प्री-बोर्ड परीक्षा 2025–26 | कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र | मॉडल उत्तर MP EDUCATION GYAN DEEP
Class 12 Economics Pre-Board Model Answer 2025–26 (MP Board) MP EDUCATION GYAN DEEP
MP EDUCATION GYAN DEEP पर आपका स्वागत है।
इस पोस्ट में कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र (Economics) प्री-बोर्ड परीक्षा 2025–26 के लिए प्रश्न-वार (Question Wise) मॉडल उत्तर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। यह सामग्री बोर्ड परीक्षा से पहले तेज़ रिवीजन, उत्तर लेखन शैली, और अधिक अंक प्राप्त करने में सहायक है।
इस पोस्ट की मुख्य विशेषताएँ
✔️ प्रश्न-वार मॉडल उत्तर (Pre-Board Pattern)
✔️ Micro Economics & Macro Economics कवरेज
✔️ परिभाषाएँ, बिंदुवार उत्तर, तालिका/डायग्राम का सही उपयोग
✔️ बोर्ड-उपयोगी भाषा और प्रस्तुति
✔️ MP EDUCATION GYAN DEEP की विश्वसनीय सामग्री
Class 12 Economics Pre-Board Model Answer कैसे उपयोग करें?
निर्देश:
👉 जिस प्रश्न का मॉडल उत्तर देखना चाहते हैं, उस प्रश्न पर क्लिक करें।
👉 उत्तर को परिभाषा → बिंदु → उदाहरण/तालिका/डायग्राम क्रम में समझें।
👉 अंत में की-वर्ड्स और हेडिंग्स पर ध्यान दें।
डिस्क्लेमर: यह Class 10 Hindi Pre-Board Solution केवल शैक्षणिक अभ्यास हेतु तैयार किया गया है।
यदि किसी उत्तर में कोई त्रुटि या विसंगति प्रतीत हो, तो कृपया अपने
विषय शिक्षक अथवा NCERT हिंदी पाठ्यपुस्तक से अवश्य मिलान करें।
MP EDUCATION GYAN DEEP किसी उत्तर की पूर्ण शुद्धता का आधिकारिक दावा नहीं करता.
Class 12 Economics Pre-Board Solution | MP EDUCATION GYAN DEEP
MP EDUCATION GYAN DEEP
प्री-बोर्ड परीक्षा 2025-26 | कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र | मॉडल उत्तर
प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए (1x6=6)
(अ) सीमांत उपयोगिता
(अ) 20 इकाई (100 / 5 = 20)
(स) मांग तथा पूर्ति दोनों के द्वारा
(अ) ₹7,40,000 करोड़ (NDP = GDP - मूल्यह्रास)
(स) सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (MPC)
(अ) रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI)
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (1x6=6)
सार्वजनिक (Public)
संख्याओं (Numbers)
शून्य (Zero)
मूल्यह्रास (Depreciation)
2 (K = 1 / (1-0.5) = 2)
व्यय (Expenditure)
प्रश्न 3. सत्य/असत्य बताइए (1x6=6)
सत्य
सत्य (क्योंकि स्थिर लागत में परिवर्तन नहीं होता)
सत्य
असत्य (MPS = 1 - 0.80 = 0.20 होगी)
असत्य (1 अप्रैल से 31 मार्च है)
असत्य (केवल दृश्य मदें होती हैं)
प्रश्न 4. सही जोड़ी बनाइए (1x7=7)
1. पूरक वस्तुएं — (d) कार तथा पेट्रोल
2. स्थानापन्न वस्तुएं — (c) चाय तथा कॉफी
3. दीर्घकालीन उत्पादन फलन — (a) पैमाने के प्रतिफल
4. पूर्ण प्रतियोगिता — (b) क्रेता-विक्रेता की अधिक संख्या
5. आधुनिक अर्थशास्त्र के जनक — (g) एडम स्मिथ
6. जे.एम. कीन्स का जन्म — (e) 1883
7. केंद्रीय बैंक का स्थापना वर्ष — (f) 1935
प्रश्न 5. एक वाक्य में उत्तर (1x7=7)
उपभोक्ता की आय और बाजार कीमतों पर उपलब्ध उन सभी बंडलों का संग्रह जो वह खरीद सकता है।
पूर्ण प्रतियोगिता बाजार (Perfect Competition) में।
जहाँ श्रम की सीमांत उत्पादकता का मूल्य (VMP) मजदूरी दर के बराबर हो जाता है।
राष्ट्रीय आय की गणना में जब एक ही वस्तु का मूल्य एक से अधिक बार जुड़ जाता है।
200 करोड़ रुपए। (गुणक K=2, अतः ΔY = 2 × 100)
चालू खाता (Current Account) और पूँजीगत खाता (Capital Account)।
नकद आरक्षित अनुपात - वह न्यूनतम नकद राशि जो बैंकों को RBI के पास रखनी पड़ती है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक) - शब्द सीमा: 30 शब्द
वे वस्तुएं जिनकी मांग उपभोक्ता की आय बढ़ने पर बढ़ती है और आय घटने पर घटती है। इनका 'आय प्रभाव' धनात्मक होता है। (जैसे: गेहूँ, कपड़े)
ये विशेष प्रकार की घटिया वस्तुएं होती हैं जिन पर मांग का नियम लागू नहीं होता। इनकी कीमत बढ़ने पर मांग बढ़ती है और कीमत घटने पर मांग घटती है।
अल्पकाल में, जब स्थिर साधनों के साथ परिवर्तनशील साधन (जैसे श्रम) की इकाइयाँ बढ़ाई जाती हैं, तो एक सीमा के बाद उस साधन का सीमांत उत्पाद घटने लगता है।
दीर्घकाल में, जब उत्पादन के सभी साधनों को एक ही अनुपात में बढ़ाया जाता है, तो उत्पादन में होने वाले अनुपातिक परिवर्तन को पैमाने का प्रतिफल कहते हैं।
एक फर्म द्वारा अपने उत्पादन की एक निश्चित मात्रा को बेचने से प्राप्त कुल धनराशि को कुल सम्प्राप्ति कहते हैं। सूत्र:TR = कीमत (P) × मात्रा (Q)
वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई बेचने से कुल सम्प्राप्ति में जो परिवर्तन होता है, उसे सीमांत सम्प्राप्ति कहते हैं। सूत्र:MR = ΔTR / ΔQ
बाजार में जब दी गई कीमत पर वस्तु की पूर्ति (Supply) उसकी मांग (Demand) से अधिक हो जाती है, तो इसे अधिपूर्ति कहते हैं। इससे कीमतें गिरने लगती हैं।
बाजार में जब दी गई कीमत पर वस्तु की मांग उसकी पूर्ति से अधिक हो जाती है, तो इसे अधिमांग कहते हैं। इस स्थिति में कीमतें बढ़ने लगती हैं।
सरकार द्वारा आवश्यक वस्तुओं (दवाइयां, अनाज) की अधिकतम कीमत तय करना, जिससे ज्यादा पर बेचना गैरकानूनी हो। यह संतुलन कीमत से कम होती है।
सरकार द्वारा किसानों/मजदूरों के हित में किसी वस्तु या सेवा की न्यूनतम कीमत तय करना (जैसे MSP)। बाजार में इससे कम कीमत पर खरीदी नहीं की जा सकती।
वे वस्तुएं जो अन्य वस्तुओं के उत्पादन में कच्चे माल के रूप में प्रयोग की जाती हैं या पुनः बिक्री के लिए खरीदी जाती हैं। उदाहरण: हलवाई द्वारा खरीदा गया दूध।
वे वस्तुएं जो उत्पादन की सीमा रेखा पार कर चुकी हैं और अंतिम उपयोगकर्ताओं द्वारा उपभोग या निवेश के लिए तैयार हैं। उदाहरण: घर में प्रयोग होने वाला दूध।
किसी आय स्तर पर कुल उपभोग (C) और कुल आय (Y) के अनुपात को औसत उपभोग प्रवृत्ति कहते हैं। सूत्र:APC = C / Y
किसी आय स्तर पर कुल बचत (S) और कुल आय (Y) के अनुपात को औसत बचत प्रवृत्ति कहते हैं। सूत्र:APS = S / Y
एक वर्ष के दौरान निवेशक अपनी पूंजीगत परिसंपत्तियों में जो निवेश करने की 'योजना' बनाते हैं, उसे प्रत्याशित या इच्छित निवेश कहते हैं।
एक वर्ष के अंत में अर्थव्यवस्था में वास्तव में जो निवेश (नियोजित + अनियोजित स्टॉक परिवर्तन) होता है, उसे यथार्थ निवेश कहते हैं।
चूँकि सरकार का कुल व्यय (8 लाख करोड़) उसकी कुल आय (6 लाख करोड़) से अधिक है, अतः यह घाटे का बजट (Deficit Budget) है।
चूँकि सरकार की कुल आय (9 लाख करोड़) उसके कुल व्यय (6 लाख करोड़) से अधिक है, अतः यह आधिक्य का बजट (Surplus Budget) है।
1. राजस्व व्यय से सरकार की परिसंपत्तियों का निर्माण नहीं होता, जबकि पूंजीगत व्यय से होता है (जैसे सड़क, बांध)।
2. राजस्व व्यय से सरकार के दायित्व कम नहीं होते, जबकि पूंजीगत व्यय से होते हैं (जैसे ऋण वापसी)।
1. राजस्व घाटा केवल राजस्व प्राप्तियों की कमी दर्शाता है, राजकोषीय घाटा कुल ऋण आवश्यकताओं को दर्शाता है।
2. राजकोषीय घाटा = कुल व्यय - (राजस्व प्राप्तियां + गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां)।
लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक) - शब्द सीमा: 75 शब्द
यह अर्थव्यवस्था की 'चयन की समस्या' है। संसाधन सीमित होते हैं, इसलिए समाज को यह निर्णय लेना पड़ता है कि वह किन वस्तुओं का उत्पादन करे। क्या उपभोक्ता वस्तुएं (जैसे- अनाज, कपड़े) बनाई जाएं या पूंजीगत वस्तुएं (जैसे- मशीनें, औजार)? साथ ही, यह भी तय करना होता है कि चयनित वस्तुओं का कितनी मात्रा में उत्पादन किया जाए ताकि समाज की अधिकतम आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके।
यह 'तकनीक के चयन' की समस्या है। उत्पादन के लिए कौन सी विधि अपनाई जाए?
1. श्रम-प्रधान तकनीक: इसमें मशीनों की तुलना में श्रम (मजदूरों) का अधिक प्रयोग होता है। यह रोजगार बढ़ाती है।
2. पूंजी-प्रधान तकनीक: इसमें श्रम की तुलना में मशीनों का अधिक प्रयोग होता है। यह दक्षता बढ़ाती है।
अर्थव्यवस्था को साधनों की उपलब्धता और लागत के आधार पर उपयुक्त तकनीक चुननी पड़ती है।
मांग का नियम (Law of Demand):
अन्य बातें समान रहने पर, जब किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है, तो उसकी मांग घटती है और जब कीमत घटती है, तो मांग बढ़ती है। कीमत और मांग में विपरीत (Inverse) संबंध होता है।
चित्र: मांग वक्र (Demand Curve)
व्याख्या:
चित्र में DD एक मांग वक्र है जो बाएं से दाएं नीचे की ओर गिरता हुआ है।
1. जब कीमत P1 (ऊँची) होती है, तो मांग मात्रा Q1 (कम) होती है।
2. जब कीमत घटकर P2 (कम) हो जाती है, तो मांग मात्रा बढ़कर Q2 (अधिक) हो जाती है।
यह ढाल कीमत और मांग के बीच ऋणात्मक संबंध को दर्शाता है।
ह्रासमान सीमांत उपयोगिता नियम (Law of Diminishing Marginal Utility):
यह नियम बताता है कि जैसे-जैसे एक उपभोक्ता किसी वस्तु की मानक इकाइयों का लगातार उपभोग करता जाता है, वैसे-वैसे प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से प्राप्त होने वाली सीमांत उपयोगिता (MU) घटती जाती है।
चित्र: कुल उपयोगिता (TU) और सीमांत उपयोगिता (MU) में संबंध
चित्र की व्याख्या:
1. TU वक्र (नीला): प्रारंभ में बढ़ती दर से बढ़ता है, फिर घटती दर से बढ़ता है और अपनी अधिकतम ऊंचाई पर पहुँचता है।
2. MU वक्र (लाल): लगातार नीचे की ओर गिरता है, जो दर्शाता है कि हर अगली इकाई से कम संतुष्टि मिल रही है।
3. संबंध का मुख्य बिंदु: जब कुल उपयोगिता (TU) अपने अधिकतम बिंदु पर होती है (इकाई 5 पर), तब सीमांत उपयोगिता (MU) शून्य होती है। इसे 'पूर्ण तृप्ति का बिंदु' कहते हैं।
4. ऋणात्मक क्षेत्र: इसके बाद भी यदि उपभोग जारी रहता है, तो TU घटने लगती है और MU ऋणात्मक हो जाती है।
1. साधन आय की पहचान: सर्वप्रथम उत्पादन के साधनों (श्रम, भूमि, पूंजी, उद्यम) को मिलने वाली आय (मजदूरी, लगान, ब्याज, लाभ) की पहचान की जाती है।
2. घरेलू आय (NDPfc): एक लेखा वर्ष में देश की घरेलू सीमा में सृजित सभी साधन आयों को जोड़ा जाता है (NDPfc = मुआवजा + प्रचालन अधिशेष + मिश्रित आय)।
3. राष्ट्रीय आय (NNPfc): घरेलू आय में 'विदेशों से प्राप्त शुद्ध साधन आय' (NFIA) को जोड़कर राष्ट्रीय आय ज्ञात की जाती है।
1. व्यय का वर्गीकरण: अर्थव्यवस्था में अंतिम व्यय को चार भागों में बांटा जाता है: निजी अंतिम उपभोग व्यय (C), सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (G), निवेश व्यय (I), और शुद्ध निर्यात (X-M)।
2. GDP का आकलन: इन चारों घटकों को जोड़ने पर बाजार कीमत पर सकल घरेलू उत्पाद (GDPmp) प्राप्त होता है।
3. राष्ट्रीय आय: GDPmp में से मूल्यह्रास और शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटाकर तथा NFIA जोड़कर राष्ट्रीय आय (NNPfc) निकाली जाती है।
जब वाणिज्यिक बैंकों को अपनी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कहीं से भी ऋण नहीं मिलता और वे संकट में होते हैं, तो वे अंततः देश के केंद्रीय बैंक (RBI) की शरण में जाते हैं। RBI उन्हें उचित प्रतिभूतियों के बदले ऋण प्रदान कर उनकी मदद करता है और बैंकिंग प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखता है। इस संकटमोचक भूमिका के कारण ही RBI को 'अंतिम ऋण दाता' (Lender of Last Resort) कहा जाता है।
अर्थ: जब वस्तुओं और सेवाओं का लेनदेन मुद्रा के प्रयोग के बिना सीधे वस्तुओं के बदले किया जाता है (जैसे गेहूं के बदले जूते), तो उसे वस्तु विनिमय प्रणाली कहते हैं। कमियाँ:
1. आवश्यकताओं के दोहरे संयोग का अभाव (दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु की जरूरत हो)।
2. मूल्य के सर्वमान्य मापक का अभाव।
3. वस्तुओं के संचय और भविष्य में भुगतान करने में कठिनाई।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक) - शब्द सीमा: 120 शब्द
1. पूर्णतया लोचदार मांग
कीमत में नगण्य परिवर्तन पर मांग में अनंत परिवर्तन। (क्षैतिज वक्र)
2. पूर्णतया बेलोचदार मांग
कीमत में परिवर्तन का मांग पर कोई प्रभाव नहीं। (लंबवत वक्र)
अनधिमान वक्र (Indifference Curve):
वह वक्र जो दो वस्तुओं के उन विभिन्न संयोगों को दर्शाता है जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है।
चित्र: अनधिमान वक्र (IC) मूल बिंदु की ओर उन्नतोदर
चित्र की व्याख्या (विशेषताएँ):
1. ऋणात्मक ढाल: IC वक्र बाएं से दाएं नीचे की ओर गिरता है। इसका अर्थ है कि यदि वस्तु X की मात्रा बढ़ाई जाती है, तो समान संतुष्टि के लिए वस्तु Y की मात्रा कम करनी पड़ेगी (बिंदु A से B)।
2. मूल बिंदु के प्रति उन्नतोदर (Convex to Origin): वक्र मूल बिंदु 'O' की ओर उभरा हुआ (उत्तल) होता है। यह घटती हुई सीमांत प्रतिस्थापन दर (Diminishing MRS) के कारण होता है।
सूत्र:MPn = TPn - TPn-1
इकाई
कुल उत्पादन (TP)
सीमांत उत्पादन (MP)
1
35
35 (35-0)
2
50
15 (50-35)
3
69
19 (69-50)
4
92
23 (92-69)
सूत्र:TP = ΣMP (सीमांत का योग)
इकाई
कुल उत्पादन (TP)
सीमांत उत्पादन (MP)
1
10
10
2
18 (10+8)
08
3
24 (18+6)
06
4
28 (24+4)
04
5
30 (28+2)
02
1. निवेश में वृद्धि: प्रक्रिया की शुरुआत स्वायत्त निवेश में वृद्धि से होती है। मान लीजिए 100 करोड़ का निवेश किया गया।
2. आय का सृजन: यह निवेश व्यय, उत्पादन के साधनों की आय बन जाता है। अत: पहले चरण में आय 100 करोड़ बढ़ती है।
3. उपभोग व्यय: आय प्राप्त करने वाले लोग अपनी MPC (जैसे 0.5) के अनुसार खर्च करते हैं। वे 50 करोड़ खर्च करेंगे। यह खर्च दूसरों की आय बन जाएगा।
4. गुणक प्रभाव: आय-खर्च का यह चक्र चलता रहता है। अंत में कुल आय में वृद्धि प्रारंभिक निवेश से कई गुना (K गुना) अधिक होती है। यदि MPC 0.5 है, तो आय 200 करोड़ बढ़ेगी।
गुणक (K) और MPC में प्रत्यक्ष और धनात्मक संबंध होता है।
1. कारण: MPC जितनी अधिक होगी, लोग अपनी बढ़ी हुई आय का उतना ही बड़ा हिस्सा खर्च करेंगे। इससे अर्थव्यवस्था में आय सृजन का चक्र लंबा चलेगा और गुणक का मान अधिक होगा।
2. सूत्र:K = 1 / (1 - MPC)
3. उदाहरण: यदि MPC = 0.5, तो K = 2 होगा। यदि MPC बढ़कर 0.8 हो जाए, तो K = 5 हो जाएगा।
4. निष्कर्ष: MPC बढ़ने पर गुणक बढ़ता है, और MPC घटने पर गुणक कम होता है।
बंद अर्थव्यवस्था:
1. इसका शेष विश्व से कोई आर्थिक संबंध नहीं होता।
2. इसमें आयात और निर्यात शून्य होते हैं।
3. घरेलू उत्पाद और राष्ट्रीय आय एक समान होते हैं। खुली अर्थव्यवस्था:
1. इसका शेष विश्व के साथ आर्थिक संबंध (व्यापार) होता है।
2. इसमें वस्तुओं, सेवाओं और पूंजी का स्वतंत्र प्रवाह (आयात-निर्यात) होता है।
3. इसमें सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP), सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से भिन्न हो सकता है। आज के युग में लगभग सभी अर्थव्यवस्थाएं खुली हैं।
स्थिर विनिमय दर:
1. निर्धारण: सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा आधिकारिक रूप से तय की जाती है।
2. स्थिरता: इसमें विनिमय दर स्थिर रहती है, बार-बार नहीं बदलती।
3. उद्देश्य: अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता को कम करना। लचीली (तैरती) विनिमय दर:
1. निर्धारण: विदेशी मुद्रा बाजार में मांग और पूर्ति की शक्तियों द्वारा तय होती है।
2. परिवर्तन: इसमें प्रतिदिन और प्रतिक्षण उतार-चढ़ाव होते रहते हैं।
3. हस्तक्षेप: इसमें सरकार का सीधा हस्तक्षेप नहीं होता।
🔹 कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र में अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें?
🔹 परिभाषा सीधे NCERT भाषा में लिखें
🔹 उत्तर बिंदुवार (Points) और हेडिंग्स के साथ दें
🔹 जहाँ आवश्यक हो तालिका/डायग्राम अवश्य बनाएँ
🔹 संख्यात्मक प्रश्नों में Steps + Final Result स्पष्ट रखें
🔹 उत्तर अनावश्यक रूप से लंबा न करें
⚠️ महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर (Disclaimer)
यह Class 12 Economics Pre-Board Model Answer केवल शैक्षणिक अभ्यास एवं मार्गदर्शन हेतु तैयार किया गया है।
यदि किसी उत्तर में कोई त्रुटि या संदेह प्रतीत हो, तो कृपया अपने विषय शिक्षक अथवा NCERT अर्थशास्त्र पाठ्यपुस्तक से अवश्य मिलान करें।
MP EDUCATION GYAN DEEP किसी उत्तर की पूर्ण शुद्धता का आधिकारिक दावा नहीं करता।
Class 12 Economics Pre Board Model Answer
MP Board Class 12 Economics Pre Board Solution
कक्षा 12 अर्थशास्त्र प्री बोर्ड मॉडल उत्तर
Economics Pre Board Answer 2025–26
MP EDUCATION GYAN DEEP Economics
यदि आप MP Board कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र की तैयारी कर रहे हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए एक Complete Revision Resource है।
इस पेज को बुकमार्क करें और परीक्षा से पहले नियमित रिवीजन करें।
📘 Best Wishes for Pre-Board & Board Exam! — MP EDUCATION GYAN DEEP
📢 MP Education Gyan Deep से जुड़ें
शिक्षा एवं भर्ती से जुड़ी हर अपडेट सबसे पहले
0 Comments