आदर्श त्रैमासिक परीक्षा प्रश्न पत्र कक्षा – 12वीं | विषय – अर्थशास्त्र सेट–2
कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र भाग–2 के विद्यार्थियों के लिए त्रैमासिक परीक्षा 2026-27 की तैयारी हेतु यह आदर्श प्रश्न पत्र तैयार किया गया है। इसमें परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण एवं अभ्यास योग्य प्रश्न शामिल हैं। यह MP Board Class 12th Economics Part–2 Quarterly Exam 2026-27 की तैयारी, अभ्यास एवं स्व-मूल्यांकन में उपयोगी रहेगा।- Download Class 12th Economics Part–2 Quarterly Exam Question Paper – Set 1
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MP Board Class 12th Economics Part 2 Quarterly Exam Paper 2026-27, कक्षा 12वीं अर्थशास्त्र भाग 1 त्रैमासिक परीक्षा प्रश्न पत्र, Class 12 Economics Part 1 Model Paper, 12th Economics Quarterly Exam 2026-27, MP Board Class 12 Economics Question Paper, कक्षा 12 अर्थशास्त्र महत्वपूर्ण प्रश्न।
त्रैमासिक परीक्षा — मॉडल पेपर
कक्षा - 12वीं | विषय - अर्थशास्त्र
प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए। (1×6=6)
प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए। (1×6=6)
उत्तर: संतुष्टि प्रदान करने
उत्तर: विपरीत
उत्तर: उत्पादन कारक
उत्तर: समान
उत्तर: संतुलन
उत्तर: साधन आय
प्रश्न 3. सत्य / असत्य लिखिए। (1×6=6)
उत्तर: सत्य
उत्तर: असत्य
उत्तर: असत्य
उत्तर: सत्य
उत्तर: सत्य
उत्तर: असत्य
प्रश्न 4. सही जोड़ी मिलाइए। (1×7=7)
| कॉलम 'अ' | कॉलम 'ब' |
|---|---|
| 1. सीमांत उपयोगिता | (ख) अतिरिक्त इकाई की उपयोगिता |
| 2. स्थिर लागत | (ग) उत्पादन से स्वतंत्र लागत |
| 3. पूर्ण प्रतियोगिता | (क) कीमत स्वीकारक |
| 4. संतुलन कीमत | (घ) माँग = पूर्ति |
| 5. राष्ट्रीय आय | (ङ) एक वर्ष की साधन आय का योग |
| 6. माँग का नियम | (च) कीमत बढ़ने पर माँग घटना |
| 7. कुल लागत | (छ) स्थिर लागत + परिवर्तनशील लागत |
प्रश्न 5. एक वाक्य में उत्तर लिखिए। (1×7=7)
उत्तर: वस्तु की आवश्यकता या इच्छा को संतुष्ट करने की क्षमता उपयोगिता कहलाती है।
उत्तर: निश्चित कीमत पर निश्चित समय में खरीदने की इच्छा एवं क्षमता माँग कहलाती है।
उत्तर: उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन होने पर भी जो लागत अपरिवर्तित रहती है, स्थिर लागत कहलाती है।
उत्तर: अनेक क्रेता-विक्रेताओं तथा समरूप वस्तुओं वाला बाजार पूर्ण प्रतियोगिता कहलाता है।
उत्तर: जिस कीमत पर माँग और पूर्ति बराबर होती है, वह संतुलन कीमत कहलाती है।
उत्तर: एक वर्ष में देश के सामान्य निवासियों द्वारा अर्जित कुल साधन आय राष्ट्रीय आय कहलाती है।
उत्तर: एक अतिरिक्त इकाई उत्पादन से कुल लागत में होने वाली वृद्धि सीमांत लागत कहलाती है।
प्रश्न 6. कुल उपयोगिता और सीमांत उपयोगिता में अंतर स्पष्ट कीजिए। (2 अंक)
किसी वस्तु की सभी इकाइयों से प्राप्त उपयोगिता का योग कुल उपयोगिता कहलाता है। किसी अतिरिक्त इकाई से प्राप्त अतिरिक्त उपयोगिता सीमांत उपयोगिता कहलाती है।
उपभोक्ता संतुलन से क्या आशय है?
जिस स्थिति में उपभोक्ता अपनी सीमित आय और वस्तुओं की कीमतों को ध्यान में रखते हुए अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है, उसे उपभोक्ता संतुलन कहते हैं।
प्रश्न 7. माँग के नियम को समझाइए। (2 अंक)
अन्य बातें समान रहने पर वस्तु की कीमत बढ़ने से माँग घटती है तथा कीमत घटने से माँग बढ़ती है। अतः कीमत और माँग की मात्रा में विपरीत संबंध पाया जाता है।
माँग को प्रभावित करने वाले कोई दो कारक लिखिए।
माँग को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं— उपभोक्ता की आय तथा संबंधित वस्तुओं की कीमत। रुचि, पसंद और जनसंख्या भी माँग को प्रभावित करते हैं।
प्रश्न 8. स्थिर लागत एवं परिवर्तनशील लागत में अंतर लिखिए। (2 अंक)
स्थिर लागत उत्पादन की मात्रा बदलने पर भी अपरिवर्तित रहती है, जैसे भवन का किराया। परिवर्तनशील लागत उत्पादन की मात्रा के साथ बदलती है, जैसे कच्चा माल और मजदूरी।
कुल लागत एवं औसत लागत का अर्थ लिखिए।
स्थिर लागत तथा परिवर्तनशील लागत के योग को कुल लागत कहते हैं। कुल लागत को उत्पादन की मात्रा से भाग देने पर औसत लागत प्राप्त होती है।
AC = TC ÷ Q
प्रश्न 9. पूर्ण प्रतियोगिता की कोई दो विशेषताएँ लिखिए। (2 अंक)
1. बाजार में क्रेताओं और विक्रेताओं की संख्या बहुत अधिक होती है।
2. सभी फर्में समरूप वस्तु बेचती हैं तथा कोई एक फर्म बाजार कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती।
पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म कीमत स्वीकारक क्यों होती है?
पूर्ण प्रतियोगिता में फर्मों की संख्या बहुत अधिक होती है। प्रत्येक फर्म का बाजार में हिस्सा बहुत कम होता है। इसलिए कोई एक फर्म कीमत को प्रभावित नहीं कर सकती और बाजार द्वारा निर्धारित कीमत स्वीकार करती है।
प्रश्न 10. बाजार संतुलन से क्या आशय है? (2 अंक)
जब किसी वस्तु की माँग की मात्रा और पूर्ति की मात्रा बराबर हो जाती है, तब बाजार संतुलन की स्थिति में होता है। इस स्थिति की कीमत संतुलन कीमत कहलाती है।
अधिक माँग होने पर कीमत पर क्या प्रभाव पड़ता है?
जब माँग पूर्ति से अधिक होती है, तो बाजार में वस्तु की कमी होती है। इससे खरीदार अधिक कीमत देने को तैयार होते हैं और परिणामस्वरूप कीमत बढ़ने की प्रवृत्ति रखती है।
प्रश्न 11. राष्ट्रीय आय की गणना में दोहरी गणना से क्या आशय है? (2 अंक)
किसी वस्तु या सेवा के मूल्य को राष्ट्रीय आय की गणना में एक से अधिक बार शामिल करना दोहरी गणना कहलाता है। इससे राष्ट्रीय आय का मूल्य वास्तविक से अधिक हो जाता है।
अंतिम वस्तु और मध्यवर्ती वस्तु में अंतर लिखिए।
अंतिम वस्तु अंतिम उपभोग या निवेश के लिए खरीदी जाती है, जबकि मध्यवर्ती वस्तु का उपयोग दूसरी वस्तु के उत्पादन में किया जाता है। राष्ट्रीय आय में मध्यवर्ती वस्तुओं को अलग से नहीं जोड़ा जाता।
प्रश्न 12. औसत आय और सीमांत आय को समझाइए। (2 अंक)
कुल आय को बिक्री की मात्रा से भाग देने पर औसत आय प्राप्त होती है। एक अतिरिक्त इकाई बेचने से कुल आय में होने वाली वृद्धि सीमांत आय कहलाती है।
AR = TR ÷ Q
लाभ अधिकतमीकरण की सामान्य शर्त लिखिए।
फर्म का लाभ अधिकतम उस उत्पादन स्तर पर होता है जहाँ MR = MC हो तथा MC वक्र बढ़ता हुआ हो।
प्रश्न 13. अवसर लागत से क्या आशय है? उदाहरण दीजिए। (2 अंक)
किसी विकल्प को चुनने के कारण छोड़े गए सर्वोत्तम वैकल्पिक अवसर से प्राप्त लाभ को अवसर लागत कहते हैं। उदाहरणतः पढ़ाई के लिए नौकरी छोड़ने पर छोड़ी गई नौकरी की आय अवसर लागत होगी।
उत्पादन फलन क्या है?
उत्पादन फलन उत्पादन के साधनों तथा उनसे प्राप्त अधिकतम उत्पादन के बीच पाए जाने वाले तकनीकी संबंध को दर्शाता है।
प्रश्न 14. उपभोक्ता बजट से क्या आशय है? (2 अंक)
उपभोक्ता की निश्चित आय तथा वस्तुओं की दी गई कीमतों के आधार पर वह जिन विभिन्न वस्तु-संयोजनों को खरीद सकता है, उनका समूह उपभोक्ता बजट कहलाता है।
बजट रेखा क्या दर्शाती है?
बजट रेखा उन सभी वस्तु-संयोजनों को दर्शाती है जिन्हें उपभोक्ता अपनी निश्चित आय और दी गई कीमतों पर खरीद सकता है।
प्रश्न 15. राष्ट्रीय आय की गणना की कोई दो विधियाँ लिखिए। (2 अंक)
राष्ट्रीय आय की प्रमुख गणना विधियाँ हैं— आय विधि, उत्पादन/मूल्य-वर्धित विधि तथा व्यय विधि। इनमें से कोई दो विधियाँ लिखना पर्याप्त है।
राष्ट्रीय आय और प्रति व्यक्ति आय में अंतर लिखिए।
राष्ट्रीय आय देश के सामान्य निवासियों की कुल साधन आय को दर्शाती है, जबकि प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय आय को कुल जनसंख्या से भाग देने पर प्राप्त होती है।
प्रति व्यक्ति आय = राष्ट्रीय आय ÷ जनसंख्या
प्रश्न 16. माँग की कीमत लोच से क्या आशय है? इसके प्रकार लिखिए। (3 अंक)
वस्तु की कीमत में परिवर्तन के कारण उसकी माँग की मात्रा में होने वाले परिवर्तन की संवेदनशीलता को माँग की कीमत लोच कहते हैं। इसके प्रमुख प्रकार हैं— पूर्णतः बेलोचदार, अपेक्षाकृत बेलोचदार, इकाई लोचदार, अपेक्षाकृत लोचदार तथा पूर्णतः लोचदार माँग।
माँग वक्र नीचे की ओर क्यों झुकता है?
माँग वक्र के नीचे की ओर झुकने के दो प्रमुख कारण हैं— प्रतिस्थापन प्रभाव और आय प्रभाव। कीमत घटने पर वस्तु अन्य वस्तुओं की तुलना में सस्ती हो जाती है तथा उपभोक्ता की वास्तविक आय बढ़ती है। इसलिए वह वस्तु की अधिक मात्रा खरीदता है।
प्रश्न 17. परिवर्तनशील अनुपात के नियम को समझाइए। (3 अंक)
अल्पकाल में जब कुछ साधन स्थिर और एक साधन परिवर्तनशील होता है, तब परिवर्तनशील साधन की मात्रा बढ़ाने पर उत्पादन में होने वाले परिवर्तन को परिवर्तनशील अनुपात का नियम कहते हैं। इसके तीन चरण हैं— बढ़ते प्रतिफल, घटते प्रतिफल तथा ऋणात्मक प्रतिफल।
कुल उत्पाद, औसत उत्पाद एवं सीमांत उत्पाद समझाइए।
सभी साधन इकाइयों से प्राप्त कुल उत्पादन कुल उत्पाद है। कुल उत्पाद को परिवर्तनशील साधन की इकाइयों से भाग देने पर औसत उत्पाद मिलता है। एक अतिरिक्त साधन इकाई से कुल उत्पादन में होने वाली वृद्धि सीमांत उत्पाद कहलाती है।
प्रश्न 18. पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म के संतुलन की शर्तें समझाइए। (3 अंक)
फर्म के संतुलन की प्रमुख शर्तें हैं—
1. MR = MC होना चाहिए।
2. संतुलन बिंदु पर MC वक्र बढ़ता हुआ होना चाहिए।
पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत, औसत आय और सीमांत आय बराबर होती हैं। अतः P = AR = MR = MC होता है।
पूर्ण प्रतियोगिता में AR एवं MR की स्थिति स्पष्ट कीजिए।
पूर्ण प्रतियोगिता में फर्म बाजार द्वारा निर्धारित कीमत पर वस्तु बेचती है। प्रत्येक अतिरिक्त इकाई की बिक्री से समान कीमत प्राप्त होती है। इसलिए औसत आय = सीमांत आय = कीमत होती है। अर्थात् AR = MR = P।
प्रश्न 19. राष्ट्रीय आय लेखांकन से क्या आशय है? इसकी उपयोगिता बताइए। (3 अंक)
एक निश्चित अवधि में देश में उत्पादित वस्तुओं एवं सेवाओं तथा उनसे उत्पन्न आय और व्यय का व्यवस्थित लेखा राष्ट्रीय आय लेखांकन कहलाता है। इससे अर्थव्यवस्था के उत्पादन, आय और विकास का अध्ययन करने तथा आर्थिक नीतियों एवं योजनाओं के निर्माण में सहायता मिलती है।
राष्ट्रीय आय मापने की आय विधि को समझाइए।
आय विधि में उत्पादन के साधनों को प्राप्त होने वाली साधन आयों को जोड़ा जाता है। इसमें मजदूरी, किराया, ब्याज और लाभ आदि आयों को शामिल किया जाता है। दोहरी गणना से बचने के लिए आवश्यक समायोजन किए जाते हैं।
प्रश्न 20. सीमांत उपयोगिता विश्लेषण द्वारा उपभोक्ता संतुलन समझाइए। (4 अंक)
सीमांत उपयोगिता विश्लेषण के अनुसार उपभोक्ता अपनी सीमित आय से अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करने की स्थिति में संतुलन में होता है। एक वस्तु के मामले में संतुलन तब प्राप्त होता है जब वस्तु की सीमांत उपयोगिता उसके मूल्य के बराबर हो जाती है।
MU = Price
यदि MU कीमत से अधिक है तो उपभोक्ता वस्तु की मात्रा बढ़ाएगा। यदि MU कीमत से कम है तो वह मात्रा घटाएगा। जब MU = Price हो जाती है, तब उपभोक्ता अधिकतम संतुष्टि प्राप्त करता है और संतुलन में होता है।
माँग की कीमत लोच को प्रभावित करने वाले कारक समझाइए।
माँग की कीमत लोच को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं—
1. प्रतिस्थापन वस्तुओं की उपलब्धता: अधिक विकल्प होने पर माँग अधिक लोचदार होती है।
2. वस्तु की प्रकृति: आवश्यक वस्तुओं की माँग अपेक्षाकृत बेलोचदार होती है।
3. आय में वस्तु का हिस्सा: आय का बड़ा हिस्सा खर्च होने पर माँग अधिक लोचदार होती है।
4. समय अवधि: अधिक समय मिलने पर उपभोक्ता विकल्प खोज सकता है।
प्रश्न 21. उत्पादन लागत की विभिन्न अवधारणाओं को समझाइए। (4 अंक)
1. कुल स्थिर लागत (TFC): उत्पादन की मात्रा बदलने पर भी अपरिवर्तित रहने वाली लागत।
2. कुल परिवर्तनशील लागत (TVC): उत्पादन की मात्रा के साथ बदलने वाली लागत।
3. कुल लागत (TC): TFC और TVC का योग।
4. औसत लागत (AC): कुल लागत प्रति इकाई उत्पादन।
5. सीमांत लागत (MC): एक अतिरिक्त इकाई उत्पादन से कुल लागत में होने वाली वृद्धि।
लाभ अधिकतम करने के लिए फर्म के संतुलन को समझाइए।
फर्म का लाभ अधिकतम उस उत्पादन स्तर पर होता है जहाँ MR = MC होता है। साथ ही MC वक्र बढ़ता हुआ होना चाहिए। पूर्ण प्रतियोगिता में कीमत = AR = MR होती है। अतः संतुलन उत्पादन पर P = MR = MC की स्थिति महत्वपूर्ण होती है।
प्रश्न 22. बाजार संतुलन को माँग एवं पूर्ति के आधार पर समझाइए। (4 अंक)
जब किसी वस्तु की माँग और पूर्ति की मात्रा बराबर हो जाती है, तब बाजार संतुलन में होता है। इस स्थिति में निर्धारित कीमत संतुलन कीमत तथा मात्रा संतुलन मात्रा कहलाती है।
यदि कीमत संतुलन कीमत से अधिक है, तो पूर्ति माँग से अधिक हो सकती है और कीमत घटने की प्रवृत्ति होती है। यदि कीमत संतुलन कीमत से कम है, तो माँग पूर्ति से अधिक हो सकती है और कीमत बढ़ने की प्रवृत्ति होती है। इस प्रकार बाजार शक्तियाँ संतुलन स्थापित करती हैं।
माँग एवं पूर्ति में वृद्धि का संतुलन पर प्रभाव समझाइए।
माँग में वृद्धि होने पर माँग वक्र दाईं ओर खिसकता है। सामान्यतः इससे संतुलन मात्रा और संतुलन कीमत दोनों बढ़ती हैं। पूर्ति में वृद्धि होने पर पूर्ति वक्र दाईं ओर खिसकता है। इससे सामान्यतः संतुलन मात्रा बढ़ती और संतुलन कीमत घटती है।
प्रश्न 23. राष्ट्रीय आय की विभिन्न अवधारणाओं को सूत्र सहित समझाइए। (4 अंक)
1. GDP: देश की घरेलू सीमा में उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का सकल मूल्य।
2. GNP:
GNP = GDP + विदेशों से शुद्ध साधन आय
3. NNP:
NNP = GNP − मूल्यह्रास
4. राष्ट्रीय आय: साधन लागत पर NNP को सामान्यतः राष्ट्रीय आय माना जाता है।
राष्ट्रीय आय की गणना की उत्पादन, आय एवं व्यय विधियों को समझाइए।
1. उत्पादन विधि: विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों द्वारा किए गए मूल्य-वर्धन को जोड़ा जाता है।
2. आय विधि: मजदूरी, किराया, ब्याज और लाभ आदि साधन आयों को जोड़ा जाता है।
3. व्यय विधि: अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं पर किए गए अंतिम व्यय को जोड़ा जाता है।
सभी विधियों में दोहरी गणना से बचना तथा आवश्यक समायोजन करना आवश्यक है।
यह केवल त्रैमासिक परीक्षा की तैयारी एवं अभ्यास हेतु एक मॉडल (प्रारूप) प्रश्न पत्र है। इसमें दिए गए प्रश्न एवं उत्तर परीक्षा पैटर्न पर आधारित संभावित अभ्यास सामग्री हैं, इसे आधिकारिक परीक्षा पेपर न समझें। विद्यार्थी अपनी अंतिम तैयारी हेतु आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तकों का ही अनुसरण करें।

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