ई-अटेंडेंस आदेश 2026: शत-प्रतिशत उपस्थिति न लगाने वाले शिक्षकों व संकुल प्राचार्यों पर कसा जाएगा शिकंजा
लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश ने आदेश क्रमांक/835 दिनांक 01.07.2026 जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि ई-अटेंडेंस लगभग 90% ही दर्ज हो रही है। जिन संकुल प्राचार्यों ने शत-प्रतिशत अटेंडेंस न लगाने वाले शिक्षकों के वेतन देयक फिर भी अग्रेषित कर दिए, उनके विरुद्ध अब निलंबन/अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी।
प्रिय पाठकों, MP Education Gyan Deep पर आज हम मध्यप्रदेश के सभी शासकीय शिक्षकों, संकुल प्राचार्यों, जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और संभागीय संयुक्त संचालकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण एक ताज़ा आदेश की विस्तृत जानकारी लेकर आए हैं। यह आदेश ई-अटेंडेंस (E-Attendance) प्रणाली के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा है और इसमें सीधे अनुशासनात्मक कार्यवाही तथा निलंबन तक की चेतावनी दी गई है। आइए आदेश के हर बिंदु को विस्तार से समझते हैं।
📌 आदेश का पूरा विवरण (Order Details)
| क्रमांक | 835 (प्रतिलिपि क्रमांक 836) |
| जारीकर्ता कार्यालय | लोक शिक्षण संचालनालय, मध्यप्रदेश, गौतम नगर, भोपाल – 462023 |
| दिनांक | 01/07/2026, भोपाल |
| विषय | ई-अटेंडेंस के संबंध में |
| प्रति (Addressed To) | 1. समस्त संभागीय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण म.प्र. 2. समस्त जिला शिक्षा अधिकारी, म.प्र. |
| संदर्भ पत्र 1 | क्र/अकादमिक/ह.शि/2025/1074, दिनांक 20.06.2025 |
| संदर्भ पत्र 2 | क्र/अकादमिक/ई अटेंडेंस/2026, दिनांक 09.06.2026 |
| जानकारी भेजने की अंतिम तिथि | 02.07.2026 |
| हस्ताक्षरकर्ता | अभिषेक सिंह, आयुक्त, लोक शिक्षण मध्यप्रदेश |
🧾 आदेश में क्या कहा गया है — पूरी पृष्ठभूमि
संदर्भित पत्र क्रमांक 1 (दिनांक 20.06.2025) के माध्यम से पहले ही सभी शिक्षकों को नियमित रूप से ई-अटेंडेंस मार्क करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद संदर्भित पत्र क्रमांक 2 (दिनांक 09.06.2026) में यह भी स्पष्ट कर दिया गया था कि जो शिक्षक ई-अटेंडेंस मार्क नहीं करेंगे, उनकी वेतन कटौती की जाए।
इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वर्तमान स्थिति यह है कि ई-अटेंडेंस के माध्यम से दर्ज हो रही उपस्थिति लगभग 90 प्रतिशत के आसपास ही सिमटी हुई है। संचालनालय ने इसे बहुत गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि इससे यह प्रमाणित होता है कि शत-प्रतिशत शिक्षकों द्वारा ई-अटेंडेंस नहीं लगाई जा रही — जो शासन के निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बाधक भी है।
| बिंदु | स्थिति |
|---|---|
| वर्तमान ई-अटेंडेंस दर्ज उपस्थिति | ~90% |
| अपेक्षित उपस्थिति (शासन निर्देश) | 100% |
| अंतर / उल्लंघन का दायरा | ~10% शिक्षक नियमित अटेंडेंस नहीं लगा रहे |
⚠️ अब क्या कार्यवाही होगी — मुख्य निर्देश
- जिन संकुल प्राचार्यों ने ऐसे शिक्षकों के वेतन देयक आहरण हेतु अग्रेषित (forward) कर दिए, जिन्होंने शत-प्रतिशत ई-अटेंडेंस नहीं लगाई — उन प्राचार्यों के विरुद्ध निलंबन/अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए हैं।
- ऐसी कार्यवाही से संबंधित जानकारी दिनांक 02.07.2026 तक संचालनालय को भेजना अनिवार्य है।
- यह जिम्मेदारी सीधे जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और संभागीय संयुक्त संचालकों (JD) को दी गई है।
- यदि समय-सीमा में यह कार्यवाही पूर्ण नहीं होती, तो संबंधित संयुक्त संचालक/जिला शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध भी अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी — अर्थात जवाबदेही अधिकारी स्तर तक बढ़ा दी गई है।
📅 समय-सीमा एक नज़र में
- 20.06.2025 — पहला पत्र: नियमित ई-अटेंडेंस मार्क करने के निर्देश जारी।
- 09.06.2026 — दूसरा पत्र: अटेंडेंस न लगाने वाले शिक्षकों की वेतन कटौती के निर्देश।
- 01.07.2026 — तीसरा आदेश (क्रमांक 835): ~90% उपस्थिति पर संकुल प्राचार्यों के विरुद्ध निलंबन/अनुशासनात्मक कार्यवाही के निर्देश।
- 02.07.2026 — इस आदेश की जानकारी संचालनालय को भेजने की अंतिम तिथि।
🎯 इस आदेश का शिक्षकों और प्राचार्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
- जो शिक्षक अब भी नियमित ई-अटेंडेंस नहीं लगाते, उनकी वेतन कटौती पहले से लागू निर्देशों के अनुसार जारी रहेगी।
- संकुल प्राचार्यों को अब वेतन देयक अग्रेषित करने से पहले हर शिक्षक की ई-अटेंडेंस की जांच अनिवार्य रूप से करनी होगी।
- बिना जांच के वेतन देयक अग्रेषित करने पर प्राचार्य स्वयं निलंबन जैसी कठोर कार्यवाही के दायरे में आ सकते हैं।
- जिला शिक्षा अधिकारी और संयुक्त संचालकों को भी अपने अधीनस्थ कार्यालयों की मॉनिटरिंग तेज करनी होगी, अन्यथा उन पर भी कार्यवाही हो सकती है।
"उपरोक्त निर्देशों के बावजूद भी वर्तमान में ई-अटेंडेंस के माध्यम से उपस्थिति 90 प्रतिशत के करीब है, जो शासन निर्देशों का गंभीर उल्लंघन है तथा शैक्षणिक गतिविधियों के लिए बाधक है।" — आदेश का सार, लोक शिक्षण संचालनालय, म.प्र.
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
यह आदेश मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग में डिजिटल अनुशासन और जवाबदेही को सख्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहां एक ओर शिक्षकों की वेतन कटौती की प्रक्रिया पहले से चल रही है, वहीं अब निगरानी की जिम्मेदारी सीधे संकुल प्राचार्यों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संयुक्त संचालकों तक बढ़ा दी गई है। MP Education Gyan Deep आपके लिए ऐसे सभी महत्वपूर्ण शासकीय आदेशों की सरल और स्पष्ट जानकारी लगातार लाता रहेगा — जुड़े रहें।

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