Class 12 History Pre-Board Model Answer 2025–26 | कक्षा 12वीं इतिहास प्री-बोर्ड मॉडल आंसर

Class 12 History Pre-Board Model Answer 2025–26 | कक्षा 12वीं इतिहास प्री-बोर्ड मॉडल आंसर

MP EDUCATION GYAN DEEP

कक्षा 12वीं इतिहास (History) की प्री-बोर्ड परीक्षा 2025–26 आयोजित हो चुकी है। परीक्षा के बाद विद्यार्थियों को अपने उत्तरों का मिलान (Answer Checking), Answer Writing Style सुधारने और Board Exam 2026 की बेहतर तैयारी के लिए यह ब्लॉग पोस्ट तैयार की गई है।

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प्री-बोर्ड परीक्षा 2026

कक्षा 12वीं - इतिहास (History)

सम्पूर्ण हल (Full Solution)

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प्रश्न 1. सही विकल्प चुनकर लिखिए (1×6=6)
(i) सिन्धु सभ्यता के लोग लाजवर्द मणि प्राप्त करते थे:
(अ) शोर्तुघई (ब) हड़प्पा (स) कालीबंगन (द) लोथल
(अ) शोर्तुघई (अफगानिस्तान)
(ii) 'कुंती ओ निषादी' नामक रचना है:
(अ) जयशंकर प्रसाद (ब) महाश्वेता देवी (स) सुमित्रानंदन पन्त (द) महादेवी वर्मा
(ब) महाश्वेता देवी
(iii) इब्नबतूता का यात्रा वृतांत है:
(अ) रिहला (ब) किताब उल हिन्द (स) ट्रेवल्स इन द मुग़ल एम्पायर (द) इंडिका
(अ) रिहला
(iv) हम्पी के भग्नावशेषों की खोज की:
(अ) डोमिंगो पेस (ब) बर्नियर (स) कॉलिन मेकेंजी (द) मनूकी
(स) कॉलिन मेकेंजी
(v) दक्कन दंगा आयोग ने अपनी रिपोर्ट ब्रिटिश पार्लियामेंट में प्रस्तुत की:
(अ) 1875 ई. (ब) 1876 ई. (स) 1890 ई. (द) 1878 ई.
(द) 1878 ई.
(vi) संविधान सभा के अध्यक्ष थे:
(अ) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद (ब) जवाहरलाल नेहरु (स) महात्मा गाँधी (द) गोविन्द वल्लभ पन्त
(अ) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद

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प्रश्न 2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए (1×6=6)
(i) सिंधु सभ्यता के ........... से विशाल स्नानागार के साक्ष्य प्राप्त हुए हैं।
मोहनजोदड़ो
(ii) ........... ने युधिष्ठिर को द्यूत क्रीड़ा के लिए आमंत्रित किया।
दुर्योधन
(iii) मक्खलि गोसाल का संबंध ........... परंपरा से है।
आजीविक
(iv) फ्रांस्वा बर्नियर सत्रहवीं शताब्दी में ........... से आया था।
फ्रांस
(v) भगवान जगन्नाथ ........... के एक स्वरूप माने जाते हैं।
विष्णु
(vi) तालीकोटा का युद्ध सन ........... में हुआ था।
1565 ई.

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प्रश्न 3. सत्य / असत्य लिखिए (1×6=6)
(i) हड़प्पा की लिपि चित्रात्मक थी।
सत्य
(ii) 1830 के दशक में ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि का अर्थ निकाला गया।
सत्य
(iii) बी. बी. लाल ने मेरठ जिले के हस्तिनापुर नामक गाँव में खुदाई करवायी।
सत्य
(iv) ऋग्वेद का संकलन 1000 ई. पू. से 500 ई. पू. में हुआ।
असत्य (यह 1500-1000 ई.पू. में हुआ)
(v) इतालवी चिकित्सक मनूकी भारत में ही बस गया था।
सत्य
(vi) अप्पार एक नयनार संत थे।
सत्य

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प्रश्न 4. सही जोड़ी बनाइए (1×7=7)
सही जोड़ी मिलान
(i) मगध → (ख) राजगाह
(ii) अजंता → (घ) महाराष्ट्र
(iii) बासवन्ना → (क) वीर शैव
(iv) बाबर → (छ) बाबरनामा
(v) इस्तमरारी बंदोबस्त → (ग) कार्नवालिस
(vi) पूर्ण स्वराज → (ड.) लाहौर अधिवेशन
(vii) प्रारूप समिति → (च) डॉ. अम्बेडकर

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प्रश्न 5. एक वाक्य में उत्तर लिखिए (1×7=7)
(i) 'अर्थशास्त्र' की रचना किसने की?
कौटिल्य (चाणक्य)
(ii) गुन्टूर के कमिश्नर ने अमरावती की यात्रा कब की?
1854 ई. में
(iii) मीरा बाई के गुरु कौन थे?
संत रैदास (रविदास)
(iv) मुग़ल साम्राज्य में पंचायत का मुखिया क्या कहलाता था?
मुकद्दम या मंडल
(v) पांचवी रिपोर्ट ब्रिटिश पार्लियामेंट में कब प्रस्तुत की गई?
1813 ई. में
(vi) जगदीशपुर में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व किसने किया?
कुंवर सिंह
(vii) क्रिप्स मिशन कब भारत पहुंचा?
मार्च 1942 में

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अति लघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)
प्रश्न 6. हड़प्पा सभ्यता से प्राप्त बाटों के बारे में लिखिए।
हड़प्पा सभ्यता में विनिमय के लिए बाटों का प्रयोग होता था। ये सामान्यतः 'चर्ट' नामक पत्थर से बनाए जाते थे और घनाकार होते थे। इन पर कोई निशान नहीं होता था। छोटे बाटों का मानदंड द्विआधारी (1, 2, 4, 8, 16...) था।
अथवा / OR
प्रश्न 6 (अथवा). हड़प्पा सभ्यता के धार्मिक जीवन की दो विशेषताएं लिखिए।
(1) मातृदेवी की पूजा: खुदाई में बड़ी संख्या में मिट्टी की स्त्री मूर्तियाँ मिली हैं।
(2) पशुपति शिव (आद्य शिव) की पूजा: मुहरों पर एक योगी की मुद्रा में पुरुष का चित्र मिला है जिसके चारों ओर जानवर हैं।
प्रश्न 7. स्त्रीधन से क्या आशय है?
धर्मशास्त्रों के अनुसार, विवाह के समय वधू को जो उपहार (जेवर, धन आदि) माता-पिता और संबंधियों से मिलते थे, उस पर उसी का स्वामित्व माना जाता था। इसे ही 'स्त्रीधन' कहा जाता था और इस पर पति का अधिकार नहीं होता था।
अथवा / OR
प्रश्न 7 (अथवा). प्राचीन काल में व्यक्ति के गोत्र का निर्धारण कैसे होता था?
प्रत्येक गोत्र एक वैदिक ऋषि के नाम पर होता था। गोत्र निर्धारण के दो मुख्य नियम थे: (1) विवाह के पश्चात स्त्रियों को पिता के स्थान पर पति का गोत्र अपनाना पड़ता था। (2) एक ही गोत्र के सदस्य आपस में विवाह नहीं कर सकते थे।
प्रश्न 8. भारत आने से पहले इब्नबतूता कौन सी यात्राएं कर चुका था?
1333 ई. में भारत आने से पहले इब्नबतूता ने मक्का की तीर्थयात्रा की थी। इसके अलावा वह सीरिया, इराक, फारस (ईरान), यमन, ओमान और पूर्वी अफ्रीका के कई तटीय व्यापारिक बंदरगाहों की यात्रा कर चुका था।
अथवा / OR
प्रश्न 8 (अथवा). फ़्रांस्वा बर्नियर का मुगल परिवार से क्या संबंध था?
फ़्रांस्वा बर्नियर एक फ्रांसीसी चिकित्सक था। वह मुगल दरबार में दारा शिकोह (शाहजहाँ के ज्येष्ठ पुत्र) के निजी चिकित्सक के रूप में नियुक्त हुआ था। बाद में वह औरंगजेब के दरबार में भी रहा और मुग़ल अमीरों के साथ उसका घनिष्ठ संबंध रहा।
प्रश्न 9. रायचूर दोआब से क्या तात्पर्य है?
कृष्णा और तुंगभद्रा नदियों के बीच के अत्यंत उपजाऊ भू-भाग को 'रायचूर दोआब' कहा जाता था। विजयनगर और बहमनी साम्राज्यों के बीच इस क्षेत्र पर अधिकार को लेकर निरंतर संघर्ष होता रहता था।
अथवा / OR
प्रश्न 9 (अथवा). कुदिरई चेट्टी कौन थे?
विजयनगर साम्राज्य में घोड़ों के व्यापार में लगे स्थानीय व्यापारियों के समूह को 'कुदिरई चेट्टी' कहा जाता था, जिसका अर्थ है 'घोड़े के व्यापारी'। उस समय युद्ध के लिए अच्छी नस्ल के घोड़ों की बहुत मांग थी।
प्रश्न 10. मुगल काल में लगान वसूली के कौन-कौन से तरीके प्रचलन में थे?
मुगल काल में लगान वसूली की प्रमुख प्रणालियाँ थीं: (1) कनंकुत (अनाज के अनुमान पर), (2) बटाई या भावली (फसल कटने पर बंटवारा), और (3) खेत-बटाई। नकद भुगतान (जब्ती प्रणाली) को राज्य द्वारा प्राथमिकता दी जाती थी।
अथवा / OR
प्रश्न 10 (अथवा). जिंस-ए-कामिल में कौन-कौन सी फसलें शामिल की गई थी?
'जिंस-ए-कामिल' का अर्थ है सर्वोत्तम फसलें। इसमें मुख्य रूप से नकदी फसलें जैसे कपास और गन्ना शामिल थीं। तिलहन (जैसे सरसों) और दलहन को भी इसमें गिना जाता था क्योंकि इनसे राज्य को अधिक राजस्व मिलता था।
प्रश्न 11. दामिन-ए-कोह क्या थे?
अंग्रेजों ने राजमहल की पहाड़ियों के नीचे की भूमि को खंभे गाड़कर सीमांकित कर दिया था और इसे संथालों को खेती के लिए दिया था। इसी सीमांकित क्षेत्र को 'दामिन-ए-कोह' कहा गया, जहाँ संथालों को स्थायी कृषि करनी थी।
अथवा / OR
प्रश्न 11 (अथवा). संथाल विद्रोह कब और किसके नेतृत्व में हुआ?
संथाल विद्रोह 1855-56 ई. में हुआ था। इसका नेतृत्व चार भाइयों - सिद्धू, कान्हू, चाँद और भैरव ने किया था। यह विद्रोह अंग्रेजों और दिकुओं (साहूकारों) के शोषण के विरुद्ध था।
प्रश्न 12. सहायक संधि की कोई दो शर्तें लिखिए।
(1) सहयोगी रियासत को अपनी सेना भंग करनी होती थी और अपनी सुरक्षा के लिए ब्रिटिश सेना रखनी पड़ती थी, जिसका पूरा खर्च वह रियासत उठाती थी।
(2) दरबार में एक ब्रिटिश 'रेजीडेंट' (प्रतिनिधि) रखना अनिवार्य था, जिसके माध्यम से अंग्रेज आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते थे।
अथवा / OR
प्रश्न 12 (अथवा). "अवध में विद्रोह का जोर सबसे ज्यादा था" क्यों?
1856 में अवध का विलय और लोकप्रिय नवाब वाजिद अली शाह को हटाने से जनता बहुत दुखी थी। तालुकदारों की जागीरें छिन गईं और किसानों पर कर का बोझ बढ़ गया। साथ ही, बंगाल आर्मी के अधिकांश सैनिक अवध से थे, जिससे वहां विद्रोह भड़क उठा।
प्रश्न 13. लाल-बाल-पाल के नाम से किन्हें जाना जाता था?
कांग्रेस के गरम दल के तीन प्रमुख नेताओं को संयुक्त रूप से लाल-बाल-पाल कहा जाता था:
1. लाला लाजपत राय (पंजाब)
2. बाल गंगाधर तिलक (महाराष्ट्र)
3. विपिन चन्द्र पाल (बंगाल)।
अथवा / OR
प्रश्न 13 (अथवा). गांधी-इर्विन समझौते की कोई दो शर्तें लिखिए।
5 मार्च 1931 को हुए इस समझौते की प्रमुख शर्तें थीं:
(1) गांधीजी सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित करेंगे और दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे।
(2) सरकार उन राजनीतिक कैदियों को रिहा करेगी जिन पर हिंसा का आरोप नहीं है और तटीय इलाकों में नमक बनाने की छूट देगी।
प्रश्न 14. भारत जैसे नवजात राष्ट्र के सामने कौन सी जटिल समस्या थी?
स्वतंत्रता के समय भारत के सामने दो प्रमुख समस्याएं थीं:
(1) भारत विभाजन के कारण हुए भीषण सांप्रदायिक दंगे और लाखों शरणार्थियों का पुनर्वास।
(2) लगभग 562 देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कर देश का एकीकरण करना और उन्हें टूटने से बचाना।
अथवा / OR
प्रश्न 14 (अथवा). संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव कैसे हुआ?
संविधान सभा के सदस्यों का चुनाव 1946 में प्रांतीय विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा अप्रत्यक्ष निर्वाचन पद्धति से हुआ था। देशी रियासतों के प्रतिनिधियों का मनोनयन वहां के शासकों द्वारा किया गया था।
प्रश्न 15. हंसा मेहता ने संविधान सभा में महिलाओं के लिए किन अधिकारों की मांग की?
हंसा मेहता ने महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों की मांग नहीं की। उन्होंने 'सामाजिक न्याय' और पुरुषों के साथ 'समानता' की मांग की। उन्होंने कहा कि "हमें विशेष अधिकार नहीं, बल्कि बराबरी का दर्जा चाहिए ताकि हम राष्ट्र सेवा में योगदान दे सकें।"
अथवा / OR
प्रश्न 15 (अथवा). आर.वी. धुलेकर ने हिन्दी के पक्ष में क्या टिप्पणी की?
आर.वी. धुलेकर ने जोरदार शब्दों में तर्क दिया कि हिंदी को ही भारत की राष्ट्रभाषा और संविधान निर्माण की भाषा होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जो लोग भारत का संविधान बनाने बैठे हैं और हिंदी नहीं जानते, वे इस सभा की सदस्यता के योग्य नहीं हैं।"

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लघु उत्तरीय प्रश्न (3 अंक)
प्रश्न 16. "मोहनजोदड़ो एक सुनियोजित नगर था।" व्याख्या कीजिए।
मोहनजोदड़ो की नगर योजना उत्कृष्ट और आधुनिक थी:
1. ग्रिड पद्धति: सड़कें और गलियाँ एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिससे शहर आयताकार खंडों में बंटा था।
2. नगर विभाजन: शहर स्पष्ट रूप से दो भागों में बंटा था - पश्चिमी भाग 'दुर्ग' (जो ऊँचाई पर था) और पूर्वी भाग 'निचला शहर' (जो आवासीय था)।
3. जल निकासी: यहाँ की जल निकासी व्यवस्था अद्भुत थी। नालियां पक्की ईंटों से बनी और ढकी हुई थीं। घरों का गंदा पानी पहले एक हौदी में जाता था, फिर मुख्य नाली में।
4. ईंटें: मकानों और सड़कों में एक निश्चित अनुपात (4:2:1) की पक्की ईंटों का प्रयोग किया गया था।
अथवा / OR
प्रश्न 16 (अथवा). हड़प्पा सभ्यता के समकालीन सभ्यताओं से संपर्क का वर्णन कीजिये।
हड़प्पा सभ्यता का सुदूर पश्चिमी देशों से व्यापारिक संपर्क था:
1. मेसोपोटामिया: वहाँ के लेखों में हड़प्पा क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' शब्द का प्रयोग हुआ है। हड़प्पाई मुहरें, बाट और कार्नेलियन मनके मेसोपोटामिया में मिले हैं।
2. ओमान: यहाँ से तांबा मंगाया जाता था। रासायनिक विश्लेषण में ओमानी तांबे और हड़प्पाई पुरावस्तुओं में निकल के अंश मिले हैं जो दोनों के संपर्क को दर्शाते हैं।
3. बहरीन: मेसोपोटामिया के लेखों में इसे 'दिलमुन' कहा गया है जो व्यापार का मध्यस्थ केंद्र था।
मुहरों पर जहाजों और नावों के चित्र यह बताते हैं कि यह व्यापार समुद्री मार्ग से होता था।
प्रश्न 17. नियतिवादी और भौतिकवादी परंपरा के बीच कोई तीन अंतरों को स्पष्ट कीजिए।
1. मूल सिद्धांत: नियतिवादी (आजीविक) मानते थे कि सुख-दुख और जीवन की हर घटना भाग्य (नियति) द्वारा पूर्व-निर्धारित है, मनुष्य इसे बदल नहीं सकता। इसके विपरीत, भौतिकवादी (लोकायत) मानते थे कि केवल प्रत्यक्ष ही सत्य है, परलोक, कर्म या भाग्य जैसा कुछ नहीं है।
2. संस्थापक: नियतिवाद के प्रमुख आचार्य 'मक्खलि गोसाल' थे, जबकि भौतिकवाद के प्रमुख दार्शनिक 'अजित केशकम्बल' थे।
3. कर्म और दान: नियतिवादी मानते थे कि दान, पुण्य या तप से भाग्य को घटाया-बढ़ाया नहीं जा सकता। भौतिकवादी दान और यज्ञ को मूर्खतापूर्ण मानते थे क्योंकि मृत्यु के बाद शरीर नष्ट हो जाता है और कुछ शेष नहीं रहता।
अथवा / OR
प्रश्न 17 (अथवा). सांची में उत्कीर्णित शालभंजिका की मूर्ति के बारे में वर्णन कीजिये।
सांची स्तूप के तोरण द्वार पर एक स्त्री की सुंदर मूर्ति उत्कीर्ण है जो वृक्ष की डाल पकड़कर झूल रही है। इसे 'शालभंजिका' कहा जाता है। लोक परंपरा में यह माना जाता था कि इस स्त्री के स्पर्श मात्र से वृक्षों में फूल खिल उठते हैं और फल आ जाते हैं। यह एक शुभ प्रतीक (मंगल) माना जाता था। यद्यपि इसका बौद्ध धर्म के दार्शनिक पक्ष से सीधा संबंध नहीं था, फिर भी इसे स्तूप के अलंकरण में स्थान दिया गया। यह दर्शाता है कि बौद्ध धर्म ने लोक परंपराओं और विश्वासों को अपने में समाहित कर लिया था।
प्रश्न 18. विजयनगर साम्राज्य के मंदिरों की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
विजयनगर की मंदिर स्थापत्य कला अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध थी:
1. गोपुरम: मंदिरों के प्रवेश द्वार, जिन्हें 'गोपुरम' कहा जाता था, बहुत विशाल और ऊँचे होते थे। ये अक्सर मुख्य मंदिर के शिखर से भी बड़े होते थे और राजकीय सत्ता के प्रतीक थे (जैसे विरूपाक्ष मंदिर का गोपुरम)।
2. मंडप: मंदिरों में लंबे स्तंभों वाले गलियारे और 'कल्याण मंडप' (विवाह हॉल) बनाए जाते थे, जहाँ देवताओं के विवाह उत्सव मनाए जाते थे।
3. रथ मंदिर: विट्ठल मंदिर परिसर में पत्थर से बना एक शानदार रथ है, जो इसकी वास्तुकला का अद्भुत नमूना है।
4. सभागार: देवताओं के झूला झूलने, संगीत, नृत्य और नाटकों के लिए विशेष सभागार होते थे।
अथवा / OR
प्रश्न 18 (अथवा). डोमिंगो पेस ने विजयनगर के बाज़ार का क्या वर्णन किया है?
पुर्तगाली यात्री डोमिंगो पेस (1520-22) ने विजयनगर को "दुनिया का सबसे अच्छा और समृद्ध शहर" बताया। उसने लिखा कि:
1. यहाँ के बाजारों में दुनिया की हर चीज मिलती थी।
2. शाम को बाज़ार में लोगों की भारी भीड़ होती थी।
3. यहाँ हीरे, मोती, माणिक्य, रेशम जैसी कीमती वस्तुओं से लेकर आम उपभोग की वस्तुएं जैसे चावल, गेहूँ, और फल (अंगूर, संतरा, नींबू) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे।
4. कीमतें बहुत कम थीं और खाद्य सामग्री की कोई कमी नहीं थी। यह वर्णन शहर की अपार समृद्धि को दर्शाता है।
प्रश्न 19. विद्रोहियों ने अपने बीच एकता स्थापित करने के क्या तरीके अपनाए?
1857 के विद्रोहियों ने हिंदू-मुस्लिम एकता स्थापित करने के लिए कई कदम उठाए:
1. साझी घोषणाएँ: विद्रोही नेताओं द्वारा जारी घोषणाएं हिंदू और मुस्लिम दोनों भाषाओं में होती थीं और दोनों की भावनाओं का ध्यान रखा जाता था।
2. साझा शत्रु: अंग्रेजों को दोनों धर्मों (दीन और धर्म) का शत्रु बताया गया। यह अपील की गई कि यह लड़ाई दोनों को बचाने के लिए है।
3. धार्मिक सौहार्द: विद्रोह के दौरान हिंदुओं की भावनाओं का ख्याल रखते हुए बहादुर शाह जफर ने गोहत्या पर रोक लगा दी थी।
4. कारतूस का मुद्दा: गाय और सुअर की चर्बी वाले कारतूसों ने दोनों समुदायों को अंग्रेजों के खिलाफ एक मंच पर ला खड़ा किया।
अथवा / OR
प्रश्न 19 (अथवा). 1857 के विद्रोह के किन्ही तीन नायकों के व्यक्तित्व और योगदान का वर्णन कीजिये।
1. रानी लक्ष्मीबाई (झांसी): डलहौजी की 'हड़प नीति' के तहत उनका दत्तक पुत्र अमान्य कर राज्य छीन लिया गया। उन्होंने अंग्रेजों से वीरतापूर्वक युद्ध किया और ग्वालियर में शहीद हुईं। वे विद्रोह का सबसे तेजस्वी प्रतीक बनीं।
2. कुंवर सिंह (बिहार): आरा (जगदीशपुर) के 80 वर्षीय जमींदार थे। वृद्ध होने के बावजूद उन्होंने अपनी छापामार युद्ध नीति से अंग्रेजों को कई बार हराया और गंगा पार करते समय अपना हाथ काटकर अर्पित कर दिया।
3. नाना साहब (कानपुर): अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे। अंग्रेजों ने उनकी पेंशन बंद कर दी थी। उन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया और सिपाहियों को संगठित कर अंग्रेजों को खदेड़ दिया।

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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)
प्रश्न 20. मौर्य साम्राज्य की जानकारी के स्त्रोतों का वर्णन कीजिये।
मौर्य साम्राज्य के इतिहास को जानने के लिए हमारे पास विविध और प्रामाणिक स्रोत उपलब्ध हैं, जिन्हें मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जा सकता है - साहित्यिक और पुरातात्विक:
1. मैगस्थनीज की 'इंडिका': यूनानी राजदूत मैगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। उसने पाटलिपुत्र के नगर प्रशासन, सैन्य व्यवस्था और भारतीय समाज का आँखों देखा वर्णन किया है। यद्यपि मूल ग्रंथ नष्ट हो गया है, पर बाद के यूनानी लेखकों के उद्धरणों में यह उपलब्ध है।
2. कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र': यह राजनीति, प्रशासन और कूटनीति पर लिखा गया एक महान ग्रंथ है। इससे मौर्यकालीन कर प्रणाली, गुप्तचर व्यवस्था, राजा के कर्तव्यों और कानून व्यवस्था की विस्तृत जानकारी मिलती है।
3. अशोक के अभिलेख: चट्टानों और पत्थर के स्तंभों पर खुदे अशोक के लेख सबसे प्रामाणिक स्रोत हैं। ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि में लिखे इन लेखों से अशोक के 'धम्म', साम्राज्य विस्तार, कलिंग युद्ध और जन-कल्याणकारी कार्यों का पता चलता है।
4. पुरातात्विक साक्ष्य: कुम्हरार (पटना) में मिले लकड़ी के राजमहल के अवशेष, चांदी और तांबे के आहत सिक्के, और उत्तरी काले पॉलिशदार मृदभांड (NBPW) उस काल की कला और भौतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
अथवा / OR
प्रश्न 20 (अथवा). प्राचीन भारतीय महाजनपदों की विशेषताओं का वर्णन कीजिये।
छठी शताब्दी ई.पू. में उदित हुए 16 महाजनपदों की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित थीं:
1. शासन प्रणाली: अधिकांश महाजनपदों पर राजा का शासन होता था (राजतंत्र), जैसे मगध और कोसल। लेकिन कुछ महाजनपद जैसे वज्जि और मल्ल 'गण' या 'संघ' थे, जहाँ लोगों का एक समूह शासन करता था (गणतंत्र)। इस समूह का हर व्यक्ति 'राजा' कहलाता था।
2. किलेबंद राजधानियाँ: प्रत्येक महाजनपद की एक राजधानी होती थी, जो अक्सर सुरक्षा के लिए ऊंची दीवारों (किलेबंदी) से घिरी होती थी। राजधानी सत्ता और प्रशासन का केंद्र होती थी।
3. स्थायी सेना: शासकों ने अब किसानों की भर्ती कर स्थायी सेना और नौकरशाही रखना शुरू कर दिया था। सैनिकों को नकद वेतन दिया जाने लगा था। इससे राज्य की शक्ति बढ़ी।
4. कर व्यवस्था: सेना और प्रशासन का खर्च चलाने के लिए राजा किसानों, व्यापारियों और शिल्पकारों से नियमित कर वसूलते थे। उपज का 1/6 भाग कर (भाग) के रूप में लिया जाता था।
5. धर्मशास्त्र: इसी समय ब्राह्मणों ने संस्कृत में धर्मसूत्रों की रचना की, जिनमें शासकों (जो सामान्यतः क्षत्रिय होते थे) और प्रजा के लिए नियम निर्धारित किए गए।
प्रश्न 21. 12 वीं सदी में कर्नाटक में प्रारंभ हुए नवीन भक्ति आन्दोलन का वर्णन कीजिए।
12वीं सदी में कर्नाटक में एक नवीन धार्मिक और सामाजिक आंदोलन का उदय हुआ जिसे 'वीरशैव' (शिव के वीर) या 'लिंगायत' (लिंग धारण करने वाले) परंपरा कहा जाता है। इसका नेतृत्व बासवन्ना (1106-68) ने किया, जो पहले कलचुरी राजा के दरबार में मंत्री थे। इसकी प्रमुख विशेषताएं थीं:
1. शिव की उपासना: वे शिव की उपासना 'लिंग' रूप में करते हैं। इस समुदाय के पुरुष अपने बाएं कंधे पर चांदी के डिब्बे में एक लघु लिंग को धारण करते हैं। वे मंदिरों में बड़े लिंग स्थापित नहीं करते।
2. जाति प्रथा का विरोध: उन्होंने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था और 'पवित्रता-अपवित्रता' की अवधारणा का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर के लिए सभी भक्त समान हैं, चाहे वे किसी भी जाति के हों। इससे निम्न जातियों के लोग बड़ी संख्या में इससे जुड़े।
3. सामाजिक सुधार: उन्होंने धर्मशास्त्रों में अमान्य माने जाने वाले रिवाजों जैसे विधवा विवाह और वयस्क विवाह को मान्यता दी। उन्होंने बाल विवाह का विरोध किया।
4. पुनर्जन्म का खंडन: लिंगायत मानते हैं कि मृत्यु के बाद भक्त शिव में लीन हो जाता है और इस संसार में वापस नहीं आता। इसलिए वे शवों को जलाते नहीं, बल्कि दफनाते हैं।
5. वचन साहित्य: उन्होंने अपने विचार जनभाषा कन्नड़ में 'वचनों' (कविताओं) के माध्यम से प्रचारित किए, जिससे यह आंदोलन बहुत लोकप्रिय हुआ।
अथवा / OR
प्रश्न 21 (अथवा). गुरुनानक देव ने समाज को क्या संदेश दिया? स्पष्ट कीजिये।
बाबा गुरु नानक (1469-1539) का जन्म तलवंडी (ननकाना साहिब) में हुआ था। उन्होंने भक्ति का एक सरल और व्यावहारिक मार्ग दिखाया। उनके संदेश निम्नलिखित थे:
1. निर्गुण भक्ति: उन्होंने मूर्ति पूजा का खंडन किया और निराकार ईश्वर (रब) की उपासना पर जोर दिया। उनका मानना था कि ईश्वर का कोई रूप या आकार नहीं है।
2. एक ओंकार: उनका मूल मंत्र था कि ईश्वर एक है। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के बाहरी आडंबरों, कर्मकांडों (यज्ञ, स्नान, कठोर तप) और धार्मिक कट्टरता को व्यर्थ बताया।
3. नाम सिमरन: उन्होंने ईश्वर के नाम का निरंतर जाप (सिमरन) करने और कीर्तन को ही मुक्ति का मार्ग बताया।
4. सामाजिक समानता: उन्होंने जाति-पाति और ऊंच-नीच का घोर विरोध किया। उन्होंने 'लंगर' (साझा रसोई) प्रथा शुरू की जहाँ सभी जाति और धर्म के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते थे, जिससे समानता की भावना बढ़ी।
5. गृहस्थ जीवन: उन्होंने संन्यास का विरोध किया और कहा कि गृहस्थ जीवन में रहकर, ईमानदारी से मेहनत (किरत) करके और मिल-बांटकर खाने (वंड छको) से भी ईश्वर को पाया जा सकता है।
प्रश्न 22. चरखे को राष्ट्रवाद का प्रतीक क्यों चुना गया? स्पष्ट कीजिये।
गांधीजी ने चरखे को भारतीय राष्ट्रवाद का एक शक्तिशाली प्रतीक बनाया, जिसके कई महत्वपूर्ण कारण थे:
1. आत्मनिर्भरता का प्रतीक: चरखा भारत की आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। यह विदेशी (ब्रिटिश) कपड़ों पर निर्भरता खत्म करने और स्वदेशी अपनाने का माध्यम था।
2. मशीनीकरण का विरोध: गांधीजी मशीनों के अंधाधुंध प्रयोग के खिलाफ थे क्योंकि इससे भारत के लाखों बुनकर और कारीगर बेरोजगार हो रहे थे। चरखा मानव श्रम की गरिमा को पुनर्स्थापित करता था और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देता था।
3. गरीबों से जुड़ाव: चरखा अमीरों और गरीबों के बीच की खाई को पाटने का साधन था। जब एक बड़ा वकील या नेता चरखा कातता था, तो वह शारीरिक श्रम करने वाले गरीब भारतीयों के साथ अपनी एकजुटता दिखाता था और श्रम के प्रति सम्मान प्रकट करता था।
4. आर्थिक मजबूती: इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलता था। यह किसानों और विशेषकर महिलाओं को घर बैठे पूरक आय और रोजगार का साधन प्रदान करता था।
इस प्रकार, चरखा केवल सूत कातने का औजार नहीं था, बल्कि यह ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ एक नैतिक, सामाजिक और आर्थिक हथियार था।
अथवा / OR
प्रश्न 22 (अथवा). महात्मा गांधी ने राष्ट्रीय आन्दोलन के स्वरुप को किस प्रकार बदल डाला? स्पष्ट कीजिए।
1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत आने के बाद गांधीजी ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा और दशा पूरी तरह बदल दी:
1. जन-आंदोलन बनाना: गांधीजी से पहले कांग्रेस मुख्य रूप से शहरी बुद्धिजीवियों और वकीलों की पार्टी थी। गांधीजी ने इसे गांवों तक पहुँचाया। उनके आह्वान पर किसान, मजदूर, छात्र और महिलाएं हजारों की संख्या में आंदोलन में शामिल हुए। यह 'एलीट' आंदोलन से 'मास मूवमेंट' बन गया।
2. सत्याग्रह और अहिंसा: उन्होंने विरोध का एक नया और अनोखा तरीका 'सत्याग्रह' दिया जो सत्य और अहिंसा पर आधारित था। उन्होंने सिखाया कि अन्याय के खिलाफ निडर होकर खड़े होना वीरों का काम है, कायरों का नहीं।
3. साधारण जीवन शैली: वे आम भारतीयों की तरह धोती पहनते थे और जनता की भाषा (हिन्दुस्तानी) बोलते थे, जबकि अन्य नेता पश्चिमी वेशभूषा में रहते थे। इससे आम लोग उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ गए और उन्हें अपना मसीहा मानने लगे।
4. रचनात्मक कार्य और समाज सुधार: उन्होंने केवल अंग्रेजों का विरोध नहीं किया, बल्कि भारतीय समाज की बुराइयों से भी लड़े। उन्होंने छुआछूत निवारण, हिंदू-मुस्लिम एकता, चरखा और महिला उत्थान जैसे रचनात्मक कार्यों को राजनीति का हिस्सा बनाया।
प्रश्न 23. मानचित्र कार्य (4 अंक)
भारत के मानचित्र पर दर्शाइए: (i) साँची, (ii) वाराणसी, (iii) धौलावीरा, (iv) लोथल
स्थानों की स्थिति:
  • 1. साँची: मध्य प्रदेश के मध्य भाग में (भोपाल के पास, रायसेन जिला)।
  • 2. वाराणसी: उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में (गंगा नदी के तट पर)।
  • 3. धौलावीरा: गुजरात के कच्छ के रण में (ऊपरी भाग)।
  • 4. लोथल: गुजरात में खंभात की खाड़ी के शीर्ष पर (अहमदाबाद के दक्षिण में)।
अथवा / OR
भारत के मानचित्र पर दर्शाइए: (i) कालीबंगन, (ii) अमरावती, (iii) दिल्ली, (iv) लखनऊ
स्थानों की स्थिति:
  • 1. कालीबंगन: राजस्थान के उत्तरी भाग में (हनुमानगढ़ जिला)।
  • 2. अमरावती: आंध्र प्रदेश में (कृष्णा नदी के पास, गुंटूर जिला)।
  • 3. दिल्ली: उत्तर भारत (हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर)।
  • 4. लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मध्य भाग में।
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यह Class 12 History Pre-Board Exam 2025–26 के प्रश्न पत्र पर आधारित Model Answers केवल शैक्षणिक एवं अभ्यास उद्देश्य से प्रकाशित किए गए हैं। यह किसी भी बोर्ड अथवा संस्था द्वारा जारी आधिकारिक उत्तर कुंजी नहीं है। वास्तविक बोर्ड परीक्षा में प्रश्नों की शब्द-रचना, क्रम एवं उत्तर लेखन शैली भिन्न हो सकती है।

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