Class 12 History Pre-Board Model Answer 2025–26 | कक्षा 12वीं इतिहास प्री-बोर्ड मॉडल आंसर
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कक्षा 12वीं इतिहास (History) की प्री-बोर्ड परीक्षा 2025–26 आयोजित हो चुकी है। परीक्षा के बाद विद्यार्थियों को अपने उत्तरों का मिलान (Answer Checking), Answer Writing Style सुधारने और Board Exam 2026 की बेहतर तैयारी के लिए यह ब्लॉग पोस्ट तैयार की गई है।
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प्री-बोर्ड परीक्षा 2026
कक्षा 12वीं - इतिहास (History)
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(ii) अजंता → (घ) महाराष्ट्र
(iii) बासवन्ना → (क) वीर शैव
(iv) बाबर → (छ) बाबरनामा
(v) इस्तमरारी बंदोबस्त → (ग) कार्नवालिस
(vi) पूर्ण स्वराज → (ड.) लाहौर अधिवेशन
(vii) प्रारूप समिति → (च) डॉ. अम्बेडकर
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(2) पशुपति शिव (आद्य शिव) की पूजा: मुहरों पर एक योगी की मुद्रा में पुरुष का चित्र मिला है जिसके चारों ओर जानवर हैं।
(2) दरबार में एक ब्रिटिश 'रेजीडेंट' (प्रतिनिधि) रखना अनिवार्य था, जिसके माध्यम से अंग्रेज आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते थे।
1. लाला लाजपत राय (पंजाब)
2. बाल गंगाधर तिलक (महाराष्ट्र)
3. विपिन चन्द्र पाल (बंगाल)।
(1) गांधीजी सविनय अवज्ञा आन्दोलन स्थगित करेंगे और दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेंगे।
(2) सरकार उन राजनीतिक कैदियों को रिहा करेगी जिन पर हिंसा का आरोप नहीं है और तटीय इलाकों में नमक बनाने की छूट देगी।
(1) भारत विभाजन के कारण हुए भीषण सांप्रदायिक दंगे और लाखों शरणार्थियों का पुनर्वास।
(2) लगभग 562 देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल कर देश का एकीकरण करना और उन्हें टूटने से बचाना।
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1. ग्रिड पद्धति: सड़कें और गलियाँ एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिससे शहर आयताकार खंडों में बंटा था।
2. नगर विभाजन: शहर स्पष्ट रूप से दो भागों में बंटा था - पश्चिमी भाग 'दुर्ग' (जो ऊँचाई पर था) और पूर्वी भाग 'निचला शहर' (जो आवासीय था)।
3. जल निकासी: यहाँ की जल निकासी व्यवस्था अद्भुत थी। नालियां पक्की ईंटों से बनी और ढकी हुई थीं। घरों का गंदा पानी पहले एक हौदी में जाता था, फिर मुख्य नाली में।
4. ईंटें: मकानों और सड़कों में एक निश्चित अनुपात (4:2:1) की पक्की ईंटों का प्रयोग किया गया था।
1. मेसोपोटामिया: वहाँ के लेखों में हड़प्पा क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' शब्द का प्रयोग हुआ है। हड़प्पाई मुहरें, बाट और कार्नेलियन मनके मेसोपोटामिया में मिले हैं।
2. ओमान: यहाँ से तांबा मंगाया जाता था। रासायनिक विश्लेषण में ओमानी तांबे और हड़प्पाई पुरावस्तुओं में निकल के अंश मिले हैं जो दोनों के संपर्क को दर्शाते हैं।
3. बहरीन: मेसोपोटामिया के लेखों में इसे 'दिलमुन' कहा गया है जो व्यापार का मध्यस्थ केंद्र था।
मुहरों पर जहाजों और नावों के चित्र यह बताते हैं कि यह व्यापार समुद्री मार्ग से होता था।
2. संस्थापक: नियतिवाद के प्रमुख आचार्य 'मक्खलि गोसाल' थे, जबकि भौतिकवाद के प्रमुख दार्शनिक 'अजित केशकम्बल' थे।
3. कर्म और दान: नियतिवादी मानते थे कि दान, पुण्य या तप से भाग्य को घटाया-बढ़ाया नहीं जा सकता। भौतिकवादी दान और यज्ञ को मूर्खतापूर्ण मानते थे क्योंकि मृत्यु के बाद शरीर नष्ट हो जाता है और कुछ शेष नहीं रहता।
1. गोपुरम: मंदिरों के प्रवेश द्वार, जिन्हें 'गोपुरम' कहा जाता था, बहुत विशाल और ऊँचे होते थे। ये अक्सर मुख्य मंदिर के शिखर से भी बड़े होते थे और राजकीय सत्ता के प्रतीक थे (जैसे विरूपाक्ष मंदिर का गोपुरम)।
2. मंडप: मंदिरों में लंबे स्तंभों वाले गलियारे और 'कल्याण मंडप' (विवाह हॉल) बनाए जाते थे, जहाँ देवताओं के विवाह उत्सव मनाए जाते थे।
3. रथ मंदिर: विट्ठल मंदिर परिसर में पत्थर से बना एक शानदार रथ है, जो इसकी वास्तुकला का अद्भुत नमूना है।
4. सभागार: देवताओं के झूला झूलने, संगीत, नृत्य और नाटकों के लिए विशेष सभागार होते थे।
1. यहाँ के बाजारों में दुनिया की हर चीज मिलती थी।
2. शाम को बाज़ार में लोगों की भारी भीड़ होती थी।
3. यहाँ हीरे, मोती, माणिक्य, रेशम जैसी कीमती वस्तुओं से लेकर आम उपभोग की वस्तुएं जैसे चावल, गेहूँ, और फल (अंगूर, संतरा, नींबू) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध थे।
4. कीमतें बहुत कम थीं और खाद्य सामग्री की कोई कमी नहीं थी। यह वर्णन शहर की अपार समृद्धि को दर्शाता है।
1. साझी घोषणाएँ: विद्रोही नेताओं द्वारा जारी घोषणाएं हिंदू और मुस्लिम दोनों भाषाओं में होती थीं और दोनों की भावनाओं का ध्यान रखा जाता था।
2. साझा शत्रु: अंग्रेजों को दोनों धर्मों (दीन और धर्म) का शत्रु बताया गया। यह अपील की गई कि यह लड़ाई दोनों को बचाने के लिए है।
3. धार्मिक सौहार्द: विद्रोह के दौरान हिंदुओं की भावनाओं का ख्याल रखते हुए बहादुर शाह जफर ने गोहत्या पर रोक लगा दी थी।
4. कारतूस का मुद्दा: गाय और सुअर की चर्बी वाले कारतूसों ने दोनों समुदायों को अंग्रेजों के खिलाफ एक मंच पर ला खड़ा किया।
2. कुंवर सिंह (बिहार): आरा (जगदीशपुर) के 80 वर्षीय जमींदार थे। वृद्ध होने के बावजूद उन्होंने अपनी छापामार युद्ध नीति से अंग्रेजों को कई बार हराया और गंगा पार करते समय अपना हाथ काटकर अर्पित कर दिया।
3. नाना साहब (कानपुर): अंतिम पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र थे। अंग्रेजों ने उनकी पेंशन बंद कर दी थी। उन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व किया और सिपाहियों को संगठित कर अंग्रेजों को खदेड़ दिया।
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1. मैगस्थनीज की 'इंडिका': यूनानी राजदूत मैगस्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। उसने पाटलिपुत्र के नगर प्रशासन, सैन्य व्यवस्था और भारतीय समाज का आँखों देखा वर्णन किया है। यद्यपि मूल ग्रंथ नष्ट हो गया है, पर बाद के यूनानी लेखकों के उद्धरणों में यह उपलब्ध है।
2. कौटिल्य का 'अर्थशास्त्र': यह राजनीति, प्रशासन और कूटनीति पर लिखा गया एक महान ग्रंथ है। इससे मौर्यकालीन कर प्रणाली, गुप्तचर व्यवस्था, राजा के कर्तव्यों और कानून व्यवस्था की विस्तृत जानकारी मिलती है।
3. अशोक के अभिलेख: चट्टानों और पत्थर के स्तंभों पर खुदे अशोक के लेख सबसे प्रामाणिक स्रोत हैं। ब्राह्मी और खरोष्ठी लिपि में लिखे इन लेखों से अशोक के 'धम्म', साम्राज्य विस्तार, कलिंग युद्ध और जन-कल्याणकारी कार्यों का पता चलता है।
4. पुरातात्विक साक्ष्य: कुम्हरार (पटना) में मिले लकड़ी के राजमहल के अवशेष, चांदी और तांबे के आहत सिक्के, और उत्तरी काले पॉलिशदार मृदभांड (NBPW) उस काल की कला और भौतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
1. शासन प्रणाली: अधिकांश महाजनपदों पर राजा का शासन होता था (राजतंत्र), जैसे मगध और कोसल। लेकिन कुछ महाजनपद जैसे वज्जि और मल्ल 'गण' या 'संघ' थे, जहाँ लोगों का एक समूह शासन करता था (गणतंत्र)। इस समूह का हर व्यक्ति 'राजा' कहलाता था।
2. किलेबंद राजधानियाँ: प्रत्येक महाजनपद की एक राजधानी होती थी, जो अक्सर सुरक्षा के लिए ऊंची दीवारों (किलेबंदी) से घिरी होती थी। राजधानी सत्ता और प्रशासन का केंद्र होती थी।
3. स्थायी सेना: शासकों ने अब किसानों की भर्ती कर स्थायी सेना और नौकरशाही रखना शुरू कर दिया था। सैनिकों को नकद वेतन दिया जाने लगा था। इससे राज्य की शक्ति बढ़ी।
4. कर व्यवस्था: सेना और प्रशासन का खर्च चलाने के लिए राजा किसानों, व्यापारियों और शिल्पकारों से नियमित कर वसूलते थे। उपज का 1/6 भाग कर (भाग) के रूप में लिया जाता था।
5. धर्मशास्त्र: इसी समय ब्राह्मणों ने संस्कृत में धर्मसूत्रों की रचना की, जिनमें शासकों (जो सामान्यतः क्षत्रिय होते थे) और प्रजा के लिए नियम निर्धारित किए गए।
1. शिव की उपासना: वे शिव की उपासना 'लिंग' रूप में करते हैं। इस समुदाय के पुरुष अपने बाएं कंधे पर चांदी के डिब्बे में एक लघु लिंग को धारण करते हैं। वे मंदिरों में बड़े लिंग स्थापित नहीं करते।
2. जाति प्रथा का विरोध: उन्होंने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था और 'पवित्रता-अपवित्रता' की अवधारणा का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर के लिए सभी भक्त समान हैं, चाहे वे किसी भी जाति के हों। इससे निम्न जातियों के लोग बड़ी संख्या में इससे जुड़े।
3. सामाजिक सुधार: उन्होंने धर्मशास्त्रों में अमान्य माने जाने वाले रिवाजों जैसे विधवा विवाह और वयस्क विवाह को मान्यता दी। उन्होंने बाल विवाह का विरोध किया।
4. पुनर्जन्म का खंडन: लिंगायत मानते हैं कि मृत्यु के बाद भक्त शिव में लीन हो जाता है और इस संसार में वापस नहीं आता। इसलिए वे शवों को जलाते नहीं, बल्कि दफनाते हैं।
5. वचन साहित्य: उन्होंने अपने विचार जनभाषा कन्नड़ में 'वचनों' (कविताओं) के माध्यम से प्रचारित किए, जिससे यह आंदोलन बहुत लोकप्रिय हुआ।
1. निर्गुण भक्ति: उन्होंने मूर्ति पूजा का खंडन किया और निराकार ईश्वर (रब) की उपासना पर जोर दिया। उनका मानना था कि ईश्वर का कोई रूप या आकार नहीं है।
2. एक ओंकार: उनका मूल मंत्र था कि ईश्वर एक है। उन्होंने हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के बाहरी आडंबरों, कर्मकांडों (यज्ञ, स्नान, कठोर तप) और धार्मिक कट्टरता को व्यर्थ बताया।
3. नाम सिमरन: उन्होंने ईश्वर के नाम का निरंतर जाप (सिमरन) करने और कीर्तन को ही मुक्ति का मार्ग बताया।
4. सामाजिक समानता: उन्होंने जाति-पाति और ऊंच-नीच का घोर विरोध किया। उन्होंने 'लंगर' (साझा रसोई) प्रथा शुरू की जहाँ सभी जाति और धर्म के लोग एक साथ बैठकर भोजन करते थे, जिससे समानता की भावना बढ़ी।
5. गृहस्थ जीवन: उन्होंने संन्यास का विरोध किया और कहा कि गृहस्थ जीवन में रहकर, ईमानदारी से मेहनत (किरत) करके और मिल-बांटकर खाने (वंड छको) से भी ईश्वर को पाया जा सकता है।
1. आत्मनिर्भरता का प्रतीक: चरखा भारत की आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक था। यह विदेशी (ब्रिटिश) कपड़ों पर निर्भरता खत्म करने और स्वदेशी अपनाने का माध्यम था।
2. मशीनीकरण का विरोध: गांधीजी मशीनों के अंधाधुंध प्रयोग के खिलाफ थे क्योंकि इससे भारत के लाखों बुनकर और कारीगर बेरोजगार हो रहे थे। चरखा मानव श्रम की गरिमा को पुनर्स्थापित करता था और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देता था।
3. गरीबों से जुड़ाव: चरखा अमीरों और गरीबों के बीच की खाई को पाटने का साधन था। जब एक बड़ा वकील या नेता चरखा कातता था, तो वह शारीरिक श्रम करने वाले गरीब भारतीयों के साथ अपनी एकजुटता दिखाता था और श्रम के प्रति सम्मान प्रकट करता था।
4. आर्थिक मजबूती: इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलता था। यह किसानों और विशेषकर महिलाओं को घर बैठे पूरक आय और रोजगार का साधन प्रदान करता था।
इस प्रकार, चरखा केवल सूत कातने का औजार नहीं था, बल्कि यह ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ एक नैतिक, सामाजिक और आर्थिक हथियार था।
1. जन-आंदोलन बनाना: गांधीजी से पहले कांग्रेस मुख्य रूप से शहरी बुद्धिजीवियों और वकीलों की पार्टी थी। गांधीजी ने इसे गांवों तक पहुँचाया। उनके आह्वान पर किसान, मजदूर, छात्र और महिलाएं हजारों की संख्या में आंदोलन में शामिल हुए। यह 'एलीट' आंदोलन से 'मास मूवमेंट' बन गया।
2. सत्याग्रह और अहिंसा: उन्होंने विरोध का एक नया और अनोखा तरीका 'सत्याग्रह' दिया जो सत्य और अहिंसा पर आधारित था। उन्होंने सिखाया कि अन्याय के खिलाफ निडर होकर खड़े होना वीरों का काम है, कायरों का नहीं।
3. साधारण जीवन शैली: वे आम भारतीयों की तरह धोती पहनते थे और जनता की भाषा (हिन्दुस्तानी) बोलते थे, जबकि अन्य नेता पश्चिमी वेशभूषा में रहते थे। इससे आम लोग उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ गए और उन्हें अपना मसीहा मानने लगे।
4. रचनात्मक कार्य और समाज सुधार: उन्होंने केवल अंग्रेजों का विरोध नहीं किया, बल्कि भारतीय समाज की बुराइयों से भी लड़े। उन्होंने छुआछूत निवारण, हिंदू-मुस्लिम एकता, चरखा और महिला उत्थान जैसे रचनात्मक कार्यों को राजनीति का हिस्सा बनाया।
- 1. साँची: मध्य प्रदेश के मध्य भाग में (भोपाल के पास, रायसेन जिला)।
- 2. वाराणसी: उत्तर प्रदेश के पूर्वी भाग में (गंगा नदी के तट पर)।
- 3. धौलावीरा: गुजरात के कच्छ के रण में (ऊपरी भाग)।
- 4. लोथल: गुजरात में खंभात की खाड़ी के शीर्ष पर (अहमदाबाद के दक्षिण में)।
- 1. कालीबंगन: राजस्थान के उत्तरी भाग में (हनुमानगढ़ जिला)।
- 2. अमरावती: आंध्र प्रदेश में (कृष्णा नदी के पास, गुंटूर जिला)।
- 3. दिल्ली: उत्तर भारत (हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सीमा पर)।
- 4. लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मध्य भाग में।
यह प्रश्नों के उत्तर (Model Answer) केवल अध्ययन एवं अभ्यास हेतु हैं। ये MP Board के आधिकारिक उत्तर नहीं हैं। किसी भी त्रुटि की स्थिति में अपने विषय शिक्षक या निर्धारित पाठ्यपुस्तक से जानकारी अवश्य जाँचें।
⚠️ Disclaimer (अस्वीकरण)
यह Class 12 History Pre-Board Exam 2025–26 के प्रश्न पत्र पर आधारित Model Answers केवल शैक्षणिक एवं अभ्यास उद्देश्य से प्रकाशित किए गए हैं। यह किसी भी बोर्ड अथवा संस्था द्वारा जारी आधिकारिक उत्तर कुंजी नहीं है। वास्तविक बोर्ड परीक्षा में प्रश्नों की शब्द-रचना, क्रम एवं उत्तर लेखन शैली भिन्न हो सकती है।
MP EDUCATION GYAN DEEP किसी भी आधिकारिक बोर्ड अथॉरिटी का प्रतिनिधित्व नहीं करता।
यह ब्लॉग पोस्ट Class 12 History Pre-Board Model Answer 2025–26 के लिए एक Complete Post-Exam Analysis & Revision Resource है।
यदि विद्यार्थी इन Model Answers के माध्यम से नियमित अभ्यास करते हैं, तो वे Board Exam 2026 में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
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