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MP Board Class 10th Science Half Yearly Syllabus 2026-27: कक्षा 10 विज्ञान अर्द्धवार्षिक परीक्षा सम्पूर्ण पाठ्यक्रम

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लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मध्यप्रदेश शैक्षणिक कैलेण्डर 2026-27 (माह नवंबर तक) पर आधारित प्रामाणिक पाठ्यक्रम

महत्वपूर्ण सूचना: माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश (MPBSE) एवं लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) द्वारा जारी शैक्षणिक कैलेण्डर सत्र 2026-27 के अनुसार कक्षा 10वीं विज्ञान (Science) की अर्द्धवार्षिक परीक्षा में माह नवंबर 2026 तक निर्धारित सम्पूर्ण पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाएंगे। MP Education Gyan Deep पर यहाँ रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, भौतिकी एवं पर्यावरण के सभी 10 निर्धारित अध्यायों तथा NCERT प्रयोगशाला नियमावली आधारित प्रायोगिक कार्यों का संपूर्ण व विस्तृत विवरण प्रस्तुत है।

मध्यप्रदेश बोर्ड कक्षा 10वीं हाईस्कूल के सभी प्रिय विद्यार्थियों एवं शिक्षक साथियों का MP Education Gyan Deep पर हार्दिक स्वागत है। कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा में विज्ञान एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रोचक विषय है। विज्ञान विषय में 75 में से 75 अंक प्राप्त करने के लिए रासायनिक समीकरणों के संतुलन, जीव विज्ञान के सुस्पष्ट नामांकित रेखाचित्रों (Diagrams), भौतिकी के किरण आरेखों व आंकिक प्रश्नों तथा NCERT आधारित प्रायोगिक परीक्षणों की चरणबद्ध समझ होना आवश्यक है। शैक्षणिक कैलेण्डर सत्र 2026-27 अनुसार नवंबर माह तक के सम्पूर्ण सैद्धांतिक व प्रायोगिक पाठ्यक्रम का व्यवस्थित विवरण नीचे दिया गया है।

पाठ्यक्रम का संक्षिप्त विवरण (Unit-wise Overview)

क्र. शाखा / इकाई सम्मिलित अध्याय (माह नवंबर 2026 तक) प्रायोगिक कार्य (NCERT आधारित)
1 रासायनिक पदार्थ: प्रकृति एवं व्यवहार
(Chemistry)
अध्याय 1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण
अध्याय 2: अम्ल, क्षारक एवं लवण
अध्याय 3: धातु एवं अधातु
अध्याय 4: कार्बन एवं उसके यौगिक
pH मान निर्धारण, अम्ल-क्षार रासायनिक परीक्षण, साबुन की सफाई क्षमता का तुलनात्मक अध्ययन
2 जैव जगत
(Biology)
अध्याय 5: जैव प्रक्रम
अध्याय 6: नियंत्रण एवं समन्वय
अध्याय 7: जीव जनन कैसे करते हैं?
अध्याय 8: आनुवंशिकता
पत्ती की झिल्ली में रंध्र अध्ययन, श्वसन में CO₂ उत्सर्जन का प्रदर्शन, गुड़हल पुष्प के विभिन्न अंगों का अध्ययन
3 प्राकृतिक घटनाएँ
(Physics)
अध्याय 9: प्रकाश - परावर्तन तथा अपवर्तन
अध्याय 10: मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार
कांच के गुटके से अपवर्तन, प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन, समतल दर्पण द्वारा परावर्तन नियम सत्यापन
4 विद्युत धारा का प्रभाव (प्रायोगिक)
(Physics Practical)
विद्युत धारा एवं विभवान्तर संकल्पना ओम का नियम: विभवान्तर (V) व धारा (I) में संबंध एवं V-I ग्राफ द्वारा प्रतिरोध ज्ञात करना
5 पर्यावरण
(Environmental Science)
अध्याय 13: हमारा पर्यावरण पारितंत्र, आहार श्रृंखला एवं जैव आवर्धन अध्ययन
6 आंतरिक मूल्यांकन मासिक परीक्षा प्राप्तांक, प्रायोगिक फाइल एवं प्रोजेक्ट (25 अंक) प्रायोगिक मौखिक परीक्षा (Viva-voce) व नोटबुक प्रस्तुतीकरण

अध्यायवार विस्तृत सैद्धांतिक पाठ्यक्रम (Theory Syllabus)

1. रसायन विज्ञान (Chemical Substances: Nature and Behaviour)

  • अध्याय-1: रासायनिक अभिक्रियाएँ एवं समीकरण: रासायनिक परिवर्तन के लक्षण, रासायनिक समीकरण का लेखन एवं द्रव्यमान संरक्षण नियम के आधार पर संतुलन (Hit and Trial विधि), अभिक्रियाओं के प्रकार (संयोजन, वियोजन / अपघटन - ऊष्मीय, प्रकाशीय व विद्युत अपघटन, विस्थापन, द्विविस्थापन, उपचयन एवं अपचयन / रेडॉक्स अभिक्रियाएँ), ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ, दैनिक जीवन में उपचयन का प्रभाव (संक्षारण एवं विकृतगंधिता तथा उनसे बचाव)।
  • अध्याय-2: अम्ल, क्षारक एवं लवण: अम्ल व क्षारक की रासायनिक विशेषताएं, सूचक (प्राकृतिक, संश्लेषित एवं गंधीय सूचक), अम्ल व क्षारक की धातुओं, धातु कार्बोनेट व धातु हाइड्रोजनकार्बोनेट के साथ अभिक्रिया, उदासीनीकरण अभिक्रिया, जलीय विलयन में अम्ल व क्षारक (H⁺ एवं OH⁻ आयनों का निर्माण), pH पैमाना एवं दैनिक जीवन में pH का महत्व, महत्वपूर्ण लवणों का निर्माण व उपयोग (साधारण नमक, सोडियम हाइड्रॉक्साइड - क्लोर-क्षार प्रक्रिया, विरंजक चूर्ण, बेकिंग सोडा, धोने का सोडा, प्लास्टर ऑफ पेरिस एवं क्रिस्टलन का जल)।
  • अध्याय-3: धातु एवं अधातु: धातुओं एवं अधातुओं के भौतिक व रासायनिक गुणधर्म, धातुओं की वायु, जल, अम्ल एवं लवण विलयनों के साथ अभिक्रिया, सक्रियता श्रेणी (Reactivity Series), आयनिक यौगिकों का निर्माण (इलेक्ट्रॉन स्थानांतरण) एवं उनके सामान्य गुणधर्म (गलनांक, क्वथनांक, विलेयता, विद्युत चालकता), धातुकर्म के मूलभूत चरण (खनिज, अयस्क, गैंग, भर्जन, निस्तापन, अपचयन एवं शोधन), संक्षारण से सुरक्षा के उपाय (यशदलेपन, एनोडीकरण, मिश्रातु)।
  • अध्याय-4: कार्बन एवं उसके यौगिक: कार्बन में सहसंयोजी आबंधन, कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति (श्रृंखलन एवं चतुःसंयोजकता), संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन), विषम परमाणु एवं प्रकार्यात्मक समूह (-OH, -CHO, >C=O, -COOH, हैलोजन), सजातीय श्रेणी (Homologous Series), नामकरण की आधारभूत पद्धति, कार्बनिक यौगिकों के रासायनिक गुण (दहन, ऑक्सीकरण, संकलन / हाइड्रोजनीकरण एवं प्रतिस्थापन अभिक्रिया), कुछ प्रमुख कार्बनिक यौगिक (एथेनॉल एवं एथेनोइक अम्ल के भौतिक व रासायनिक गुणधर्म), साबुन और अपमार्जक (मिसेल की संरचना एवं साबुन की सफाई क्रियाविधि)।

2. जीव विज्ञान (World of Living)

  • अध्याय-5: जैव प्रक्रम (Life Processes):
    • पोषण: स्वपोषी पोषण (प्रकाश संश्लेषण की घटनाएँ, रंध्रों का खुलना व बंद होना) तथा विषमपोषी पोषण (अमीबा में पोषण, मानव पाचन तंत्र की संरचना एवं पाचक एंजाइमों की क्रियाविधि)।
    • श्वसन: विभिन्न पथों द्वारा ग्लूकोज का विखंडन (वायवीय एवं अवायवीय श्वसन), मानव श्वसन तंत्र की संरचना एवं गैसीय विनिमय प्रक्रिया।
    • वहन: मानव में परिसंचरण तंत्र (हृदय की आंतरिक संरचना, दोहरा परिसंचरण, रक्त दाब, लसिका), पादपों में परिवहन (जाइलम द्वारा जल-खनिज तथा फ्लोएम द्वारा भोजन का स्थानांतरण)।
    • उत्सर्जन: मानव उत्सर्जन तंत्र (वृक्क, वृक्काणु / नेफ्रॉन की संरचना एवं मूत्र निर्माण की क्रियाविधि), पादपों में उत्सर्जन विधियाँ।
  • अध्याय-6: नियंत्रण एवं समन्वय: जंतु तंत्रिका तंत्र (तंत्रिका कोशिका / न्यूरॉन की संरचना, सिनेप्स, प्रतिवर्ती चाप एवं प्रतिवर्ती क्रिया), मानव मस्तिष्क (अग्र, मध्य एवं पश्च मस्तिष्क के कार्य), अंतःस्रावी ग्रंथियाँ एवं उनसे स्रावित हॉर्मोन (थायरॉक्सिन, वृद्धि हॉर्मोन, इंसुलिन, टेस्टोस्टेरोन, एस्ट्रोजन, एड्रिनलिन), पादपों में समन्वय (अनुवर्तन गतियाँ - प्रकाशानुवर्तन, गुरुत्वानुवर्तन, जलानुवर्तन, रसायनानुवर्तन एवं पादप हॉर्मोन - ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन, एब्सिसिक अम्ल)।
  • अध्याय-7: जीव जनन कैसे करते हैं?: जनन का महत्व एवं DNA प्रतिकृति की भूमिका, अलैंगिक जनन की विधियाँ (विखंडन, मुकुलन, बीजाणु समासंघ, पुनरुद्भवन, खंडन, कायिक प्रवर्धन एवं ऊतक संवर्धन), पुष्पी पौधों में लैंगिक जनन (पुष्प की संरचना, परागण, निषेचन, बीज निर्माण), मानव में लैंगिक जनन (नर एवं मादा जनन तंत्र की संरचना, यौवनारंभ के परिवर्तन, मासिक धर्म चक्र), जनन स्वास्थ्य (गर्भनिरोधक युक्तियाँ, यौन संचारित रोग - STDs)।
  • अध्याय-8: आनुवंशिकता: जनन के दौरान विभिन्नताओं का संचयन, वंशागति के नियम (ग्रेगर जॉन मेंडल का योगदान - एकसंकर संकरण 3:1 एवं द्विसंकर संकरण 9:3:3:1), लक्षण किस प्रकार अभिव्यक्त होते हैं?, मानव में लिंग निर्धारण की क्रियाविधि (XX एवं XY गुणसूत्र)।

3. भौतिक विज्ञान एवं पर्यावरण (Physics & Environment)

  • अध्याय-9: प्रकाश - परावर्तन तथा अपवर्तन: प्रकाश का परावर्तन (नियम, समतल व गोलीय दर्पण), अवतल एवं उत्तल दर्पणों द्वारा प्रतिबिंब निर्माण, दर्पण सूत्र (1/v + 1/u = 1/f) एवं आवर्धन, प्रकाश का अपवर्तन (नियम, स्नेल का नियम, अपवर्तनांक), कांच के आयताकार स्लैब से अपवर्तन, गोलीय लेंसों (उत्तल व अवतल) द्वारा प्रतिबिंब निर्माण, लेंस सूत्र (1/v - 1/u = 1/f), आवर्धन एवं लेंस की क्षमता (P = 1/f)।
  • अध्याय-10: मानव नेत्र तथा रंगबिरंगा संसार: मानव नेत्र की संरचना एवं कार्यप्रणाली (समंजन क्षमता), दृष्टि दोष तथा उनका संशोधन (निकट-दृष्टि दोष / मायोपिया, दीर्घ-दृष्टि दोष / हाइपरमेट्रोपिया, जरा-दूरदृष्टिता), कांच के प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का अपवर्तन एवं विक्षेपण (स्पेक्ट्रम), वायुमंडलीय अपवर्तन (तारों का टिमटिमाना, अग्रिम सूर्योदय व विलंबित सूर्यास्त), प्रकाश का प्रकीर्णन एवं टिंडल प्रभाव (स्वच्छ आकाश का नीला रंग, सूर्योदय व सूर्यास्त के समय लालिमा)।
  • अध्याय-13: हमारा पर्यावरण: पारितंत्र क्या है? (जैविक एवं अजैविक घटक), उत्पादक, उपभोक्ता एवं अपघटक, आहार श्रृंखला एवं आहार जाल (खाद्य जाल), ऊर्जा का प्रवाह (10 प्रतिशत का नियम), जैव आवर्धन (Biological Magnification), मानव क्रियाकलापों का पर्यावरण पर प्रभाव (ओजोन परत का अपक्षय एवं CFCs, कचरा प्रबंधन - जैव निम्नीकरणीय एवं अजैव निम्नीकरणीय अपशिष्ट)।

प्रायोगिक कार्य: NCERT प्रयोगशाला नियमावली आधारित विस्तृत विवरण

शैक्षणिक कैलेण्डर सत्र 2026-27 के अनुसार नवंबर माह तक प्रयोगशाला में निम्नलिखित प्रयोगों का चरणबद्ध अभ्यास किया जाना अनिवार्य है:

1. पत्ती की बाह्यत्वचीय झिल्ली (Peel) की अस्थायी स्लाइड बनाकर रंध्रों (Stomata) का अध्ययन:

  • सिद्धांत व विधि: रियो (Rhoeo) अथवा ट्रेडेस्कैंशिया की पत्ती की निचली सतह से एपिडर्मल झिल्ली उतारकर सैफ्रानिन रंजक से अभिरंजित करना, ग्लिसरीन में माउंट कर कवरस्लिप लगाना।
  • अवलोकन: सूक्ष्मदर्शी में द्वार कोशिकाएँ (Guard Cells), रंध्री छिद्र एवं सहायक कोशिकाएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं। द्वार कोशिकाओं के स्फीत (Turgid) होने पर रंध्र खुलते हैं एवं शिथिल (Flaccid) होने पर बंद होते हैं।

2. प्रयोग द्वारा सिद्ध करना कि श्वसन क्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) गैस उत्सर्जित होती है:

  • सिद्धांत व विधि: एक वायु-रुद्ध शंक्वाकार फ्लास्क में अंकुरित होते चने या मूंग के बीज लेना। फ्लास्क के भीतर एक छोटी परखनली में KOH (पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड) का विलयन लटकाना जो उत्पन्न CO₂ को अवशोषित करता है। फ्लास्क में लगी मुड़ी हुई U-नली का दूसरा सिरा बीकर के पानी में डुबोना।
  • अवलोकन एवं निष्कर्ष: फ्लास्क में CO₂ अवशोषित होने से आंशिक निर्वात बनता है, जिससे कांच की नली में जल का स्तर ऊपर चढ़ जाता है। यह सिद्ध करता है कि अंकुरित बीज श्वसन में CO₂ गैस छोड़ते हैं।

3. गुड़हल (Hibiscus) पुष्प के विभिन्न भागों का विच्छेदन एवं अध्ययन:

  • चारों चक्रों का अवलोकन: (i) बाह्यदलपुंज (Calyx - हरे रंग के सुरक्षात्मक पत्र), (ii) दलपुंज (Corolla - आकर्षक रंगीन पंखुड़ियाँ), (iii) पुंकेसर (Androecium - तंतु एवं परागकोष से युक्त नर जननांग), (iv) स्त्रीकेसर (Gynoecium - वर्तिकाग्र, वर्तिका एवं अंडाशय से युक्त मादा जननांग)। ब्लेड से अंडाशय की अनुप्रस्थ काट काटकर बीजांडों (Ovules) का प्रदर्शन।

4. आयताकार कांच के गुटके (Glass Slab) द्वारा प्रकाश के अपवर्तन का अध्ययन:

  • सिद्धांत व विधि: ड्रॉइंग बोर्ड पर सफेद कागज पर कांच की स्लैब रखकर पिनों की सहायता से आपतित किरण का मार्ग खींचना। आपतन कोण (i), अपवर्तन कोण (r) तथा निर्गत कोण (e) को चांदी (Protractor) से मापना।
  • निष्कर्ष: आपतित किरण और निर्गत किरण एक-दूसरे के समांतर होती हैं (अर्थात् कोण i = कोण e), तथा दोनों के बीच का लंबवत विस्थापन 'पाश्विक विस्थापन' (Lateral Displacement) कहलाता है।

5. कांच के त्रिकोणीय प्रिज्म से होकर प्रकाश किरण का मार्ग खींचना एवं विचलन कोण ज्ञात करना:

  • विधि व परिणाम: प्रिज्म के अपवर्तक पृष्ठ पर आपतित किरण खींचकर पिन लगाना एवं दूसरे पृष्ठ से देखकर निर्गत किरण प्राप्त करना। आपतित किरण को आगे तथा निर्गत किरण को पीछे बढ़ाने पर उनके मध्य बनने वाले विचलन कोण (Angle of Deviation, D) का मापन करना।

6. समतल दर्पण द्वारा प्रकाश के परावर्तन के नियमों का सत्यापन:

  • सत्यापन: समतल दर्पण पर अभिलंब खींचकर विभिन्न कोणों (30°, 45°, 60°) पर पिनों द्वारा आपतन कोण (i) एवं परावर्तन कोण (r) को मापना। परिणामतः आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर प्राप्त होता है (∠i = ∠r)।

7. pH पत्र / सार्वत्रिक सूचक (Universal Indicator) द्वारा विभिन्न विलयनों का pH ज्ञात करना:

  • नमूने एवं मानक रंग मिलान:
    • तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl): लाल रंग, pH ≈ 1 (प्रबल अम्ल)
    • तनु सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH): गहरा नीला/बैंगनी रंग, pH ≈ 13-14 (प्रबल क्षार)
    • तनु एथेनोइक अम्ल (CH₃COOH): नारंगी-पीला रंग, pH ≈ 3-4 (दुर्बल अम्ल)
    • नींबू का रस: गुलाबी-लाल रंग, pH ≈ 2.2-2.4 (अम्लीय)
    • आसुत जल (H₂O): हरा रंग, pH = 7 (उदासीन)
    • तनु सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃): हल्का नीला रंग, pH ≈ 8.5 (दुर्बल क्षार)

8. तनु HCl एवं तनु NaOH के रासायनिक गुणों का तुलनात्मक अध्ययन:

  • लिटमस विलयन के साथ: HCl नीले लिटमस को लाल करता है; NaOH लाल लिटमस को नीला करता है।
  • जिंक धातु (Zn) के साथ: दोनों ही अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस (H₂) मुक्त करते हैं, जो जलती हुई तीली ले जाने पर 'पॉप' (Pop Sound) ध्वनि के साथ जलती है।
    Zn + 2HCl → ZnCl₂ + H₂↑
    Zn + 2NaOH → Na₂ZnO₂ (सोडियम जिंकेट) + H₂↑
  • सोडियम बाइकार्बोनेट (NaHCO₃) के साथ: HCl तीव्र बुदबुदाहट के साथ CO₂ गैस निकालता है (जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है), जबकि NaOH इसके साथ कोई दृश्य अभिक्रिया नहीं करता।

9. मृदु एवं कठोर जल में साबुन के नमूनों की सफाई क्षमता का तुलनात्मक अध्ययन:

  • विधि व अवलोकन: दो परखनलियों में समान मात्रा में आसुत जल (मृदु जल) तथा कैल्शियम/मैग्नीशियम लवण युक्त जल (कठोर जल) लेना। दोनों में समान बूंदें साबुन घोल की डालकर समान समय तक हिलाना।
  • निष्कर्ष: मृदु जल में प्रचुर मात्रा में झाग बनता है, जबकि कठोर जल में अविलेय सफेद अवक्षेप (स्कम / Scum) बनता है और झाग बहुत कम बनता है। अतः मृदु जल में साबुन की सफाई क्षमता अधिक होती है।

10. ओम के नियम का सत्यापन एवं V-I ग्राफ द्वारा प्रतिरोध का निर्धारण:

  • परिपथ संयोजन: प्रतिरोध तार, अमीटर (श्रेणीक्रम में), वोल्टमीटर (प्रतिरोध के समांतर क्रम में), धारा नियंत्रक (Rheostat), कुंजी एवं सेल को श्रेणी में जोड़ना। धारा नियंत्रक से विभिन्न पाठ्यांक लेकर V और I के मान नोट करना।
  • ग्राफ एवं प्रतिरोध गणना: V (Y-अक्ष) और I (X-अक्ष) के बीच खींचा गया ग्राफ एक मूल बिंदु से गुजरने वाली सरल रेखा प्राप्त होता है। ग्राफ की ढाल (Slope = ΔV/ΔI) दिए गए तार का विद्युत प्रतिरोध (R) प्रदर्शित करती है।

कक्षा 10 विज्ञान परीक्षा में 75/75 अंक लाने हेतु रणनीति (MP Education Gyan Deep विशेष):

  1. समीकरण संतुलन एवं रासायनिक सूत्र: क्लोर-क्षार प्रक्रिया, प्लास्टर ऑफ पेरिस, संक्षारण, उदासीनीकरण और एस्टरीकरण की संतुलित रासायनिक अभिक्रियाओं को लिखकर याद करें।
  2. स्वच्छ एवं नामांकित चित्र (Diagrams): मानव पाचन तंत्र, मानव हृदय, नेफ्रॉन (वृक्काणु), न्यूरॉन (तंत्रिका कोशिका), पुष्प की लंबवत काट, कांच के स्लैब से अपवर्तन और मानव नेत्र का पेंसिल से रेखांकन अभ्यास करें।
  3. किरण आरेख एवं आंकिक प्रश्न (Ray Diagrams & Numericals): अवतल/उत्तल दर्पण एवं लेंसों द्वारा प्रतिबिंब बनने के किरण आरेखों तथा दर्पण व लेंस सूत्र पर आधारित संख्यात्मक प्रश्नों को हल करें।
  4. प्रायोगिक प्रश्नों पर ध्यान: रंध्रों की स्लाइड बनाने की विधि, KOH का उपयोग, पॉप ध्वनि परीक्षण और V-I ग्राफ से जुड़े 2 व 3 अंकों के प्रश्न सीधे पूछे जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र. 1. एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं विज्ञान अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026-27 में कौन-कौन से अध्याय शामिल हैं?

उत्तर: लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) शैक्षणिक कैलेण्डर 2026-27 के अनुसार नवंबर माह तक कुल 10 अध्याय (अध्याय 1 रासायनिक अभिक्रियाएँ, अध्याय 2 अम्ल क्षारक लवण, अध्याय 3 धातु अधातु, अध्याय 4 कार्बन यौगिक, अध्याय 5 जैव प्रक्रम, अध्याय 6 नियंत्रण एवं समन्वय, अध्याय 7 जीव जनन कैसे करते हैं, अध्याय 8 आनुवंशिकता, अध्याय 9 प्रकाश, अध्याय 10 मानव नेत्र, तथा अध्याय 13 हमारा पर्यावरण) अर्द्धवार्षिक परीक्षा में सम्मिलित हैं।

प्र. 2. क्या 'विद्युत' और 'विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव' अर्द्धवार्षिक परीक्षा में आएंगे?

उत्तर: सैद्धांतिक अध्याय के रूप में अध्याय 11 (विद्युत) एवं अध्याय 12 (विद्युत धारा के चुम्बकीय प्रभाव) दिसंबर माह के पाठ्यक्रम में प्रस्तावित होते हैं, इसलिए अर्द्धवार्षिक की मुख्य थ्योरी परीक्षा में ये पाठ शामिल नहीं हैं; यद्यपि ओम के नियम का प्रायोगिक सत्यापन नवंबर माह के प्रैक्टिकल में सम्मिलित है।

प्र. 3. कक्षा 10 विज्ञान का प्रश्नपत्र कितने अंकों का होता है?

उत्तर: विज्ञान का सैद्धांतिक प्रश्नपत्र 75 अंकों का होता है तथा शेष 25 अंक विद्यालय स्तर पर प्रायोगिक परीक्षा (प्रैक्टिकल रिकॉर्ड फ़ाइल, प्रयोग प्रदर्शन एवं मौखिक परीक्षा) तथा प्रोजेक्ट कार्य के लिए निर्धारित होते हैं।

प्र. 4. क्या जीव विज्ञान से रेखाचित्र परीक्षा में अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं?

उत्तर: जी हाँ, बोर्ड ब्लूप्रिंट के अनुसार 3 और 4 अंकों के प्रश्नों में मानव पाचन तंत्र, हृदय, नेफ्रॉन, न्यूरॉन अथवा पुष्प की अनुदैर्ध्य काट के स्वच्छ नामांकित चित्र बनाने संबंधी प्रश्न अनिवार्य रूप से पूछे जाते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): यह पाठ्यक्रम लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), मध्यप्रदेश द्वारा जारी शैक्षणिक कैलेण्डर सत्र 2026-27 के आधार पर विद्यार्थियों एवं शिक्षक साथियों के शैक्षणिक मार्गदर्शन हेतु संकलित किया गया है। आधिकारिक सूचनाओं, परीक्षा समय-सारणी एवं अंक विभाजन में किसी भी आधिकारिक संशोधन हेतु विभागीय पोर्टल एवं संस्था प्रमुख के दिशा-निर्देशों का अवलोकन अवश्य करें।

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