Class 10 Hindi Pre-Board Solution | MP EDUCATION GYAN DEEP
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कक्षा 10 हिंदी प्री-बोर्ड प्रश्न पत्र समाधान (2025–26)
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इस पोस्ट में Class 10 Hindi Pre-Board Solution को विद्यार्थियों की सुविधा के लिए प्रश्न-वार (Question Wise) उपलब्ध कराया गया है, ताकि छात्र परीक्षा से पहले तेज़ी से रिवीजन कर सकें और उत्तर लेखन शैली को समझ सकें।
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प्री-बोर्ड परीक्षा 2025-26 | कक्षा 10वीं हिन्दी | सम्पूर्ण हल
प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए (1x6=6)
(स) सूरदास
(अ) संवत् 1900
(ब) छंद
(स) पतनशील नवाबों पर
(स) आठ
(स) कटाओ को
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (1x6=6)
उज्ज्वल गाथा
उत्साह
अन्योक्ति अलंकार
प्रभु मिलन
द्विगु
धर्मचक्र
प्रश्न 3. सत्य/असत्य लिखिए (1x6=6)
सत्य
असत्य (यह अतिशयोक्ति में होता है)
सत्य
असत्य (शिक्षिका थीं)
असत्य
सत्य
प्रश्न 4. सही जोड़ी बनाइए (1x6=6)
-> (ग) झोंपड़ी में खिल रहे जलजात
-> (क) मानवीकरण अलंकार
-> (ख) पेट की ज्वाला शांत करने हेतु
-> (छ) वाक्य
-> (च) बहुत प्यारा
-> (घ) फिर मिलेंगे
प्रश्न 5. एक वाक्य में उत्तर (1x6=6)
मृतक (मुर्दे/पाषाण) में
33 (तैंतीस)
बालाजी मंदिर (काशी) में
अव्ययीभाव समास
माता के आँचल (माँ की गोद) में
चाँदनी रात में
विषयनिष्ठ प्रश्न (6 से 17) - 2 अंक
1. शोषितों के प्रति सहानुभूति।
2. शोषक वर्ग (पूंजीपतियों) के प्रति आक्रोश व क्रांति की भावना।
2. शोषक वर्ग (पूंजीपतियों) के प्रति आक्रोश व क्रांति की भावना।
रीतिकाल में रचित काव्यों में श्रृंगार रस की प्रधानता थी। कवियों ने नख-शिख और नायक-नायिका भेद का अत्यधिक वर्णन किया, इसलिए इसे 'श्रृंगार काल' कहा जाता है।
रचनाएँ: रामचरितमानस, विनयपत्रिका।
भाव पक्ष: राम के प्रति दास्य भाव की भक्ति, लोक-मंगल की कामना और समन्वयवाद।
भाव पक्ष: राम के प्रति दास्य भाव की भक्ति, लोक-मंगल की कामना और समन्वयवाद।
रचनाएँ: कामायनी, आँसू।
भाव पक्ष: छायावादी प्रवर्तक, प्रेम और सौंदर्य का चित्रण, करुणा और वेदना की प्रधानता।
भाव पक्ष: छायावादी प्रवर्तक, प्रेम और सौंदर्य का चित्रण, करुणा और वेदना की प्रधानता।
लक्ष्मण के अनुसार, वीर योद्धा धैर्यवान और विनम्र होते हैं। वे युद्ध में वीरता दिखाते हैं, स्वयं अपनी प्रशंसा नहीं करते। वे ब्राह्मण, गाय और दुर्बल पर हथियार नहीं उठाते।
फाल्गुन में प्रकृति का सौंदर्य चरम पर होता है। चारों तरफ हरियाली, फूल और सुगंधित हवा होती है। वातावरण में एक नशा (मादकता) छा जाता है जो अन्य ऋतुओं में नहीं होता।
बच्चे की मुस्कान निश्छल, भोली और स्वाभाविक होती है। जबकि बड़ों की मुस्कान में स्वार्थ, बनावटीपन या शिष्टाचार छिपा हो सकता है।
कवि नागार्जुन के अनुसार, फसल नदियों के पानी का जादू, लाखों हाथों के स्पर्श की गरिमा, और विभिन्न मिट्टियों, धूप और हवा का रूपांतरित रूप है।
परिभाषा: काव्य को पढ़ने/सुनने से जो आनंद मिलता है, उसे रस कहते हैं।
अंग: स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव।
अंग: स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव, संचारी भाव।
परिभाषा: 'रसात्मकं वाक्यं काव्यम्' अर्थात रस युक्त वाक्य ही काव्य है।
भेद: 1. श्रव्य काव्य, 2. दृश्य काव्य।
भेद: 1. श्रव्य काव्य, 2. दृश्य काव्य।
जहाँ किसी बात को लोक सीमा से बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहा जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।
उदाहरण: "हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जल गई गए निसाचर भाग।"
उदाहरण: "हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग, लंका सिगरी जल गई गए निसाचर भाग।"
यह सम मात्रिक छंद है। चार चरण होते हैं, प्रत्येक में 16-16 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण: "रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाई पर वचन न जाई।"
उदाहरण: "रघुकुल रीत सदा चली आई। प्राण जाई पर वचन न जाई।"
1. कहानी छोटी होती है, उपन्यास बड़ा होता है।
2. कहानी में जीवन का एक अंश होता है, उपन्यास में संपूर्ण जीवन।
2. कहानी में जीवन का एक अंश होता है, उपन्यास में संपूर्ण जीवन।
1. जीवनी दूसरे व्यक्ति द्वारा लिखी जाती है, आत्मकथा स्वयं लेखक लिखता है।
2. जीवनी सत्य घटनाओं पर आधारित (वस्तुनिष्ठ) होती है, आत्मकथा में भावनाएं (व्यक्तिनिष्ठ) होती हैं।
2. जीवनी सत्य घटनाओं पर आधारित (वस्तुनिष्ठ) होती है, आत्मकथा में भावनाएं (व्यक्तिनिष्ठ) होती हैं।
रचनाएँ: आपका बंटी, महाभोज।
शैली: सरल, सहज खड़ी बोली और संवाद प्रधान शैली।
शैली: सरल, सहज खड़ी बोली और संवाद प्रधान शैली।
रचनाएँ: माटी की मूरतें, गेहूँ और गुलाब।
शैली: ओजपूर्ण, आलंकारिक भाषा। इन्हें 'कलम का जादूगर' कहते हैं।
शैली: ओजपूर्ण, आलंकारिक भाषा। इन्हें 'कलम का जादूगर' कहते हैं।
डुमराँव उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ की जन्मभूमि है। शहनाई बजाने में प्रयुक्त होने वाली 'नरकट' (घास) वहाँ सोन नदी के किनारे मिलती है।
जो व्यक्ति अपनी बुद्धि-विवेक से नए तथ्य का दर्शन करता है या समाज कल्याण हेतु नया आविष्कार करता है, उसे 'संस्कृत व्यक्ति' कहते हैं।
मूर्ति संगमरमर की थी, पर नेताजी का चश्मा संगमरमर का नहीं था। उसकी जगह असली, काले फ्रेम का चश्मा लगा था, जो लेखक को खटकता था।
भगत जी वृद्ध थे। पुत्रवधु को चिंता थी कि उनके बुढ़ापे में भोजन कौन बनाएगा और बीमारी में पानी कौन देगा, इसलिए वह सेवा करना चाहती थी।
1. गागर में सागर भरना (थोड़े में बहुत कहना): बिहारी ने अपने दोहों में गागर में सागर भर दिया है。
2. जले पर नमक छिड़कना (दुखी को और दुखी करना): हार के बाद ताना मारना जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
2. जले पर नमक छिड़कना (दुखी को और दुखी करना): हार के बाद ताना मारना जले पर नमक छिड़कने जैसा है।
1. सब कुछ जानने वाला: सर्वज्ञ
2. जिसकी उपमा न हो: अनुपम
2. जिसकी उपमा न हो: अनुपम
बच्चे माता-पिता की गोद में बैठकर, उनके साथ खेलकर, उनसे जिद्द करके और विपत्ति में केवल उनकी शरण लेकर अपना प्रेम व्यक्त करते हैं।
गंतोक के लोग पहाड़ों की कठिन परिस्थितियों में भी कड़ी मेहनत करके शहर को सुंदर और व्यवस्थित रखते हैं। उनकी मेहनत और स्वाभिमान के कारण इसे यह नाम दिया गया है।
प्रश्न 18. काव्यांश का भावार्थ (3 अंक - 75 शब्द)
"ऊधौ, तुम हौं अति बड़भागी।
अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।
प्रीति-नदी मैं पाऊँ न बोरयौ, दृष्टिन रूप परागी।
'सूरदास' अबला' हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी ॥"
संदर्भ: प्रस्तुत पद हमारी पाठ्यपुस्तक 'क्षितिज भाग-2' के 'पद' पाठ से लिया गया है। इसके रचयिता 'सूरदास' हैं।अपरस रहत सनेह तगा तैं, नाहिन मन अनुरागी।
पुरइनि पात रहत जल भीतर, ता रस देह न दागी।
जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी।
प्रीति-नदी मैं पाऊँ न बोरयौ, दृष्टिन रूप परागी।
'सूरदास' अबला' हम भोरी, गुर चाँटी ज्यौं पागी ॥"
प्रसंग: इसमें गोपियाँ ऊधौ पर व्यंग्य कर रही हैं कि वे कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम से अछूते हैं।
भावार्थ: गोपियाँ कहती हैं - हे ऊधौ! तुम बड़े भाग्यशाली हो जो कृष्ण के पास रहकर भी उनके प्रेम बंधन में नहीं बंधे। तुम उस कमल के पत्ते के समान हो जो पानी में रहकर भी गीला नहीं होता, और उस तेल की मटकी के समान हो जिस पर पानी की बूँद नहीं ठहरती। तुमने प्रेम रूपी नदी में पैर ही नहीं डुबोया। लेकिन हम गोपियाँ भोली हैं जो कृष्ण प्रेम में गुड़ से लिपटी चींटियों की तरह जुड़ गई हैं।
"क्या हुआ यदि हो सके परिचित न पहली बार ?
यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनीं होती आज
मैं न सकता देख
मैं न पाता जान
तुम्हारी यह दन्तुरित मुस्कान"
संदर्भ: प्रस्तुत पद्यांश पाठ 'यह दंतुरित मुस्कान' से लिया गया है। कवि 'नागार्जुन' हैं।यदि तुम्हारी माँ न माध्यम बनीं होती आज
मैं न सकता देख
मैं न पाता जान
तुम्हारी यह दन्तुरित मुस्कान"
प्रसंग: कवि बच्चे की मुस्कान और उसकी माँ के योगदान का वर्णन कर रहे हैं।
भावार्थ: कवि बच्चे से कहते हैं कि कोई बात नहीं अगर हम पहली बार में परिचित नहीं हो सके। लेकिन, यदि आज तुम्हारी माँ हम दोनों के बीच माध्यम न बनी होती, तो मैं तुम्हारी यह सुंदर छवि और नए-नए निकले दाँतों वाली मोहक मुस्कान न देख पाता। कवि माँ के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं कि उन्हीं के कारण उन्हें यह सुख मिला है।
प्रश्न 19. गद्यांश की व्याख्या (3 अंक - 75 शब्द)
"वह गृहस्थ थे; लेकिन उनकी सब चीज 'साहब' की थीं। जो कुछ खेत में पैदा होता, सिर पर लादकर पहले उसे साहब के दरबार में ले जाते-जो उनके घर से चार कोस दूर पर था-एक कबीरपंथी मठ से मतलब ! वह दरबार में 'भेंट' रूप रख दिया जाकर 'प्रसाद' रूप में जो उन्हे मिलता, उसे घर वाले और उसी से गुजर चलाते।"
संदर्भ: पाठ 'बालगोबिन भगत', लेखक 'रामवृक्ष बेनीपुरी'।प्रसंग: भगत जी की कबीर के प्रति अगाध श्रद्धा और त्याग का वर्णन।
व्याख्या: बालगोबिन भगत गृहस्थ होते हुए भी साधु थे। वे अपनी हर वस्तु 'साहब' (कबीर) की मानते थे। वे अपनी मेहनत से पैदा हुई सारी फसल सिर पर लादकर 4 कोस दूर कबीर मठ ले जाते और भेंट कर देते। वहां से जो कुछ 'प्रसाद' के रूप में वापस मिलता, वे उसी में संतुष्ट रहते और साल भर अपना घर चलाते। यह उनके निस्वार्थ भाव और संतोषी स्वभाव को दर्शाता है।
"कल्पना कीजिए उस समय की जब मानव को सुई-धागे का परिचय न था, जिस मनुष्य के दिमाग में पहले-पहल बात आई होगी कि लोहे के एक टुकड़े को घिसकर उसके एक सिरे को छेद कर और छेद में धागा पिरोकर कपड़े के दो टुकड़े एक साथ जोड़े जा सकते हैं, वह भी कितना बड़ा आविष्कर्ता रहा होगा!"
संदर्भ: पाठ 'संस्कृति', लेखक 'भदंत आनंद कौसल्यायन'।प्रसंग: लेखक 'सभ्यता' और 'संस्कृति' में अंतर बताते हुए सुई-धागे के आविष्कार का उदाहरण देते हैं।
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि उस आदिम काल के बारे में सोचो जब कपड़े जोड़ने का ज्ञान नहीं था। जिस व्यक्ति ने पहली बार अपनी बुद्धि से लोहे को घिसकर, छेद करके सुई बनाई होगी और उसमें धागा पिरोकर कपड़े जोड़े होंगे, वह कितना महान आविष्कारक रहा होगा। उसका यह नया विचार ही 'संस्कृति' है, क्योंकि उसने मानवता को कुछ नया दिया।
प्रश्न 20. विज्ञापन / संवाद (3 अंक)
जल है तो कल है
पानी की हर बूँद है सोना, इसे कभी नहीं खोना।
- नल खुला न छोड़ें।
- गाड़ी धोने में पाइप का प्रयोग न करें।
- वर्षा जल संचयन (Harvesting) अपनाएं।
जनहित में जारी: जल संरक्षण विभाग, म.प्र. सरकार
बेटा: माँ, देखो बाजार कितना सुंदर सजा है!
माँ: हाँ बेटा, दीपावली आने वाली है न। यह रोशनी का त्यौहार है।
बेटा: माँ, हम दीये क्यों जलाते हैं?
माँ: बेटा, दीये अंधकार को मिटाकर प्रकाश लाते हैं। भगवान राम के लौटने की खुशी में भी जलाए जाते हैं।
बेटा: मैं इस बार पटाखे नहीं चलाऊँगा, प्रदूषण होता है।
माँ: शाबाश बेटा! यह बहुत अच्छी सोच है। हम मिठाई और दीयों से ही खुशियाँ मनाएंगे।
माँ: हाँ बेटा, दीपावली आने वाली है न। यह रोशनी का त्यौहार है।
बेटा: माँ, हम दीये क्यों जलाते हैं?
माँ: बेटा, दीये अंधकार को मिटाकर प्रकाश लाते हैं। भगवान राम के लौटने की खुशी में भी जलाए जाते हैं।
बेटा: मैं इस बार पटाखे नहीं चलाऊँगा, प्रदूषण होता है।
माँ: शाबाश बेटा! यह बहुत अच्छी सोच है। हम मिठाई और दीयों से ही खुशियाँ मनाएंगे।
प्रश्न 21. अपठित बोध (4 अंक)
"वीरों का कैसा हो वसंत ?
आ रही हिमालय से पुकार,
है उदधि गरजता बार-बार,
प्राची, पश्चिम, भू, नभ अपार,
सब पूछ रहे हैं दिग-दिगंत,
वीरों का कैसा हो वसंत ?"
प्र.1. उपर्युक्त काव्यांश का शीर्षक लिखिए।आ रही हिमालय से पुकार,
है उदधि गरजता बार-बार,
प्राची, पश्चिम, भू, नभ अपार,
सब पूछ रहे हैं दिग-दिगंत,
वीरों का कैसा हो वसंत ?"
उत्तर: वीरों का वसंत।
प्र.2. वीरों का वसंत कैसा होना चाहिए?
उत्तर: वीरों का वसंत उत्साह, त्याग, बलिदान और पराक्रम से भरा होना चाहिए।
प्र.3. उपर्युक्त काव्यांश का भावार्थ लिखिए।
उत्तर: कवयित्री पूछती हैं कि वीरों का वसंत कैसा होना चाहिए? यही प्रश्न हिमालय, गरजता हुआ समुद्र और धरती-आकाश (दसों दिशाएं) पूछ रहे हैं। भाव यह है कि वीरों के लिए वसंत केवल प्राकृतिक सौंदर्य नहीं, बल्कि देश के लिए बलिदान देने का अवसर है।
"आप हमेशा अच्छी जिन्दगी जीते जा रहे हैं। आप हमेशा बढ़िया कपडे बढ़िया जूते व मोबाइल जैसे दिखावों पर बहुत खर्च करते हैं। आप अपने शरीर पर कितना खर्च करते हैं? इसका मूल्यांकन जरूरी है। यह शरीर अनमोल है। अगर शरीर स्वस्थ नहीं होगा तो आप ये सारे सामान किस पर टांगेंगे? अतः स्वयं का स्वस्थ रहना सबसे जरूरी है एवं स्वस्थ रहने में हमारे खान-पान का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान है।"
प्र.1. उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक लिखिए।उत्तर: स्वास्थ्य का महत्त्व (या 'अनमोल शरीर')।
प्र.2. अनमोल क्या है?
उत्तर: हमारा 'शरीर' अनमोल है।
प्र.3. शुद्ध एवं असली शब्द के विलोम शब्द लिखिए।
उत्तर:
शुद्ध का विलोम - अशुद्ध
असली का विलोम - नकली
प्रश्न 22. पत्र लेखन (4 अंक - 120 शब्द)
सेवा में,
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
भोपाल (मध्य प्रदेश)।
विषय: स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (TC) प्राप्त करने हेतु आवेदन।
मान्यवर,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 10वीं 'अ' का नियमित छात्र हूँ। मेरे पिताजी, जो कि सरकारी सेवा में हैं, उनका स्थानांतरण भोपाल से इंदौर हो गया है। मेरा पूरा परिवार उनके साथ इंदौर जा रहा है, इसलिए मैं यहाँ अकेले रहकर अपना अध्ययन जारी रखने में असमर्थ हूँ।
अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (School Leaving Certificate) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं इंदौर के विद्यालय में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रख सकूँ। मैंने विद्यालय का समस्त शुल्क जमा कर दिया है।
दिनांक: 25/02/2026
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
अमित कुमार
कक्षा: 10वीं 'अ'
श्रीमान प्राचार्य महोदय,
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय,
भोपाल (मध्य प्रदेश)।
विषय: स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (TC) प्राप्त करने हेतु आवेदन।
मान्यवर,
सविनय निवेदन है कि मैं आपके विद्यालय में कक्षा 10वीं 'अ' का नियमित छात्र हूँ। मेरे पिताजी, जो कि सरकारी सेवा में हैं, उनका स्थानांतरण भोपाल से इंदौर हो गया है। मेरा पूरा परिवार उनके साथ इंदौर जा रहा है, इसलिए मैं यहाँ अकेले रहकर अपना अध्ययन जारी रखने में असमर्थ हूँ।
अतः श्रीमान जी से विनम्र प्रार्थना है कि मुझे मेरा स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (School Leaving Certificate) शीघ्र प्रदान करने की कृपा करें, ताकि मैं इंदौर के विद्यालय में प्रवेश लेकर अपनी पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रख सकूँ। मैंने विद्यालय का समस्त शुल्क जमा कर दिया है।
दिनांक: 25/02/2026
आपका आज्ञाकारी शिष्य,
अमित कुमार
कक्षा: 10वीं 'अ'
पूज्य पिताजी,
सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ छात्रावास में सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि घर पर आप, माताजी और सभी कुशल-मंगल होंगे।
यह पत्र मैं आपको अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी के विषय में जानकारी देने के लिए लिख रहा हूँ। मेरी वार्षिक परीक्षाएँ निकट हैं और मैंने अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। मैंने सभी विषयों का एक बार पुनराव्यास (revision) कर लिया है। विज्ञान और गणित में मैं विशेष ध्यान दे रहा हूँ और पुराने प्रश्न-पत्रों को हल कर रहा हूँ। मेरे प्री-बोर्ड में भी अच्छे अंक आए थे, जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके और माताजी के आशीर्वाद से मैं बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होऊँगा। माताजी को मेरा प्रणाम कहिएगा और छोटी बहन को स्नेह।
आपका आज्ञाकारी पुत्र,
रोहित
दिनांक: 25/02/2026
सादर चरण स्पर्श।
मैं यहाँ छात्रावास में सकुशल हूँ और आशा करता हूँ कि घर पर आप, माताजी और सभी कुशल-मंगल होंगे।
यह पत्र मैं आपको अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी के विषय में जानकारी देने के लिए लिख रहा हूँ। मेरी वार्षिक परीक्षाएँ निकट हैं और मैंने अपनी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। मैंने सभी विषयों का एक बार पुनराव्यास (revision) कर लिया है। विज्ञान और गणित में मैं विशेष ध्यान दे रहा हूँ और पुराने प्रश्न-पत्रों को हल कर रहा हूँ। मेरे प्री-बोर्ड में भी अच्छे अंक आए थे, जिससे मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके और माताजी के आशीर्वाद से मैं बोर्ड परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होऊँगा। माताजी को मेरा प्रणाम कहिएगा और छोटी बहन को स्नेह।
आपका आज्ञाकारी पुत्र,
रोहित
दिनांक: 25/02/2026
प्रश्न 23. निबंध लेखन (4 अंक - 120 शब्द)
पर्यावरण एवं प्रदूषण
1. प्रस्तावना: हमारे चारों ओर का वातावरण 'पर्यावरण' कहलाता है। आज पर्यावरण प्रदूषण मानव जाति के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।2. प्रदूषण के प्रकार: प्रदूषण मुख्य रूप से चार प्रकार का होता है - वायु प्रदूषण (धुआं), जल प्रदूषण (गंदा पानी), ध्वनि प्रदूषण (शोर) और मृदा प्रदूषण (कचरा)।
3. कारण: वनों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ते उद्योग, वाहनों का धुआं और प्लास्टिक का उपयोग प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
4. दुष्परिणाम: प्रदूषण से सांस की बीमारियाँ, ग्लोबल वार्मिंग और मौसम में बदलाव जैसी समस्याएं हो रही हैं।
5. उपसंहार: हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए और प्लास्टिक का उपयोग बंद करना चाहिए। 'स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन' ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।
जीवन में खेलों का महत्त्व
1. प्रस्तावना: कहावत है - 'स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है।' खेल हमारे जीवन का अभिन्न अंग हैं।2. शारीरिक व मानसिक विकास: खेलों से शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है। इससे रक्त संचार बढ़ता है और पाचन तंत्र ठीक रहता है। खेल तनाव को दूर कर मन को प्रसन्न रखते हैं।
3. अनुशासन और सहयोग: खेल हमें नियमों का पालन करना, अनुशासन में रहना और टीम वर्क (सहयोग) सिखाते हैं। इससे नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं।
4. उपसंहार: पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी जरूरी हैं। आज खेल को करियर के रूप में भी अपनाया जा रहा है। अतः हमें प्रतिदिन खेलना चाहिए।
विद्यार्थी जीवन और अनुशासन
1. प्रस्तावना: अनुशासन का अर्थ है - 'नियमों का पालन करना'। विद्यार्थी जीवन मनुष्य के जीवन की नींव है, इसलिए इसमें अनुशासन का होना अत्यंत आवश्यक है।2. अनुशासन का महत्त्व: अनुशासित विद्यार्थी समय का पाबंद होता है। वह बड़ों का आदर करता है और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देता है। बिना अनुशासन के कोई भी छात्र सफलता के शिखर पर नहीं पहुँच सकता।
3. सफलता की कुंजी: प्रकृति भी अनुशासन में काम करती है (सूर्य, चाँद का निकलना)। जो विद्यार्थी आलस्य त्यागकर अनुशासन में रहता है, उसका भविष्य उज्ज्वल होता है।
4. उपसंहार: अनुशासन देश और समाज की उन्नति के लिए जरूरी है। विद्यार्थियों को इसे अपने जीवन में उतारना चाहिए।
जल ही जीवन है
1. प्रस्तावना: जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे सभी को जीवित रहने के लिए जल की आवश्यकता होती है।2. जल की उपयोगिता: जल पीने, भोजन पकाने, सफाई, सिंचाई और बिजली बनाने के काम आता है। पृथ्वी का 70% भाग जल है, पर पीने योग्य पानी बहुत कम है।
3. जल संकट: बढ़ती जनसंख्या और प्रदूषण के कारण पीने का पानी कम होता जा रहा है। नदियाँ सूख रही हैं।
4. उपसंहार: हमें पानी की एक-एक बूँद बचानी चाहिए। वर्षा जल संचयन करना चाहिए और जल को प्रदूषित होने से रोकना चाहिए, क्योंकि 'जल है तो कल है'।
विज्ञान की देन (चमत्कार)
1. प्रस्तावना: आज का युग विज्ञान का युग है। सुई से लेकर हवाई जहाज तक सब विज्ञान की देन है। इसने हमारे जीवन को बहुत सरल बना दिया है।2. वरदान: विज्ञान ने हमें बिजली, मोबाइल, इंटरनेट, कंप्यूटर और तेज यातायात के साधन दिए हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान ने असाध्य रोगों का इलाज ढूंढकर जीवन बचाया है।
3. अभिशाप: विज्ञान के दुरूपयोग से परमाणु बम जैसे विनाशकारी हथियार भी बने हैं। प्रदूषण भी बढ़ा है।
4. उपसंहार: विज्ञान एक अच्छा सेवक है पर बुरा मालिक। यदि हम इसका सदुपयोग करें तो यह मानव जाति के लिए वरदान है।
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