक्षा 12वीं भौतिक शास्त्र | मॉडल उत्तर
Class 12 Physics Pre-Board Model Answer 2025-26
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इस पोस्ट में कक्षा 12वीं भौतिक शास्त्र (Physics) प्री-बोर्ड परीक्षा 2025-26 के लिए प्रश्न-वार (Question Wise) मॉडल उत्तर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह सामग्री विशेष रूप से बोर्ड परीक्षा से पहले तेज़ रिवीजन, उत्तर लेखन शैली और अंक प्राप्ति रणनीति को समझने में सहायक है।
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Class 12 Physics Pre-Board Model Answer कैसे उपयोग करें?
निर्देश:
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प्री-बोर्ड परीक्षा 2025-26 | कक्षा 12वीं भौतिक शास्त्र | मॉडल उत्तर
हल: I = E / (R + r) = 12 / (3 + 1) = 3A
हल: E = qV = 1e × 10V = 10eV
- 1. सरल सूक्ष्मदर्शी — (e) D/f (जब प्रतिबिम्ब अनंत पर हो)
- 2. संयुक्त सूक्ष्मदर्शी — (f) me × mo
- 3. दूरदर्शी — (b) fo / fe
- 4. व्यतिकरण दीप्त फ्रिंज — (a) 2λD / d (द्वितीय दीप्त की स्थिति)
- 5. व्यतिकरण अदीप्त फ्रिंज — (c) λD / 2d (प्रथम अदीप्त की स्थिति)
- 6. विवर्तन निम्निष्ठ — (d) 2λ / a (केंद्रीय उच्चिष्ठ की कोणीय चौड़ाई से संबंधित)
सूत्र: q = ne ⇒ n = q/e
हल: n = (3 × 10-6) / (1.6 × 10-19) = 1.875 × 1013
चूँकि पॉलीथिन ऋणावेशित है, अतः इलेक्ट्रॉन ऊन से पॉलीथिन पर स्थानांतरित हुए हैं।
हल:
श्रेणीक्रम: 1/Cs = 1/3 + 1/3 ⇒ Cs = 1.5 μF
समांतर क्रम: Ceq = 1.5 + 3 = 4.5 μF
∮ B · dl = μ0 I
द्वितीय नियम: प्रेरित वि.वा.बल का मान चुम्बकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर के समानुपाती होता है। e ∝ -dφ/dt
आवृत्ति सूत्र: ν = 1 / (2π√LC)
हल: ν0 = (2.14 × 1.6 × 10-19) / (6.63 × 10-34) ≈ 5.16 × 1014 Hz
हल: अधिकतम गतिज ऊर्जा = 1.5 eV (या 1.5 × 1.6 × 10-19 = 2.4 × 10-19 J)
2. यह स्पेक्ट्रमी रेखाओं की आपेक्षिक तीव्रता और सूक्ष्म संरचना की व्याख्या करने में असमर्थ है।
E = mc2 (जहाँ c प्रकाश का वेग है)।
[ग्राफ: निवेशी AC और निर्गत DC (केवल धनात्मक चक्र)]
[वक्र: प्रथम चतुर्थांश में I-V ग्राफ, नी-वोल्टेज के बाद धारा में तेजी से वृद्धि]
व्युत्पत्ति: V = IR और R = ρL/A
मान रखने पर: V = I(ρL/A) ⇒ (V/L) = (I/A)ρ
यहाँ V/L = E (विद्युत क्षेत्र) और I/A = J (धारा घनत्व)
E = Jρ ⇒ J = E/ρ
चूँकि 1/ρ = σ (चालकता), अतः J = σE
व्युत्पत्ति: यदि किसी चालक के सिरों पर विभवांतर V है और उसमें Q आवेश t समय में प्रवाहित होता है, तो किया गया कार्य W = V × Q होगा。
शक्ति P = W / t = (V × Q) / t
चूँकि Q / t = I (धारा),
अतः P = V I
सूत्र: Id = ε0 (dφE / dt)
वेग की निर्भरता: वेग माध्यम की विद्युतशीलता (ε) और चुम्बकनशीलता (μ) पर निर्भर करता है।
सम्बन्ध: v = 1 / √(με)
डी-ब्रोग्ली के अनुसार, कक्षा की परिधि तरंगदैर्ध्य का पूर्ण गुणज होनी चाहिए: 2πr = nλ
चूँकि λ = h/p = h/mv
अतः 2πr = n(h/mv) ⇒ mvr = nh/2π
यही बोहर का क्वांटीकरण प्रतिबंध है।
उदाहरण: यूरेनियम-235 का विखंडन होने पर लगभग 200 MeV ऊर्जा मुक्त होती है।
2. विद्युतरोधी (कुचालक): वर्जित ऊर्जा अंतराल बहुत अधिक (> 3eV) होता है। इलेक्ट्रॉन संयोजी बैंड से चालन बैंड में नहीं जा पाते।
3. अर्धचालक: वर्जित ऊर्जा अंतराल कम (< 3eV) होता है। ताप बढ़ाने पर इलेक्ट्रॉन पार कर सकते हैं।
2. अवक्षय पर्त: संधि के पास का वह क्षेत्र जहाँ कोई मुक्त आवेश वाहक नहीं होते, केवल स्थिर आयन होते हैं।
3. रोधिका विभव: अवक्षय पर्त के सिरों पर उत्पन्न विभवांतर जो वाहकों के और अधिक विसरण को रोकता है।
φE = ∮ E · dS = q / ε0
व्युत्पत्ति: मान लो q आवेश एक गोले के केंद्र पर है। गोले की त्रिज्या r है।
गोले के पृष्ठ पर विद्युत क्षेत्र E = (1/4πε0) (q/r2)
कुल फ्लक्स φ = E × क्षेत्रफल = E × 4πr2
φ = (1/4πε0) (q/r2) × 4πr2 = q / ε0 (इति सिद्धम्)
सूत्र स्थापना: माना +Q आवेश मूल बिंदु पर है। इससे r दूरी पर बिंदु P है।
अनंत से r दूरी तक लाने में किया गया कार्य W की गणना समाकलन द्वारा की जाती है:
W = - ∫ (∞ to r) F dx, जहाँ F = (1/4πε0) Qq0/x2
हल करने पर: W = (1/4πε0) Qq0/r
विभव V = W/q0
अतः V = (1/4πε0) Q/r
तार P के कारण Q पर चुम्बकीय क्षेत्र B1 = μ0I1 / 2πd
इस क्षेत्र में तार Q की L लंबाई पर लगने वाला बल: F = I2 L B1 sin90°
मान रखने पर: F = I2 L (μ0I1 / 2πd)
प्रति एकांक लंबाई पर बल: F/L = (μ0 I1 I2) / (2πd)
(समान दिशा में धारा होने पर आकर्षण, विपरीत में प्रतिकर्षण होता है।)
मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर बल: f = q(vd × B)
कुल बल F = N × f (जहाँ N कुल इलेक्ट्रॉन हैं)
हल करने पर प्राप्त व्यंजक: F = I L B sinθ
सदिश रूप में: vec(F) = I (vec(L) × vec(B))
2. चित्र: (यहाँ लोहे के क्रोड पर लिपटी दो कुंडलियों का चित्र बनाएं - प्राथमिक और द्वितीयक)।
3. ऊर्जा हानि व निवारण:
- ताम्र हानि: तारों के प्रतिरोध के कारण उष्मा क्षय। (निवारण: तांबे के मोटे तार का प्रयोग)।
- लौह हानि (भंवर धारा): क्रोड में भंवर धाराओं के कारण उष्मा। (निवारण: पटलित क्रोड का उपयोग)।
2. क्रियाविधि: जब आर्मेचर कुंडली को चुम्बकीय क्षेत्र में घुमाया जाता है, तो फ्लक्स में परिवर्तन होता है और धारा प्रेरित होती है। सर्पी वलयों (Slip rings) द्वारा इसे बाह्य परिपथ में भेजा जाता है।
3. तात्क्षणिक EMF सूत्र: यदि कुंडली कोणीय वेग ω से घूम रही है, तो φ = NBA cos(ωt)
वि.वा.बल e = -dφ/dt = NBAω sin(ωt)
अधिकतम मान e0 = NBAω
स्नेल के नियम (μ1 sin i = μ2 sin r) और छोटे द्वारक के सन्निकटन (sin i ≈ i) का उपयोग करके हम ज्यामितीय गणना करते हैं।
अंतिम सूत्र:
(μ2 / v) - (μ1 / u) = (μ2 - μ1) / R
जहाँ u = वस्तु दूरी, v = प्रतिबिम्ब दूरी, R = वक्रता त्रिज्या।
व्युत्पत्ति: माना एक समतल तरंगाग्र अपवर्तक सतह पर i कोण पर आपतित होता है।
माध्यम 1 में चाल v1 और माध्यम 2 में v2 है।
ज्यामिति से सिद्ध किया जाता है कि:
sin i / sin r = v1 / v2 = μ2 / μ1 (स्थिरांक)
यही स्नेल का अपवर्तन नियम है।
कक्षा 12 Physics में अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें?
⚠️ महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर (Disclaimer)
- यह Class 12 Physics Pre-Board Model Answer केवल शैक्षणिक अभ्यास और मार्गदर्शन के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
- यदि किसी उत्तर में कोई त्रुटि, विसंगति या संदेह प्रतीत हो, तो कृपया:
- अपने विषय शिक्षक से परामर्श करें
- NCERT भौतिक शास्त्र पाठ्यपुस्तक से मिलान करें
MP EDUCATION GYAN DEEP किसी भी उत्तर की पूर्ण शुद्धता का आधिकारिक दावा नहीं करता।
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