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मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों के लिए चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) की पूरी प्रक्रिया आसान शब्दों में
क्या आप मध्य प्रदेश शासन के कर्मचारी हैं और चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) की जटिल प्रक्रिया को लेकर उलझन में हैं? वर्ष 2022 में लागू किए गए 'मध्य प्रदेश सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2022' ने इस प्रक्रिया को काफी व्यवस्थित कर दिया है।
इस ब्लॉग पोस्ट में हम ओपीडी (OPD) से लेकर आईपीडी (IPD), आपातकालीन इलाज और मेडिकल एडवांस तक की पूरी प्रक्रिया को आसान स्टेप्स में समझेंगे।
यह नियम किन कर्मचारियों पर लागू होता है?
चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति का लाभ केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। यह नियम निम्नलिखित पर लागू होता है:
- राज्य के भीतर ड्यूटी, अवकाश, प्रतिनियुक्ति या निलंबन पर मौजूद शासकीय कर्मचारी ।
- संविदा (Contract) आधार पर कार्यरत शासकीय कर्मचारी ।
- प्रशिक्षणाधीन या डयूटी पर तैनात नगर सैनिक (Home Guards) ।
- आकस्मिकता निधि से वेतन पाने वाले पूर्णकालिक कर्मचारी ।
- कार्यभारित स्थापना (Work-charged establishment) के निरंतर नियोजित सदस्य ।
(नोट: अंशकालिक (Part-time), अवैतनिक और सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर यह नियम लागू नहीं होता है ।)
बाह्य रोगी (OPD) उपचार के नियम
यदि आप शासकीय चिकित्सालय में बिना भर्ती हुए (ओपीडी) इलाज कराते हैं, तो उसकी प्रतिपूर्ति के नियम इस प्रकार हैं:
शासकीय अस्पताल में प्राधिकृत चिकित्सक द्वारा ओपीडी परामर्श निःशुल्क है ।
2,000 रुपये प्रति माह तक: यदि आप एक साल में 4 बार या लगातार 3 माह तक अधिकतम 2,000 रुपये प्रति माह (यानी साल में 8,000 रुपये तक) के बिल लगाते हैं, तो आपका नियंत्रणकर्ता अधिकारी (Controlling Officer) इसे सीधे पास कर सकता है ।
8,000 से 20,000 रुपये तक: ऐसे देयकों को नियंत्रणकर्ता अधिकारी द्वारा जिला मेडिकल बोर्ड (जिसमें सिविल सर्जन और विशेषज्ञ शामिल हों) को अनुशंसा के लिए भेजा जाएगा ।
20,000 रुपये से अधिक: एक वित्तीय वर्ष में 20,000 रुपये से अधिक के ओपीडी क्लेम आमतौर पर स्वीकृत नहीं किए जाते ।
अपवाद: यदि सिविल सर्जन 'प्ररूप-तीन' (Form 3) में यह प्रमाणित कर दें कि बीमारी लंबी चलने वाली है (Chronic Disease), तो 20,000 रुपये की सीमा लागू नहीं होगी ।
आवेदन का समय: व्यय की तिथि से 6 माह के भीतर 'प्ररूप-दो' (Form 2) में आवेदन करना अनिवार्य है ।
भर्ती होकर (IPD) इलाज कराने की प्रक्रिया
अस्पताल में भर्ती होने पर इलाज का खर्च सी.जी.एच.एस. (CGHS) भोपाल शहर की निर्धारित पैकेज दरों के अनुसार ही दिया जाता है ।
1. राज्य के भीतर (Within State) इलाज:
शासकीय अस्पताल: बिना किसी रेफरल के सीधे इलाज करा सकते हैं। बिल सीधे नियंत्रणकर्ता अधिकारी द्वारा पास होंगे ।
सूचीबद्ध निजी अस्पताल (Empaneled Private Hospitals): राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में विशिष्ट बीमारियों के लिए बिना रेफरल (Prior Referral) के भर्ती हुआ जा सकता है । क्षेत्रीय समिति की अनुशंसा पर नियंत्रणकर्ता अधिकारी बिल पास करेंगे ।
2. राज्य के बाहर (Outside State) इलाज:
यदि आप राज्य के बाहर के सूचीबद्ध अस्पतालों (जैसे- मेदांता, अपोलो, व्होकार्ड आदि) में इलाज कराना चाहते हैं, तो भर्ती होने से पहले निकटतम शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय के डीन (Dean) से 'प्ररूप-पांच' (Form 5) में रेफरल अनुमति लेना अनिवार्य है ।
🚨 आपातकालीन स्थिति (Emergency) में इलाज के नियम
कई बार मेडिकल इमरजेंसी बताकर नहीं आती। ऐसे में नियम शासकीय कर्मचारियों को सहूलियत देते हैं:
आपात स्थिति में आप किसी भी अस्पताल (गैर-सूचीबद्ध यानी Non-empaneled में भी) इलाज करा सकते हैं ।
आपको सबसे पहले अस्पताल का पूरा बिल खुद चुकाना होगा ।
प्रतिपूर्ति के लिए आपको अपने क्लेम के साथ 'आपातकालीन चिकित्सीय अवस्था प्रमाण-पत्र' (प्ररूप-एक / Form 1) अनिवार्य रूप से लगाना होगा ।
5 लाख रुपये तक के क्लेम संभागीय समिति (Divisional Committee) और 5 से 20 लाख रुपये तक के क्लेम राज्य स्तरीय समिति (State Level Committee) की अनुशंसा पर पास किए जाएंगे । गैर-सूचीबद्ध अस्पतालों में बिना इमरजेंसी के रेफरल की अनुमति नहीं है ।
चिकित्सा अग्रिम (Medical Advance) की सुविधा
यदि इलाज का एस्टीमेट (प्राक्कलित व्यय) अधिक है, तो कर्मचारी अपने इलाज या आश्रित के इलाज के लिए कुल अनुमानित खर्च का 80% तक एडवांस ले सकता है ।
शासकीय अस्पताल: अस्पताल अधीक्षक की अनुशंसा पर ।
राज्य के भीतर सूचीबद्ध निजी अस्पताल: सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक की अनुशंसा पर।
राज्य के बाहर सूचीबद्ध निजी अस्पताल: निकटतम शासकीय मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता (Dean) की अनुशंसा पर ।
आवश्यक फॉर्म्स (Forms) की त्वरित जानकारी
प्रतिपूर्ति की फाइल तैयार करते समय सही फॉर्म का चुनाव बेहद जरूरी है:
1. प्ररूप एक (Form 1): आपातकालीन स्थिति का प्रमाण-पत्र ।
2. प्ररूप दो (Form 2): बाह्य रोगी (OPD) व्यय प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन ।
3. प्ररूप तीन (Form 3): लंबी बीमारी (Chronic Disease) के निरंतर ओपीडी इलाज का प्रमाण-पत्र।
4. प्ररूप चार (Form 4): भर्ती रोगी (IPD) व्यय प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन ।
5. प्ररूप पांच (Form 5): राज्य के बाहर के निजी अस्पताल में इलाज के लिए पूर्व रेफरल प्रमाण-पत्र।
6. प्ररूप छह (Form 6 - Essentiality Certificate): यदि कोई दवा 'आवश्यक दवा सूची' से बाहर की लिखी गई है या सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, तो इसे डॉक्टर और सिविल सर्जन द्वारा प्रमाणित करवाना होगा ।
मध्यप्रदेश सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2022: यह मुख्य राजपत्र है जो मध्य प्रदेश के शासकीय कर्मचारियों और उनके आश्रितों के चिकित्सा उपचार और व्यय की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) के नियमों को स्पष्ट करता है । इसमें बाह्य रोगी (OPD) , अंतर्वासी रोगी (IPD) , आपातकालीन स्थिति में इलाज , और सीजीएचएस (CGHS) भोपाल दरों के आधार पर प्रतिपूर्ति की सीमाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है ।
राज्य के भीतर मान्यता प्राप्त अस्पतालों की सूची (31 मार्च 2026 तक): इस सूची में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर आदि) के सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के नाम, उनमें स्वीकृत उपचार/सुविधाओं का विवरण और उनकी अधिमान्यता की अवधि दी गई है ।
राज्य के भीतर मान्यता प्राप्त अस्पतालों की सूची (31 मार्च 2026) Download
चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति आवश्यक फॉर्म PDF (प्ररूप 1 से 6 - हिन्दी) Download
चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति आवश्यक फॉर्म PDF (Form 1 to 6 - English) Download
💡 प्रो टिप: अपने दावों को मजबूत बनाने के लिए सभी मूल पर्चियां (OPD/IPD नंबर और तारीख के साथ), कैश मेमो और डिस्चार्ज टिकट सुरक्षित रखें । राज्य शासन द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पतालों की सूची समय-समय पर अपडेट होती रहती है (जैसे नवीनतम सूची 31 मार्च 2026 तक अपडेटेड है), इसलिए इलाज से पहले अस्पताल की मान्यता सूची अवश्य जांच लें।
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