मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम 2026 – संपूर्ण जानकारी | MP Education Gyan Deep
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मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 2026 – संपूर्ण जानकारी

📢 सार्वजनिक सूचना – जन-परामर्श

मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा "मध्यप्रदेश सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्तें) नियम, 2026" अधिसूचित किया जाना प्रस्तावित है।

प्रस्तावित नियमों पर सुझाव/आपत्ति दिनांक 15 जून 2026 तक ई-मेल sogad1@mp.gov.in अथवा gad.mp.gov.in पर भेजी जा सकती है।

⚠️ महत्वपूर्ण तिथि

निर्धारित समयावधि (15 जून 2026) के पश्चात प्राप्त सुझावों पर विचार नहीं किया जाएगा।

हस्ताक्षरकर्ता अधिकारी: अजय कटेसरिया, अपर सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग, म.प्र. शासन।

मध्यप्रदेश शासन ने सेवा की सामान्य शर्तें नियम, 2026 का प्रारूप जारी किया है। यह नियम राज्य की समस्त श्रेणियों की शासकीय सेवाओं पर लागू होगा और नियुक्ति पात्रता, परिवीक्षा, वरिष्ठता, पदक्रम सूची, भर्ती एवं सेवा समाप्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों को एकीकृत रूप से विनियमित करेगा। नीचे इन नियमों की नियम-वार विस्तृत जानकारी दी गई है।


📌 नियम 1 एवं 2 – संक्षिप्त नाम, प्रारंभ एवं परिभाषाएँ

पद/शब्द अर्थ / परिभाषा
नियुक्ति प्राधिकारी शासन या वह प्राधिकारी जिसे किसी पद पर नियुक्ति की शक्ति शासन द्वारा सौंपी गई हो।
आयोग मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग
मण्डल कर्मचारी चयन मण्डल
सेवा राज्य के कार्यों से संबंधित पदों का समूह (अखिल भारतीय सेवा को छोड़कर)
पद शासन के अधीन पूर्वकालिक नियोजन (मानदेय/अनुदान पर नहीं)
नैतिक अधःपतन म.प्र. शासन, गृह विभाग द्वारा नैतिक अधःपतन की श्रेणी में रखे गए अपराध
संवर्ग सेवा का वह भाग जिसके लिए पृथक पदक्रम सूची तैयार की जाना अपेक्षित हो

📌 नियम 3 – विस्तार एवं प्रयुक्ति (Applicability)

ये नियम प्रत्येक ऐसे व्यक्ति पर लागू होंगे जो शासन में कोई पद धारण कर रहा हो। निम्नलिखित पर लागू नहीं होंगे:

  • जिनकी नियुक्ति/नियोजन की शर्तें किसी विधि के विशेष उपबंधों द्वारा विनियमित हों।
  • जिनकी सेवा की शर्तों के संबंध में विशेष उपबंध बनाए गए हों या करार द्वारा बनाए जाएं।
  • मध्यप्रदेश न्यायिक सेवा में नियुक्त व्यक्ति।
  • जो नियम-2(ञ) के अर्थ में 'पद' पर नहीं हैं।

📌 नियम 4 – सेवाओं का वर्गीकरण

प्रथम श्रेणी
मध्यप्रदेश सिविल सेवाएँ प्रथम श्रेणी
द्वितीय श्रेणी
मध्यप्रदेश सिविल सेवाएँ द्वितीय श्रेणी
तृतीय श्रेणी
अलिपिकवर्गीय (कार्यपालिका + तकनीकी) एवं लिपिकवर्गीय सेवाएँ
चतुर्थ श्रेणी
मध्यप्रदेश सिविल सेवाएँ चतुर्थ श्रेणी

नोट: किसी श्रेणी के पद का वर्गीकरण प्रथम से द्वितीय, द्वितीय से तृतीय या तृतीय से चतुर्थ श्रेणी में परिवर्तन प्रभावित व्यक्ति की पदावनति नहीं समझा जाएगा।

📌 नियम 5 एवं 6 – नियुक्ति पात्रता एवं निर्हरताएँ

✅ पात्रता (नियम 5)

किसी सेवा के पद पर नियुक्त होने के लिए व्यक्ति को भारत का नागरिक होना चाहिए।

निर्हरताएँ (नियम 6) – ये व्यक्ति नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होंगे:

  • एक से अधिक जीवनसाथी: यदि एक से अधिक जीवनसाथी जीवित हों (शासन विशेष कारण से छूट दे सकता है)।
  • शारीरिक/मानसिक अस्वस्थता: पद के कर्तव्य पालन में बाधा डाल सकने वाले दोष से मुक्त न हों।
  • नैतिक अधःपतन: न्यायालय द्वारा नैतिक अधःपतन संबंधी अपराध का सिद्धदोष ठहराया गया हो।
  • पदच्युत व्यक्ति: केंद्र/राज्य/सहकारी संस्था से अपचार के कारण पदच्युत हों।
  • पूर्व सेवारत: वर्तमान नियोक्ता से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त न किया हो (त्यागपत्र देकर आने पर छूट)।
  • दो से अधिक संतान: दो से अधिक जीवित संतान हों जिनमें से एक का जन्म 26 जनवरी 2001 को या उसके पश्चात हुआ हो।

📌 नियम 7 – भर्ती के तरीके

1
सीधी भर्ती (Direct Recruitment)

इसमें संविलयन, अनुकम्पा नियुक्ति एवं अन्य आधार पर नियुक्ति सम्मिलित है। आयोग/मण्डल से परामर्श अनिवार्य जहाँ संविधान के अनुच्छेद 320 के अंतर्गत आवश्यक हो।

2
पदोन्नति (Promotion)

उच्चतर पद पर पदोन्नति संबंधित भर्ती नियमों के अनुसार की जाएगी।

📌 नियम 8 – परिवीक्षा (Probation) – विस्तृत प्रावधान

🔷
परिवीक्षा पर नियुक्ति

सीधी भर्ती (संविलयन, अनुकम्पा सहित) से नियुक्त प्रत्येक व्यक्ति को विहित अवधि के लिए परिवीक्षा पर रखा जाएगा।

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परिवीक्षा विस्तार

नियुक्ति प्राधिकारी पर्याप्त कारणों से परिवीक्षा अवधि को अधिकतम 1 वर्ष तक और बढ़ा सकता है।

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विभागीय परीक्षा

परिवीक्षाधीन व्यक्ति को परिवीक्षा काल में विहित प्रशिक्षण प्राप्त करना एवं विभागीय परीक्षाएँ उत्तीर्ण करना होंगी।

स्थायीकरण

सफलतापूर्वक परिवीक्षा पूर्ण करने एवं विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण करने पर उसी पद पर स्थायी किया जाएगा। एक बार स्थायी होने के बाद उच्चतर पदों पर पदोन्नति हेतु पुनः स्थायीकरण की आवश्यकता नहीं।

स्वतः स्थायीकरण

परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने के 6 माह के भीतर यदि नियुक्ति प्राधिकारी कोई निर्णय नहीं लेता तो परिवीक्षाधीन व्यक्ति स्वतः स्थायी माना जाएगा।

परिवीक्षा सेवा समाप्ति के कारण (नियम 8(7)):

  • उपयुक्त शासकीय सेवक सिद्ध न हो सकना।
  • पद के लिए अनुपयुक्त होना।
  • कार्य प्रदर्शन असंतोषजनक होना।
  • विभागीय परीक्षा उत्तीर्ण न करना।
  • नियुक्ति के समय तथ्य छुपाना या मिथ्या तथ्य प्रस्तुत करना।

स्पष्टीकरण: परिवीक्षा सेवा समाप्ति का आदेश कलंकपूर्ण नहीं होना चाहिए। यह दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, अतः विभागीय जाँच की विस्तृत प्रक्रिया का पालन अनिवार्य नहीं है।

📌 नियम 9 – पदक्रम सूची (Gradation List)

  • प्रत्येक संवर्ग के लिए एक पदक्रम सूची रखी जाएगी जिसमें नाम वरिष्ठता क्रम से होंगे।
  • पदक्रम सूची का संधारण प्रतिवर्ष 1 जनवरी की स्थिति में उस वर्ष की 31 मार्च के पूर्व किया जाएगा।

📌 नियम 10 – वरिष्ठता के सिद्धांत

सीधी भर्ती
पदग्रहण की तिथि का विचार किए बिना चयन सूची के क्रम के आधार पर वरिष्ठता। परिवीक्षा बढ़ाए गए व्यक्ति की वरिष्ठता चयन सूची के अंतिम व्यक्ति के ठीक नीचे।
पदोन्नति
भर्ती नियम में विनिर्दिष्ट क्रम के अनुसार। वरिष्ठता-सह-उपयुक्तता आधार पर फीडर संवर्ग में सापेक्ष वरिष्ठता लागू।
अन्य आधार (संविलयन/अनुकम्पा)
संवर्ग में नियुक्ति की तिथि के अनुसार। संविलयन से नियुक्त व्यक्तियों में चयन के क्रम अनुसार परस्पर वरिष्ठता।
एक ही तिथि पर तीनों प्रकार
पदोन्नत व्यक्ति > सीधी भर्ती > अन्य आधार (वरिष्ठता क्रम)
पदावनति दंड
दंड अवधि समाप्ति के पश्चात पुनः पूर्व पद पर वरिष्ठता। निम्न पद पर की गई सेवा पदोन्नति हेतु अर्हकारी सेवा नहीं मानी जाएगी।
📖 उदाहरण – वरिष्ठता (नियम 10(4))

यदि वर्ष 2026 में 11.08.2026 को 15 व्यक्तियों की सीधी भर्ती, 05.10.2026 को 1 व्यक्ति की अनुकम्पा नियुक्ति और 01.12.2026 को 2 व्यक्तियों की पदोन्नति के आदेश प्रभावशील होते हैं तो क्रमशः सीधी भर्ती (15) > अनुकम्पा (1) > पदोन्नत (2) की वरिष्ठता होगी।

📌 नियम 11 से 15 – अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान

नियम विषय मुख्य प्रावधान
नियम 11 प्रत्यावर्तन एवं पुनर्नियुक्ति उच्चतर पद पर रिक्ति न होने पर निम्नतर पद पर प्रत्यावर्तन संभव। रिक्ति होने पर सापेक्ष वरिष्ठता क्रम से पुनर्नियुक्ति।
नियम 12 शिथिलीकरण राज्यपाल को किसी भी व्यक्ति के मामले में न्यायपूर्ण और सामयिक रीति से कार्रवाई करने की शक्ति सुरक्षित।
नियम 13 नियमों का निर्वचन व्याख्या संबंधी प्रश्न सामान्य प्रशासन विभाग को निर्दिष्ट; उनका विनिश्चय अंतिम होगा।
नियम 14 निरसन एवं व्यावृत्ति पूर्व के सभी नियम/निर्देश निरसित। पूर्व के आदेश नए नियमों के अंतर्गत आदेश माने जाएंगे।
नियम 15 विभागीय भर्ती नियम संशोधन समस्त विभाग अपने भर्ती नियम इन नियमों के अनुसार संशोधित करेंगे। संशोधन तक वे यथा-उपबंधित सीमा तक संशोधित माने जाएंगे।
📥 सुझाव भेजने का तरीका

प्रस्तावित नियमों पर आपत्ति/सुझाव देने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 है।

📧 ई-मेल: sogad1@mp.gov.in  |  🌐 वेबसाइट: gad.mp.gov.in

प्रारूप नियम विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

ये नियम कब से प्रभावी होंगे?
ये नियम मध्यप्रदेश राजपत्र में अधिसूचित किये जाने की तिथि से प्रवृत्त होंगे। अभी जन-परामर्श प्रक्रिया 15 जून 2026 तक चल रही है।
परिवीक्षा अवधि में स्वतः स्थायीकरण कब होगा?
परिवीक्षा अवधि पूर्ण होने के 6 माह के भीतर यदि नियुक्ति प्राधिकारी स्थायीकरण, सेवा समाप्ति या परिवीक्षा विस्तार का कोई निर्णय नहीं लेता तो परिवीक्षाधीन व्यक्ति स्वतः स्थायी माना जाएगा।
पदोन्नति के बाद नए पद पर पुनः स्थायीकरण आवश्यक है?
नहीं। नियम 8 के स्पष्टीकरण के अनुसार एक बार शासकीय सेवा में स्थायीकरण के पश्चात उच्चतर पदों पर पदोन्नति के बाद प्रत्येक धारित पद पर पुनः स्थायीकरण की आवश्यकता नहीं है।
दो से अधिक संतान होने पर क्या अपवाद है?
यदि उम्मीदवार की पहले से एक जीवित संतान है और आगामी प्रसव में दो या दो से अधिक संतानों का जन्म होता है तो वह अपात्र नहीं माना जाएगा।
पदावनति दंड के बाद वरिष्ठता कैसे तय होगी?
निम्न पद पर पदावनति की दंड अवधि समाप्त होने के पश्चात उसकी वरिष्ठता शास्ति के पूर्व धारित पद में उसी प्रकार निर्धारित की जाएगी जैसे उसे पदावनत न किया गया होता। किंतु निम्न पद पर की गई सेवा पदोन्नति हेतु अर्हकारी सेवा नहीं मानी जाएगी।
क्या नैतिक अधःपतन के मामले में न्यायालय में केस लंबित हो तो नियुक्ति मिलेगी?
जब तक न्यायालय में मामला लंबित हो, नियुक्ति का प्रकरण भी लंबित रखा जाएगा। अंतिम निर्णय के बाद यदि व्यक्ति गुण-दोष के आधार पर पूर्णतः दोषमुक्त होता है तो नियुक्ति दी जाएगी। केवल तकनीकी कारण या संदेह के आधार पर मुक्त होना पूर्णतः दोषमुक्त नहीं माना जाएगा।

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