Supreme Court TET judgment 2026सुप्रीम कोर्ट 2026: सेवारत शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य – समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाई
मामले का परिचय एवं पृष्ठभूमि
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मई 2026 को एक ऐतिहासिक निर्णय (Citation: 2026 INSC 597) सुनाया जिसमें देशभर के सेवारत शिक्षकों के लिए TET (Teacher Eligibility Test) पात्रता परीक्षा को अनिवार्य बनाए रखते हुए समय-सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी गई।
यह निर्णय Anjuman Ishaate-Taleem Trust v. State of Maharashtra (2025 SCC OnLine SC 1912) के विरुद्ध दायर 65 से अधिक Review Petitions पर आया। इन याचिकाओं में विभिन्न राज्य सरकारों, शिक्षक संगठनों एवं व्यक्तिगत शिक्षकों ने TET अनिवार्यता को चुनौती दी थी।
मामला: Review Petition (Civil) Diary No.53434/2025 in Civil Appeal No. 1385/2025
याचिकाकर्ता: State of U.P. एवं अन्य 65+ Review Petitioners
प्रतिवादी: Anjuman Ishaat-E-Taleem Trust & Ors.
पीठ: Justice Dipankar Datta एवं Justice Manmohan
निर्णय तिथि: 29 मई 2026, नई दिल्ली
मूल निर्णय (Anjuman सुप्रा) में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि RTE Act 2009 की धारा 23 के अनुसार TET न केवल नई नियुक्तियों बल्कि सेवारत शिक्षकों के लिए भी अनिवार्य अर्हता शर्त है। साथ ही यह पदोन्नति के लिए भी अनिवार्य है।
महत्वपूर्ण तिथियों की समयरेखा
Review Petitions में उठाए गए 5 मुख्य विवाद बिंदु
याचिकाकर्ताओं (राज्य सरकारों, शिक्षक संगठनों, व्यक्तिगत शिक्षकों) ने निम्नलिखित 5 आधारों पर Review Petitions दायर की थीं:
न्यायालय का विश्लेषण एवं निर्णय
A. क्या RTE Act पूर्वव्यापी है?
न्यायालय ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि RTE Act की धारा 23(1) भविष्य की नियुक्तियों के लिए है किंतु उपधारा (2) का पहला प्रावधान तत्कालीन सेवारत शिक्षकों के लिए है। संसद ने जानबूझकर "Any person" एवं "a teacher" में अंतर किया है।
B. NCTE Act धारा 12A का प्रावधान
न्यायालय ने कहा कि NCTE Act धारा 12A का पहला प्रावधान शिक्षकों को सुरक्षा देता है किंतु दूसरा प्रावधान स्पष्ट रूप से RTE Act के अंतर्गत निर्धारित अवधि में TET अर्हता प्राप्त करना अनिवार्य बनाता है। याचिकाकर्ता दूसरे प्रावधान को नजरअंदाज कर रहे थे।
C. सेवा शर्तों में परिवर्तन का तर्क
न्यायालय ने कहा कि TET एक नई सेवा शर्त नहीं बल्कि संवैधानिक आवश्यकता है जो अनुच्छेद 21-A (शिक्षा का अधिकार) से उत्पन्न होती है। किसी क़ानून की कार्यप्रणाली को बुराई नहीं माना जा सकता।
D. शिक्षकों के विस्थापन का सार्वजनिक हित तर्क
राज्य सरकारों ने तर्क दिया कि हजारों शिक्षक सेवा से बाहर हो सकते हैं जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। इस पर न्यायालय ने कहा:
"Service of teachers cannot come at the cost of educational future of the children. The RTE Act is a child centric legislation and must be read so."
न्यायालय ने यह भी कहा कि RTE Act लागू होने के 15 वर्ष से अधिक समय बीत चुके हैं और यह TET पास करने के लिए पर्याप्त समय है।
E. Review का दायरा
न्यायालय ने Northern India Caterers v. State (UT of Delhi) (1980) एवं Bharti Airtel Ltd. v. A.S. Raghavendra (2024) का हवाला देते हुए कहा कि Review Petition अपील नहीं है। रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि के बिना पुनर्विचार संभव नहीं।
RTE Act की धारा 23 – क्या कहती है?
| प्रावधान | विषय | मुख्य बात |
|---|---|---|
| धारा 23(1) | भविष्य की नियुक्तियाँ | किसी भी व्यक्ति (Any person) को शिक्षक नियुक्त होने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित न्यूनतम अर्हता होनी चाहिए। |
| धारा 23(2) प्रथम प्रावधान | तत्कालीन सेवारत शिक्षक | RTE Act प्रारंभ (1 अप्रैल 2010) पर सेवारत शिक्षकों को 5 वर्ष में अर्हता प्राप्त करनी होगी। |
| धारा 23(2) द्वितीय प्रावधान (2017 संशोधन) |
31 मार्च 2015 तक सेवारत | 31 मार्च 2015 तक सेवारत शिक्षकों को 2017 संशोधन के प्रारंभ से 4 वर्ष (प्रभावी 2 वर्ष) का अतिरिक्त समय। |
✅ सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया: RTE Act की धारा 23 में "teacher" एवं "Any person" का भेद जानबूझकर किया गया है जो यह साबित करता है कि सेवारत शिक्षकों पर भी TET अनिवार्यता का प्रयोग मूल अधिनियम से ही इच्छित था।
अंतिम आदेश – सुप्रीम कोर्ट (29 मई 2026)
- सभी 65+ Review Petitions खारिज की गईं। TET अनिवार्यता के आदेश में कोई त्रुटि नहीं पाई गई।
- सेवारत शिक्षकों के लिए TET अर्हता प्राप्त करने की समय-सीमा 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष की गई अर्थात् अब 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना होगा।
- यह विस्तार अनुच्छेद 142 के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित करने हेतु दिया गया।
- संबंधित राज्य एवं सक्षम प्राधिकारियों को TET वर्ष में दो बार (लगभग 6 माह के अंतराल पर) आयोजित करने का निर्देश।
- समय-सीमा विस्तार के लिए आगे कोई प्रार्थना स्वीकार नहीं की जाएगी – यह अंतिम है।
| बिंदु | पूर्व स्थिति | नई स्थिति (2026 INSC 597) |
|---|---|---|
| TET अनिवार्यता | अनिवार्य | अनिवार्य (बरकरार) |
| TET की समय-सीमा | 31 अगस्त 2027 | 31 अगस्त 2028 |
| अतिरिक्त समय | 2 वर्ष (1 सित. 2025 से) | 3 वर्ष (1 सित. 2025 से) |
| पदोन्नति हेतु TET | अनिवार्य | अनिवार्य (बरकरार) |
| TET परीक्षा आवृत्ति | निर्धारित नहीं | वर्ष में 2 बार (निर्देश) |
| आगे विस्तार | — | नहीं मिलेगा |
MP शिक्षकों पर प्रभाव
इस निर्णय का मध्यप्रदेश के शिक्षकों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। जिन शिक्षकों ने अभी तक MPTET (MP Teacher Eligibility Test) या CTET पास नहीं किया है, उन्हें 31 अगस्त 2028 तक यह अर्हता प्राप्त करनी होगी।
⚠️ MP शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण: यदि 31 अगस्त 2028 तक TET पास नहीं किया तो सेवा में बने रहने का अधिकार समाप्त हो सकता है। साथ ही बिना TET के पदोन्नति भी संभव नहीं।
| श्रेणी | TET का प्रकार | समय-सीमा |
|---|---|---|
| कक्षा 1-5 शिक्षक | MPTET/CTET Paper-I | 31 अगस्त 2028 |
| कक्षा 6-8 शिक्षक | MPTET/CTET Paper-II | 31 अगस्त 2028 |
| पदोन्नति के इच्छुक | संबंधित TET | अनिवार्य (कोई छूट नहीं) |
✅ सुझाव: सेवारत शिक्षक अभी से MPTET/CTET की तैयारी शुरू करें। राज्य सरकार को वर्ष में 2 बार TET आयोजित करने का निर्देश है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
संपूर्ण निर्णय – एक नजर में
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| Citation | 2026 INSC 597 | REPORTABLE |
| न्यायालय | सर्वोच्च न्यायालय, भारत |
| पीठ | Justice Dipankar Datta, Justice Manmohan |
| निर्णय तिथि | 29 मई 2026 |
| मामला | Review Petition (Civil) Diary No.53434/2025 |
| Review Petitions | 65+ – सभी खारिज |
| TET अनिवार्यता | बरकरार (सेवारत रहने + पदोन्नति दोनों के लिए) |
| नई TET समय-सीमा | 31 अगस्त 2028 |
| आगे विस्तार | नहीं (Court ने स्पष्ट मना किया) |
| TET आवृत्ति | वर्ष में 2 बार (निर्देश) |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 21-A, अनुच्छेद 142 |
| मूल अधिनियम | RTE Act 2009, धारा 23 |

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